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Charkhi Dadri News: इस मौसम में किसान कृषि यंत्रों को शेड, बड़ा बरामदा आदि में ढककर रखें
Sun, 29 Dec 2024 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 29 Dec 2024 11:16 PM IST
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खुले में रखे कृषि यंत्र। संवाद
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जंग लगने से बीयरिंग व चेनयुक्त कृषि यंत्रों में आती है ज्यादा खराबी
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। इस मौसम में किसान अपने कृषि यंत्रों को शेड, बड़ा बरामदा आदि में ढककर रखें। चेनयुक्त कृषि यंत्र की तो विशेष सावधानी रखने की जरूरत है। ओस की बूंदों से लोहे के उपकरण खराब होने का ज्यादा अंदेशा बना रहता है। जंग आदि की शिकायत से उपकरण चालू करने के समय बाधा आएगी। कृषि यंत्रों का रख-रखाव बेहद जरूरी है। कृषि उपकरण काफी महंगे होते हैं।
आजकल कृषि यंत्रों से किसान खेती के सभी प्रकार के कार्य निपटाता है। मशीनी युग में इस समय बाजार में हर कृ़षि कार्य से जुड़ी मशीनें उपलब्ध हैं। मशीन का रख-रखाव अगर नियमित रूप से होता है तो उपकरण की उम्र बढ़ जाती है। समय पर मेंटेनेंस करना भी जरूरी है। ताकि, लंबे तक इनका प्रयोग किया जा सके। सरकार कृषि उपकरणों के लिए किसानों को समय-समय पर सब्सिडी भी देती है। किराये पर भी उपकरण उपलब्ध करवाने की व्यवस्था है।
ज्यादा प्रयोग में आने वाले कृषि उपकरणों में हैरो, कल्टीवेटर, ट्रॉली, ट्रैक्टर, सी-ड्रिल, रोटावेटर, ड्रिल मशीन, पानी इंजन, मोटर व सब्जी आदि की बिजाई में प्रयोग होने वाले छोटे कृषि उपकरण शामिल हैं। ये सभी लोहे के बने होते हैं। इस मौसम में उपकरण अगर लंबे समय तक बाहर रखे गए तो खराब होने का अंदेशा बना रहता है। खासकर बीयरिंग व चेनयुक्त यंत्रों में ज्यादा खराबी आती है। जंग आदि की वजह से चेन आदि खराब हो जाती है। चिकनाई खत्म होने पर उपकरण ठीक प्रकार से काम नहीं कर पाएगा। किसी पुर्जे के टूटने के चांस ज्यादा बन जाते हैं। इससे किसान को नुकसान हो जाता है। ट्रॉली आदि के टायर भी खराब हो जाते हैं।
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कृषि मैकेनिकल विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि यंत्रों का काम होने के बाद इनकी ग्रीसिंग या पेंट आदि कर किसान अंदर रखें। ताकि, अगली फसल की बिजाई शुरू होने पर किसान बिना किसी बाधा के इनका आसानी से प्रयोग कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी यंत्र की चिकनाई खत्म नहीं होने दें। ओस की बूंदों से जंग आदि लगने की ज्यादा शिकायत रहती है। रबर युक्त कृषि यंत्रों को तो बाहर रखने से उनकी चिकनाई खत्म हो जाती है।
रबर कमजोर हो जाता है, जिससे उसकी उम्र घटती है। किसानों ने गत अक्तूबर-नवंबर माह में रबी की फसल की बिजाई कर दी थी। ऐसे में अब इन कृषि उपकरणों का इस्तेमाल मई-जून माह में ही हो पाएगा। उस समय खरीफ सीजन की फसल की बिजाई शुरू होगी। ऐसे छह से सात माह उपकरण बाहर रखने से खराब होने के ज्यादा आसार बने रहते हैं।
== वर्सन-
