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Charkhi Dadri News: 4 साल में भेजी 31 डिमांड, फिर भी नहीं मिला बाल रोग विशेषज्ञ

Tue, 28 Feb 2023 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 28 Feb 2023 11:21 PM IST
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Sent 31 demands in 4 years, still not found pediatrician
चरखी दादरी। जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों के उपचार की कोई सुविधा नहीं है। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से 4 साल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए मुख्यालय 31 डिमांड भेजी गई हैं, लेकिन इसके बाद भी हालात जस के तस है। इस समय 18 वर्ष से कम उम्र के करीब 90 हजार बच्चों के उपचार के लिए जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। दूसरी ओर जल्द से जल्द बाल-शिशु नर्सरी शुरू करने की योजना है, लेकिन बिना बाल रोग विशेषज्ञ मिले ऐसा कर पाना संभव नहीं है।
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चरखी दादरी को जिले का दर्जा देने के छह साल बाद भी प्रदेश सरकार सिविल अस्पताल में पीडिट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) तैनात नहीं कर पाई है। बाल रोग विशेषज्ञ का पद सिविल अस्पताल में लंबे समय से खाली पड़ा है। इस समय सामान्य अस्पताल में बच्चों के उपचार की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में निजी अस्पताल ही बच्चों का उपचार कराने का एकमात्र विकल्प हैं।
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स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि बाल रोग विशेषज्ञ के तैनाती की डिमांड हेड ऑफिस भेजी जा चुकी है। संवाददाता ने अब तक भेजी गई डिमांड की स्थिति जांची तो सामने आया कि 2019 से 2023 तक जिला स्वास्थ्य विभाग ने बाल रोग समेत अन्य विशेषज्ञों की तैनाती के लिए 31 डिमांड भेजी हैं, लेकिन विशेषज्ञ नहीं मिल पाए हैं।
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बता दें कि मातृ- शिशु अस्पताल में बाल-शिशु नर्सरी शुरू की जानी है और सरकार इसे अनुमति दे चुकी है। इतना ही नहीं नर्सरी के लिए बेबी वॉर्मर समेत कई उपकरण भी पहुंच चुके हैं, लेकिन अब तक विशेषज्ञ की तैनाती का इंतजार है। इतना ही नहीं इसके लिए सरकार ने डेढ़ करोड़ की ग्रांट भी दी हुई है, लेकिन बावजूद इसके विशेषज्ञ की कमी के चलते बाल-शिशु नर्सरी शुरू नहीं हो पाई है।
- निजी अस्पतालों में हर माह चुकाने पड़ते हैं करीब 21 लाख
शहर में मुख्य पांच निजी अस्पतालों में छोटे बच्चों का उपचार होता है। सूत्रों की मानें तो एक अस्पताल की दैनिक ओपीडी औसतन 40 रहती है और प्रति बच्चा ओपीडी फीस 150 से 170 रुपये निर्धारित है। इस दौरान कम से कम 200 रुपये की दवा भी दी जाती है। इस लिहाज से एक बार उपचार पर करीब 350 रुपये खर्च आता है। इस लिहाज से एक अस्पताल में प्रतिदिन 14 हजार और एक माह में करीब चार लाख बीस हजार की इनकम होती है। शहर में पांच अस्पताल हैं और इस लिहाज से उपचार के लिए प्रति माह वहां बच्चों के माता-पिता को करीबन 21 लाख रुपये चुकाने होते हैं।
- विधानसभा में उठ चुका मुद्दा
चरखी दादरी में बेपटरी स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा हाल ही में विधानसभा में भी गूंजा है। विधायक नैना चौटाला ने सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरा। उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ समेत दादरी जिले में मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों को मुहैया कराने की मांग की है। स्वास्थ्य मंत्री की गैरमौजूदगी में मंत्री बनवारी लाल ने उन्हें जल्द ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कराने का आश्वासन दिया था।
- सरकार डेढ़ लाख देने को तैयार, फिर भी नहीं आ रहे विशेषज्ञ
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए अधिकारी प्रयासरत है। पहले सरकार जहां बाल रोग विशेषज्ञ को एक लाख देने को तैयार थी तो वहीं अब इस राशि को डेढ़ लाख कर दिया है। बावजूद इसके कोई सेवाएं देने को तैयार नहीं है।


विशेषज्ञों की तैनाती के लिए डिमांड मुख्यालय भेज चुके हैं। वॉक इन इंटरव्यू के जरिये भी हम बाल रोग विशेषज्ञ का पद भरने का प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही बाल शिशु नर्सरी शुरू करने की योजना है और इसके मद्देनजर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती जरूरी है।
-डॉ. कृष्ण कुमार, सीएमओ

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