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Charkhi Dadri News: विज्ञान शिक्षकों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी व गैर-संचारी रोगों पर प्रस्तुत किए विचार
Wed, 09 Sep 2026 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 09 Sep 2026 11:34 PM IST
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शहीद दलबीर मॉडल संस्कृति स्कूल में जिला स्तरीय विज्ञान सेमिनार में शामिल शिक्षक।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। शहीद दलबीर मॉडल संस्कृति स्कूल में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, बिरही कलां की ओर से जिलास्तरीय विज्ञान सेमिनार आयोजित किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी एवं संस्थान के प्राचार्य धर्मेंद्र चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित सेमिनार में विज्ञान के शिक्षकों ने भाग लिया। इसमें शिक्षकों ने विज्ञान शिक्षण के नए तरीके सांझा किए।
प्रतिभागियों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित आधारित शिक्षा व समसामयिक विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। प्रत्येक शिक्षक को प्रस्तुति के लिए पांच से छह मिनट का समय दिया गया। शिक्षकों ने विज्ञान शिक्षण में नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रयोग और अपने व्यावहारिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से साझा किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रवक्ता राकेश गोदारा, प्रवक्ता नरेश कुमार व मिनाक्षी शामिल रहे।
निर्णायकों ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, प्रस्तुतीकरण शैली, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवीनता व तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग के आधार पर किया। जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की जरूरत है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन अधिगम का प्रभावी उपयोग शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बना सकता है। उन्होंने शिक्षकों को अपनी प्रस्तुतियों और शिक्षण सामग्री में नई तकनीकों का रचनात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तर्कशीलता व समस्या-समाधान की क्षमता विकसित की जा सकती है। आधुनिक तकनीक को सीखने की प्रक्रिया का प्रभावी माध्यम बनाकर विद्यार्थी विज्ञान को केवल पढ़ें नहीं बल्कि उसे समझें और व्यवहार में भी उतारें।
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प्रतिभागियों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित आधारित शिक्षा व समसामयिक विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। प्रत्येक शिक्षक को प्रस्तुति के लिए पांच से छह मिनट का समय दिया गया। शिक्षकों ने विज्ञान शिक्षण में नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रयोग और अपने व्यावहारिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से साझा किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रवक्ता राकेश गोदारा, प्रवक्ता नरेश कुमार व मिनाक्षी शामिल रहे।
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निर्णायकों ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, प्रस्तुतीकरण शैली, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवीनता व तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग के आधार पर किया। जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की जरूरत है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन अधिगम का प्रभावी उपयोग शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बना सकता है। उन्होंने शिक्षकों को अपनी प्रस्तुतियों और शिक्षण सामग्री में नई तकनीकों का रचनात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तर्कशीलता व समस्या-समाधान की क्षमता विकसित की जा सकती है। आधुनिक तकनीक को सीखने की प्रक्रिया का प्रभावी माध्यम बनाकर विद्यार्थी विज्ञान को केवल पढ़ें नहीं बल्कि उसे समझें और व्यवहार में भी उतारें।