कृषि यंत्रों में ग्रीस आदि करके रखना चाहिए। पेंट की जरूरत हो तो करें। सभी उपकरण शेड व बरामदे में रखें। कृषि यंत्र किसान का औजार है। आजकल कृषि उपकरण काफी महंगे हैं। इस मौसम में यंत्र खराब हो जाते हैं।
-एसडीओ कृष्ण कुमार, कृषि विभाग
चरखी दादरी
फोटो-06
खुले में रखे कृषि यंत्र। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। इस मौसम में किसान अपने कृषि यंत्रों को शेड, बड़ा बरामदा आदि में ढककर रखें। चेनयुक्त कृषि यंत्र की तो विशेष सावधानी रखने की जरूरत है। ओस की बूंदों से लोहे के उपकरण खराब होने का ज्यादा अंदेशा बना रहता है। जंग आदि की शिकायत से उपकरण चालू करने के समय बाधा आएगी। कृषि यंत्रों का रख-रखाव बेहद जरूरी है। कृषि उपकरण काफी महंगे होते हैं।
आजकल कृषि यंत्रों से किसान खेती के सभी प्रकार के कार्य निपटाता है। मशीनी युग में इस समय बाजार में हर कृ़षि कार्य से जुड़ी मशीनें उपलब्ध हैं। मशीन का रख-रखाव अगर नियमित रूप से होता है तो उपकरण की उम्र बढ़ जाती है। समय पर मेंटेनेंस करना भी जरूरी है। ताकि, लंबे तक इनका प्रयोग किया जा सके। सरकार कृषि उपकरणों के लिए किसानों को समय-समय पर सब्सिडी भी देती है। किराये पर भी उपकरण उपलब्ध करवाने की व्यवस्था है।
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ज्यादा प्रयोग में आने वाले कृषि उपकरणों में हैरो, कल्टीवेटर, ट्रॉली, ट्रैक्टर, सी-ड्रिल, रोटावेटर, ड्रिल मशीन, पानी इंजन, मोटर व सब्जी आदि की बिजाई में प्रयोग होने वाले छोटे कृषि उपकरण शामिल हैं। ये सभी लोहे के बने होते हैं। इस मौसम में उपकरण अगर लंबे समय तक बाहर रखे गए तो खराब होने का अंदेशा बना रहता है। खासकर बीयरिंग व चेनयुक्त यंत्रों में ज्यादा खराबी आती है। जंग आदि की वजह से चेन आदि खराब हो जाती है। चिकनाई खत्म होने पर उपकरण ठीक प्रकार से काम नहीं कर पाएगा। किसी पुर्जे के टूटने के चांस ज्यादा बन जाते हैं। इससे किसान को नुकसान हो जाता है। ट्रॉली आदि के टायर भी खराब हो जाते हैं।
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कृषि मैकेनिकल विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि यंत्रों का काम होने के बाद इनकी ग्रीसिंग या पेंट आदि कर किसान अंदर रखें। ताकि, अगली फसल की बिजाई शुरू होने पर किसान बिना किसी बाधा के इनका आसानी से प्रयोग कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी यंत्र की चिकनाई खत्म नहीं होने दें। ओस की बूंदों से जंग आदि लगने की ज्यादा शिकायत रहती है। रबर युक्त कृषि यंत्रों को तो बाहर रखने से उनकी चिकनाई खत्म हो जाती है।
रबर कमजोर हो जाता है, जिससे उसकी उम्र घटती है। किसानों ने गत अक्तूबर-नवंबर माह में रबी की फसल की बिजाई कर दी थी। ऐसे में अब इन कृषि उपकरणों का इस्तेमाल मई-जून माह में ही हो पाएगा। उस समय खरीफ सीजन की फसल की बिजाई शुरू होगी। ऐसे छह से सात माह उपकरण बाहर रखने से खराब होने के ज्यादा आसार बने रहते हैं।
== वर्सन-
कृषि यंत्रों में ग्रीस आदि करके रखना चाहिए। पेंट की जरूरत हो तो करें। सभी उपकरण शेड व बरामदे में रखें। कृषि यंत्र किसान का औजार है। आजकल कृषि उपकरण काफी महंगे हैं। इस मौसम में यंत्र खराब हो जाते हैं।
-एसडीओ कृष्ण कुमार, कृषि विभाग
चरखी दादरी
फोटो-06
खुले में रखे कृषि यंत्र। संवाद