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Charkhi Dadri News: नागरिक अस्पताल में एसएनसीयू शुरू, अब नवजात को नहीं करना पड़ेगा रेफर
Tue, 06 Aug 2024 05:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 06 Aug 2024 05:21 AM IST
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एसएनसीयू यूनिट का जायजा लेते चिकित्सक। संवाद
प्रस्तावित लीड
अस्पताल में 64.21 लाख की लागत से तैयार की गई एसएनसीयू
- तीन वरिष्ठ चिकित्सक और 10 स्टाफ नर्स की लगाई गई ड्यूटी
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के नागरिक अस्पताल में सोमवार को एसएनसीयू का शुभारंभ कार्यवाहक सीएमओ और स्थानीय वरिष्ठ चिकित्सकों ने किया। 64 लाख की लागत से बनाई गई स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में जन्म के समय गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों का उपचार हो सकेगा। उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा।
शहर के जिला अस्पताल में एसएनसीयू का शुभारंभ कार्यवाहक सीएमओ डॉ. नरेश कुमार, डीएमएस डॉ. बिजेंद्र लडवाल, एसएमओ डॉ. वेदपाल, डॉ. आशीष मान आदि ने किया। अस्पताल में 64 लाख 21 हजार की लागत से स्थापित की गई इस यूनिट में समय से पहले जन्मे, पीलिया रोग से ग्रस्त, निमोनिया व कम वजन वाले बच्चों का उपचार यहीं हो सकेगा। यूनिट में बच्चों को मॉनिटर और रेडियर वार्मर समेत अन्य चिकित्सीय उपकरणों की सुविधा मिल सकेगी। इससे अब नवजात को होने वाली गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।
हर वर्ष 500 से अधिक बच्चों को किया जाता था रेफर
जिलेभर में हर वर्ष 5000 से अधिक बच्चे जन्म लेते हैं। इन बच्चों में लगभग 10 प्रतिशत समय से पहले जन्म लेते हैं। जिन्हें प्री मेच्योर बेबी कहा जाता है। वहीं, कुछ बच्चे वजन की कमी, निमोनिया व पीलिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त पाए जाते हैं। ऐसे में हर वर्ष 500 के लगभग बच्चों को उपचार के लिए रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता था। जिले के नागरिक अस्पताल में रेफर होने वाले बच्चों की संख्या को देखते हुए यूनिट की स्थापना की गई है।
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नए भवन में स्थापित की गई है यूनिट
नागरिक अस्पताल स्थित नए भवन में एसएनसीयू बनाई गई है। यूनिट में 12 बेड रेडियर वॉर्मर, छह फोटो थेरेपी यूनिट बनाई गई हैं। यहां दाखिल होने वाले नवजात के लिए तीन वरिष्ठ चिकित्सक व 10 स्टाफ नर्स को लगाया गया है।
निजी अस्पताल में होता था महंगा उपचार
इन बीमारियों से ग्रस्त नवजात का उपचार निजी अस्पताल में काफी महंगा पड़ता था। निजी अस्पताल संचालक प्रति बच्चा उपचार के लिए 5 से 10 हजार रुपये परिजनों से चार्ज करते हैं। लेकिन अब नागरिक अस्पताल में इस यूनिट के शुरू होने के बाद नवजात का उपचार यहीं हो सकेगा।
क्या है एसएनसीयू
एसएनसीयू उन बच्चों के जीवन के शुरुआती दिनों को सुरक्षा का कवच प्रदान करती है जब उनका समय से पहले जन्म हुआ हो या फिर उनमें किसी बीमारी के लक्षण हों। अस्पताल में हर दिन औसतन जन्म लेने वाले 14 बच्चों में कोई एक बच्चा किसी न किसी रूप से बीमार होता है। इन बीमार बच्चों के इलाज में एसएनसीयू बेहद कारगर साबित होती है।
फोटो 23 : नागरिक अस्पताल में एसएनसीयू यूनिट का शुभारंभ करते कार्यवाहक सीएमओ डॉ. नरेश कुमार, डीएमएस डॉ. बिजेंद्र लडवाल के साथ अन्य चिकित्सक। संवाद
फोटो 24: एसएनसीयू यूनिट का जायजा लेते चिकित्सक। संवाद
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अस्पताल में 64.21 लाख की लागत से तैयार की गई एसएनसीयू
- तीन वरिष्ठ चिकित्सक और 10 स्टाफ नर्स की लगाई गई ड्यूटी
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के नागरिक अस्पताल में सोमवार को एसएनसीयू का शुभारंभ कार्यवाहक सीएमओ और स्थानीय वरिष्ठ चिकित्सकों ने किया। 64 लाख की लागत से बनाई गई स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में जन्म के समय गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों का उपचार हो सकेगा। उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा।
शहर के जिला अस्पताल में एसएनसीयू का शुभारंभ कार्यवाहक सीएमओ डॉ. नरेश कुमार, डीएमएस डॉ. बिजेंद्र लडवाल, एसएमओ डॉ. वेदपाल, डॉ. आशीष मान आदि ने किया। अस्पताल में 64 लाख 21 हजार की लागत से स्थापित की गई इस यूनिट में समय से पहले जन्मे, पीलिया रोग से ग्रस्त, निमोनिया व कम वजन वाले बच्चों का उपचार यहीं हो सकेगा। यूनिट में बच्चों को मॉनिटर और रेडियर वार्मर समेत अन्य चिकित्सीय उपकरणों की सुविधा मिल सकेगी। इससे अब नवजात को होने वाली गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।
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हर वर्ष 500 से अधिक बच्चों को किया जाता था रेफर
जिलेभर में हर वर्ष 5000 से अधिक बच्चे जन्म लेते हैं। इन बच्चों में लगभग 10 प्रतिशत समय से पहले जन्म लेते हैं। जिन्हें प्री मेच्योर बेबी कहा जाता है। वहीं, कुछ बच्चे वजन की कमी, निमोनिया व पीलिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त पाए जाते हैं। ऐसे में हर वर्ष 500 के लगभग बच्चों को उपचार के लिए रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता था। जिले के नागरिक अस्पताल में रेफर होने वाले बच्चों की संख्या को देखते हुए यूनिट की स्थापना की गई है।
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नए भवन में स्थापित की गई है यूनिट
नागरिक अस्पताल स्थित नए भवन में एसएनसीयू बनाई गई है। यूनिट में 12 बेड रेडियर वॉर्मर, छह फोटो थेरेपी यूनिट बनाई गई हैं। यहां दाखिल होने वाले नवजात के लिए तीन वरिष्ठ चिकित्सक व 10 स्टाफ नर्स को लगाया गया है।
निजी अस्पताल में होता था महंगा उपचार
इन बीमारियों से ग्रस्त नवजात का उपचार निजी अस्पताल में काफी महंगा पड़ता था। निजी अस्पताल संचालक प्रति बच्चा उपचार के लिए 5 से 10 हजार रुपये परिजनों से चार्ज करते हैं। लेकिन अब नागरिक अस्पताल में इस यूनिट के शुरू होने के बाद नवजात का उपचार यहीं हो सकेगा।
क्या है एसएनसीयू
एसएनसीयू उन बच्चों के जीवन के शुरुआती दिनों को सुरक्षा का कवच प्रदान करती है जब उनका समय से पहले जन्म हुआ हो या फिर उनमें किसी बीमारी के लक्षण हों। अस्पताल में हर दिन औसतन जन्म लेने वाले 14 बच्चों में कोई एक बच्चा किसी न किसी रूप से बीमार होता है। इन बीमार बच्चों के इलाज में एसएनसीयू बेहद कारगर साबित होती है।
फोटो 23 : नागरिक अस्पताल में एसएनसीयू यूनिट का शुभारंभ करते कार्यवाहक सीएमओ डॉ. नरेश कुमार, डीएमएस डॉ. बिजेंद्र लडवाल के साथ अन्य चिकित्सक। संवाद
फोटो 24: एसएनसीयू यूनिट का जायजा लेते चिकित्सक। संवाद