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Charkhi Dadri News: स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज करना कंपनी को पड़ा महंगा, खर्च व हर्जाना देने के दिए आदेश
Mon, 27 Jul 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 27 Jul 2026 01:28 AM IST
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चरखी दादरी। दादरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। यह फैसला स्वास्थ्य बीमा दावा को गलत तरीके से खारिज करने के मामले में आया है। आयोग के अध्यक्ष मनजीत सिंह नरयाल की पीठ ने कंपनी की कार्रवाई को सेवा में कमी बताया। इसे अनुचित व्यापार व्यवहार भी करार दिया गया।
आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया। कंपनी को इलाज पर हुए खर्च की राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया। मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च का भुगतान भी कहा गया।
दादरी निवासी रिंकू कुमार ने वर्ष 2019-20 में एक स्वास्थ्य बीमा नीति ली थी। इसका नियमित रूप से नवीनीकरण कराया जाता रहा। यह नीति 25 फरवरी 2025 से 24 फरवरी 2026 तक प्रभावी थी। उन्हें 10 लाख रुपये का बीमा राशि तथा 14.50 लाख रुपये तक की कवरेज के साथ कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त थी।
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कंपनी चिकित्सक का हलफनामा या अन्य विश्वसनीय चिकित्सा साक्ष्य भी पेश नहीं कर सकी। आयोग ने यह भी माना कि कंपनी लगातार नीति का नवीनीकरण करती रही। इस दौरान शिकायतकर्ता की चिकित्सा जांच नहीं कराई गई।
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को इलाज पर खर्च किए गए 73,787 रुपये लौटाए। यह राशि दावा खारिज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाई जाएगी। मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार और कानूनी खर्च के पांच हजार रुपये का भुगतान भी करे।
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आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया। कंपनी को इलाज पर हुए खर्च की राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया। मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च का भुगतान भी कहा गया।
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दादरी निवासी रिंकू कुमार ने वर्ष 2019-20 में एक स्वास्थ्य बीमा नीति ली थी। इसका नियमित रूप से नवीनीकरण कराया जाता रहा। यह नीति 25 फरवरी 2025 से 24 फरवरी 2026 तक प्रभावी थी। उन्हें 10 लाख रुपये का बीमा राशि तथा 14.50 लाख रुपये तक की कवरेज के साथ कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त थी।
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कंपनी चिकित्सक का हलफनामा या अन्य विश्वसनीय चिकित्सा साक्ष्य भी पेश नहीं कर सकी। आयोग ने यह भी माना कि कंपनी लगातार नीति का नवीनीकरण करती रही। इस दौरान शिकायतकर्ता की चिकित्सा जांच नहीं कराई गई।
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को इलाज पर खर्च किए गए 73,787 रुपये लौटाए। यह राशि दावा खारिज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाई जाएगी। मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार और कानूनी खर्च के पांच हजार रुपये का भुगतान भी करे।