फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Sanipad machines became show-piece: at some places they were broken and at some places there was electricity problem

शो-पीस बनी सैनिपेड मशीनें : कहीं पड़ी खराब तो कहीं बिजली की समस्या

Wed, 11 Oct 2023 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 11 Oct 2023 10:44 PM IST
विज्ञापन
Sanipad machines became show-piece: at some places they were broken and at some places there was electricity problem
चरखी दादरी।
विज्ञापन

जिले के राजकीय स्कूलों में लगी एसपीवीआई सैनिटरी पैड मशीन शो-पीस बनकर रह गई हैं। काफी स्कूलों में ये मशीनें खराब पड़ी हैं। वहीं, जहां ठीक हालत में हैं वहां बिजली की समस्या के चलते इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर जिम्मेदार इन मशीनों के नियमित संचालन की तरफ ध्यान नहीं दे पा रहे हैं जिसके चलते छात्राएं इनके लाभ से वंचित हैं।
स्वच्छता को देखते हुए सरकार व विभाग की ओर से राजकीय स्कूलों में एसपीवीआई मशीन लगा रखी हैं ताकि सैनिटरी पैड को डिस्पोज किया जा सके। दूसरी ओर विभाग स्वच्छता को लेकर नियमित अंतराल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है जबकि सैनिटरी पैड मशीन की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। संवाददाता ने जब अपने स्तर पर पड़ताल की तो सामने आया कि लंबे समय से सैनिटरी पैड मशीन प्रयोग में नहीं ला जा रही हैं।
विज्ञापन

जिला में करीब 74 राजकीय हाई व 64 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इन सभी में विभाग ने ये मशीन लगा रखी हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ प्राचार्य ने बताया कि काफी संख्या में मशीनें खराब पड़ी हैं। जहां मशीन ठीक है वहां बिजली की किल्लत के चलते इनका स्कूल समय में इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इन प्राचार्य का कहना है बिजली सप्लाई कई बार दोपहर दो बजे बाद आती है और तब तक स्कूल की छुट्टी का समय हो जाता है। विभाग ने इन मशीनों की देखरेख का जिम्मा महिला शिक्षकों को सौंप रखा है। कई स्कूल मुखिया को यह भी पता नहीं है कि मशीन ठीक करवाने के लिए किस वेंडर से संपर्क करना है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर इस बारे में स्कूल मुखिया को मशीन अपडेट रखने संबंधी पत्र भी लिखा जा रहा है। इस संबंध में कुछ प्राचार्य को मशीन की वर्तमान स्थिति के बारे में पता ही नहीं है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन



दसवीं से बारहवीं कक्षा तक हैं 13700 छात्राएं
जिला में हाई स्कूलों में करीब 11 हजार छात्राएं हैं। इसके अलावा सीनियर सेकंडरी स्कूलों में छह हजार विद्यार्थी हैं जिनमें से 45 प्रतिशत यानि करीब 2700 हजार छात्राएं हैं। इन मशीनों का इस्तेमाल नहीं होने से स्वच्छता पर सवालिया निशान लग रहा है। इस संवेदनशील विषय पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। संवाद



एक्सपर्ट व्यू: सैनिटरी पैड खुले में फेंकना वातावरण के लिए घातक

सैनिटरी पैड को मशीन में डिस्पोज के बजाय इसे खुले में डाला जाता है तो इससे वायुमंडल में कई प्रकार के घातक जीवाणु एवं विषाणु सक्रिय हो जाते हैं। इनमें सालमोलेना, ई-कोलाई, इकोलाईइ व स्टफाइलो विषाणु शामिल हैं। इन विषाणुओं से संसर्ग रोग बढ़ते हैं। संक्रमण जनित रोग भी जल्दी फैलते हैं। सैनिटरी पैड का सही तरीके से उपयोग न होने पर जननांगों में भी जानलेवा रोग हो जाते हैं। सैनिटरी पैड का सावधानीपूर्वक मशीन में डिस्पोज करना चाहिए। मशीन की भी समय-समय पर सफाई व मरम्मत होनी चाहिए।


डॉ. कर्णवीर सिंह, प्रधान, एनआईएमए

इस बारे में समय-समय पर मीटिंग लेकर भी प्राचार्य व हेडमास्टर को अवगत कराया जाता है। स्कूलों में पत्र भी लिखे जाते हैं। सभी स्कूल मुखिया इन मशीन को अपडेट रखें ताकि सैनिटरी पैड का सही तरीके से डिस्पोज हो सके। मशीन खराब हो जाती है तो अधिकारियों को लिखित में अवगत कराएं।


जलधीर सिह, डीपीसी, शिक्षा विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article