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Charkhi Dadri News: बायोगैस प्लांट में तैयार हुई कुकिंग गैस से अचीना के घरों में बनने लगीं रोटियां

Sat, 25 Nov 2023 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 25 Nov 2023 11:22 PM IST
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Rotis started being made in Achina's homes with the cooking gas produced in the biogas plant
अचीना गांव में स्थित बायोगैस प्लांट। संवाद 
चरखी दादरी।
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जिले के गांव अचीना में बायोगैस प्लांट से तैयार कुकिंग गैस से रसाेईघर में खाना बनने लगा है। फिलहाल ट्रायल के तौर पर प्लांट के साथ लगते घरों में ही कनेक्शन जारी किए गए हैं। अब जल्द ही करीब 30 और घरों में कनेक्शन दिए जाएंगे। इस गैस के एवज में ग्रामीणों से कुछ चार्ज वसूला जाएगा।
गांव में स्थित गोशाला में भी इस गैस की आपूर्ति की जाएगी। प्लांट में गैस तैयार होने के बाद अवशेष के रूप में गोबर को खेतों में खाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट पर 50 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया है। इस प्लांट की क्षमता 48 क्यूम है। पशुओं के गोबर का इस समय जलाने के रूप में ही ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर गोशालाओं में गोबर के इस्तेमाल को लेकर दिक्कत बनी रही है।
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कुछ किसान गोशालाओं से गोबर को खेतों डालने के लिए खरीद लेते हैं लेकिन फिर भी इसका समायोजन नहीं हो पाता है। इसका ररख-रखाव व प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए जगह का भी अभाव बना रहता है। जिले में 10 से ज्यादा गोशालाएं हैं जिनमें हजारों की संख्या में गोवंश की सेवा की जा रही है। गायों के लिए चारे का प्रबंध ग्रामीणों की ओर से किया जाता है। समय समय पर गोशाला समितियां चंदा भी एकत्र करती है। किसी मंत्री या विधायक के कोटे से भी कुछ सहायता राशि मिल जाती है।
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अब सरकार ने गोशालाओं में गोबर के प्रबंधन के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया है। जिले में एकमात्र गांव अचीना में बायोगैस प्लांट बनाया गया है। इस प्लांट को गांव अचीना में ही स्थित गोशाला से लिंक किया जा रहा है ताकि गोबर पर्याप्त मात्रा में मिलती रहे और गैस का उत्पादन होता रहे। तैयार गैस को गोशाला में ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा गांव में लोगों को कनेक्शन दिए जाने हैं। इसका इस्तेमाल कुकिंग गैस के रूप में घरों में किया जाना है। इससे पहले गोशाला की खपत की पूर्ति की जाएगी उसके बाद बची हुई गैस को घरों में दिया जा सकेगा। इसके तहत विभाग की प्लान है कि ग्रामीणों को गोबर के बदले गैस दी जाएगी। ग्रामीणों से गैस का कुछ चार्ज भी वसूला जाएगा।

फिलहाल जेनरेटर से चल रहा है प्लांट
गैस तैयार होने के बाद अवशेष के रूप में बचे हुए गोबर को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसका खेतों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। विभाग ने करीब सात लाख से ज्यादा कीमत की बायोगैस मशीन लगाई है। इस मशीन की क्षमता 400 क्यूम गोबर है। इस प्रोजेक्ट का 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। फिलहाल प्लांट को जेनरेटर से चालू किया हुआ है। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। इस समय प्लांट के आसपास घरों में गैस की आपूर्ति की जा रही है। जल्द ही अन्य घरों में भी यह सुविधा शुरू की जानी है




बायोगैस प्लांट का 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। इसमें गैस का उत्पादन शुरू हो गया है। जल्द ही गोशाला व गांव की गलियों में लाइन बिछाई जाएंगी। एक माह में यह काम पूरा हो जाएगा। लोगों को पाइप लाइन से गैस मिलनी शुरू हो जाएगी। गोशाला व ग्रामीणों के सहयोग से गोबर की व्यवस्था की जाएगी।
-सुनील कुमार, कनिष्ठ अभियंता, पंचायत विभाग
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