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नहरें और माइनर में उगी झाड़ियां, घास और झुंडे, सफाई की दरकार
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जिले की मुख्य लोहारू कैनाल।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। इस बार लंबा मानसून सीजन होने पर झुंडे, झाड़ियां व घास उगने से नहरों की स्थिति खराब हो गई है। इससे पानी के प्रवाह में रुकावट बन रही है और पानी निर्धारित क्षमता से कम बह रहा है। इतना ही नहीं जिले के 58 जलघर भी नहरों व माइनर के जरिये भरे जात हैं और ऐसे में नहरों की सफाई करने की जरूरत बनी हुई है।
वैसे भी इस बार लगातार तीन माह तक नहरों में फ्लड का पानी बहता रहा। नहरें घास व मिट्टी आदि से अटी होने से पानी की गुणवत्ता भी खराब हो गई है। जिला में 78 नहर, माइनर व सब माइनर हैं जिनके जरिये जिला के विभिन्न भागों में पानी की आपूर्ति की जाती है। सभी जलघरों में नहरों के जरिये ही पानी भरा जाता है। इस समय जलघरों का पानी भी खराब बना हुआ है।
इस समय कई नहरों की स्थिति खराब बनी हुई है। माइनर और सब माइनरों की तो और भी खराब हालत है। करीब 10 माइनर एवं सब माइनर का तो अस्तित्व ही नहीं रहा है। कई माइनरों में विभाग ने पानी छोड़ना ही बंद कर दिया है क्योंकि यह जगह-जगह से कंडम हैं। माइनरों में झुंडे व घास आदि उगी हुई हैं जिससे इनमें पानी छोड़ना विभाग उचित नहीं मान रहा है। शहर के दिल्ली रोड से देवी ढाणा मंदिर को जाने वाला माइनर ढाई दशक से बंद पड़ी है। इसमें विभाग पानी नहीं छोड़ रहा है। यह माइनर जगह-जगह से कंडम बनी हुई है। इस माइनर में पानी नहीं छोड़ने से आसपास के क्षेत्र में जमीनी पानी में भी खारापन होने लगा है। जिले के जिन भागों में जमीनी पानी मीठा है वह नहरों की बदौलत ही है।
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- नहर व माइनर के जीर्णोद्धार के लिए ये अनुकूल समय
जिले की अटी पड़ी नहरों के जीर्णोद्धार एवं सफाई करने की इस समय सख्त जरूरत बनी हुई है ताकि सिंचाई व पेयजल का संकट न बढ़ने पाए। इस मौसम में नहरों की सफाई एवं जीर्णोद्धार का कार्य आसानी से पूरा हो सकता है। गर्मी के सीजन में तो नहरों में पानी की ज्यादा जरूरत होती है। गर्मी के बाद मानसून सीजन में पहाड़ों से नहरों में आने वाले बारिश के पानी की आगे निकासी करना भी जरूरी होता है।
- ये हैं जिले की प्रमुख नहरें व माइनर
जिले में प्रमुख नहर लोहारू कैनाल है। इसके अलावा बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी, मैहड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी, सतनाली फीडर, बौंदकलां नहर, दादरी माइनर, चरखी माइनर, भैरवी माइनर आदि प्रमुख हैं। लोहारू कैनाल से ही माइनर व सब माइनरों में पानी छोड़ा जाता है।
लोग बोले : पीने लायक नहीं जलघरों का पानी
गांव ढाणी फौगाट निवासी टेकचंद, महेंद्र शर्मा, सुरेंद्र, लीलाराम व पवन कुमार आदि ने बताया कि नहरों में फ्लड एवं खेतों का पानी छोड़ने से जलघर का पानी पीने लायक नहीं रहा। पानी में दुर्गंध बनी हुई है। विभाग को अब नहरों में साफ पानी छोड़ना चाहिए। उनके गांव का जलघर बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी से भरा जाता है।
नहरों व माइनरों की हर साल सफाई करवाई जाती है। इस बार भी जल्दी ही सफाई करवाई जाएगी। ज्यादा बारिश होने व नहरों में लंबे समय तक पानी बहने से घास व झुंडे आदि उग गए हैं।
-सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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वैसे भी इस बार लगातार तीन माह तक नहरों में फ्लड का पानी बहता रहा। नहरें घास व मिट्टी आदि से अटी होने से पानी की गुणवत्ता भी खराब हो गई है। जिला में 78 नहर, माइनर व सब माइनर हैं जिनके जरिये जिला के विभिन्न भागों में पानी की आपूर्ति की जाती है। सभी जलघरों में नहरों के जरिये ही पानी भरा जाता है। इस समय जलघरों का पानी भी खराब बना हुआ है।
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इस समय कई नहरों की स्थिति खराब बनी हुई है। माइनर और सब माइनरों की तो और भी खराब हालत है। करीब 10 माइनर एवं सब माइनर का तो अस्तित्व ही नहीं रहा है। कई माइनरों में विभाग ने पानी छोड़ना ही बंद कर दिया है क्योंकि यह जगह-जगह से कंडम हैं। माइनरों में झुंडे व घास आदि उगी हुई हैं जिससे इनमें पानी छोड़ना विभाग उचित नहीं मान रहा है। शहर के दिल्ली रोड से देवी ढाणा मंदिर को जाने वाला माइनर ढाई दशक से बंद पड़ी है। इसमें विभाग पानी नहीं छोड़ रहा है। यह माइनर जगह-जगह से कंडम बनी हुई है। इस माइनर में पानी नहीं छोड़ने से आसपास के क्षेत्र में जमीनी पानी में भी खारापन होने लगा है। जिले के जिन भागों में जमीनी पानी मीठा है वह नहरों की बदौलत ही है।
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- नहर व माइनर के जीर्णोद्धार के लिए ये अनुकूल समय
जिले की अटी पड़ी नहरों के जीर्णोद्धार एवं सफाई करने की इस समय सख्त जरूरत बनी हुई है ताकि सिंचाई व पेयजल का संकट न बढ़ने पाए। इस मौसम में नहरों की सफाई एवं जीर्णोद्धार का कार्य आसानी से पूरा हो सकता है। गर्मी के सीजन में तो नहरों में पानी की ज्यादा जरूरत होती है। गर्मी के बाद मानसून सीजन में पहाड़ों से नहरों में आने वाले बारिश के पानी की आगे निकासी करना भी जरूरी होता है।
- ये हैं जिले की प्रमुख नहरें व माइनर
जिले में प्रमुख नहर लोहारू कैनाल है। इसके अलावा बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी, मैहड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी, सतनाली फीडर, बौंदकलां नहर, दादरी माइनर, चरखी माइनर, भैरवी माइनर आदि प्रमुख हैं। लोहारू कैनाल से ही माइनर व सब माइनरों में पानी छोड़ा जाता है।
लोग बोले : पीने लायक नहीं जलघरों का पानी
गांव ढाणी फौगाट निवासी टेकचंद, महेंद्र शर्मा, सुरेंद्र, लीलाराम व पवन कुमार आदि ने बताया कि नहरों में फ्लड एवं खेतों का पानी छोड़ने से जलघर का पानी पीने लायक नहीं रहा। पानी में दुर्गंध बनी हुई है। विभाग को अब नहरों में साफ पानी छोड़ना चाहिए। उनके गांव का जलघर बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी से भरा जाता है।
नहरों व माइनरों की हर साल सफाई करवाई जाती है। इस बार भी जल्दी ही सफाई करवाई जाएगी। ज्यादा बारिश होने व नहरों में लंबे समय तक पानी बहने से घास व झुंडे आदि उग गए हैं।
-सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग