{"_id":"67ed838de8295a5c1c088fdb","slug":"skin-disease-opd-increased-during-harvesting-season-there-is-no-specialist-in-civil-hospital-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1001-134500-2025-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: फसल कटाई सीजन में बढ़ी चर्म रोग ओपीडी, नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञ ही नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: फसल कटाई सीजन में बढ़ी चर्म रोग ओपीडी, नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञ ही नहीं
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे मरीज।
चरखी दादरी। परिवर्तनशील मौसम और फसल कटाई सीजन में चर्म रोग की ओपीडी बढ़ी हुई है। दूसरी ओर दादरी नागरिक अस्पताल में पिछले 10 माह से चर्म रोग विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा है। सामान्य चर्म रोगियों को तो वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे उपचार मिल रहा है जबकि गंभीर चर्म रोग से ग्रस्त मरीजों को रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है।
गौरतलब है कि चर्म रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों व तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय सामान्य चर्म रोगियों की ओपीडी मेडिकल ऑफिसर देख रहे हैं और वे ही दवाएं लिखने के साथ मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। दूसरी ओर गंभीर चर्म रोग के मरीजों को रोहतक पीजीआई तक आने-जाने में करीब 130 किलोमीटर मीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।
वहीं, अगर मरीज कादमा, झोझूकलां या बाढड़ा क्षेत्र का हो तो दूरी करीब 200 किलोमीटर तक हो जाती है। ऐसे में मरीजों को रोहतक पीजीआई के चक्कर काटने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बुधवार को नागरिक अस्पताल अस्पताल आए चर्म रोगी रमेश, मोनिका, सूरज और दलीप सिंह ने अस्पताल प्रशासन से चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती करवाने की मांग की है, ताकि उन्हें भागदौड़ से छुटकारा और गृह जिले में उपचार मिल सके।
विज्ञापन
प्रतिदिन आ रहे 60 चर्म रोगी
इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटाई व बिजाई कार्य चल रहा है। इसके चलते चर्म रोगियों की संख्या बढ़ी हुई है। नागरिक अस्पताल में फिलहाल प्रतिदिन करीब 60 चर्म रोगी आते हैं। प्रतिदिन 10 से अधिक मरीजों के रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले अधिकतर लोग आर्थिक रूप से कमजोर ही होते हैं। ऐसे में उनके लिए निजी अस्पताल में उपचार करवाना संभव नहीं है। इसके चलते कई बार तो मरीज उपचार में घरेलू नुस्खे तक अपना लेते हैं।
ये हैं चर्म रोग के लक्षण
रूखी- सूखी त्वचा, तिल, मुंहासे, मस्से, सफेद दाग, दाद, खुजली, फोड़ा, त्वचा का छिलना, अंगुलियों के बीच घाव बनना आदि चर्म रोग के लक्षण हैं।
ये बरतें सावधानी
बार-बार दूषित पानी से गुजरने से बचना चाहिए। दूषित पानी से गुजरने के बाद साफ पानी से पैरों को धोएं। खेत-खलिहान में काम करने के बाद गर्म पानी से नहाएं और घाव होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर दवा लगाएं। शुद्ध व साफ पानी का सेवन करें।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए मुख्यालय डिमांड भेज चुके हैं। जल्द ही चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो जाएगी और उसके बाद मरीजों को भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
- राजविंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी
विज्ञापन
गौरतलब है कि चर्म रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों व तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय सामान्य चर्म रोगियों की ओपीडी मेडिकल ऑफिसर देख रहे हैं और वे ही दवाएं लिखने के साथ मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। दूसरी ओर गंभीर चर्म रोग के मरीजों को रोहतक पीजीआई तक आने-जाने में करीब 130 किलोमीटर मीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।
विज्ञापन
वहीं, अगर मरीज कादमा, झोझूकलां या बाढड़ा क्षेत्र का हो तो दूरी करीब 200 किलोमीटर तक हो जाती है। ऐसे में मरीजों को रोहतक पीजीआई के चक्कर काटने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बुधवार को नागरिक अस्पताल अस्पताल आए चर्म रोगी रमेश, मोनिका, सूरज और दलीप सिंह ने अस्पताल प्रशासन से चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती करवाने की मांग की है, ताकि उन्हें भागदौड़ से छुटकारा और गृह जिले में उपचार मिल सके।
विज्ञापन
प्रतिदिन आ रहे 60 चर्म रोगी
इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटाई व बिजाई कार्य चल रहा है। इसके चलते चर्म रोगियों की संख्या बढ़ी हुई है। नागरिक अस्पताल में फिलहाल प्रतिदिन करीब 60 चर्म रोगी आते हैं। प्रतिदिन 10 से अधिक मरीजों के रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले अधिकतर लोग आर्थिक रूप से कमजोर ही होते हैं। ऐसे में उनके लिए निजी अस्पताल में उपचार करवाना संभव नहीं है। इसके चलते कई बार तो मरीज उपचार में घरेलू नुस्खे तक अपना लेते हैं।
ये हैं चर्म रोग के लक्षण
रूखी- सूखी त्वचा, तिल, मुंहासे, मस्से, सफेद दाग, दाद, खुजली, फोड़ा, त्वचा का छिलना, अंगुलियों के बीच घाव बनना आदि चर्म रोग के लक्षण हैं।
ये बरतें सावधानी
बार-बार दूषित पानी से गुजरने से बचना चाहिए। दूषित पानी से गुजरने के बाद साफ पानी से पैरों को धोएं। खेत-खलिहान में काम करने के बाद गर्म पानी से नहाएं और घाव होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर दवा लगाएं। शुद्ध व साफ पानी का सेवन करें।
- राजविंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी