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फर्जी दस्तावेजों पर किया दो गाड़ियों का दोबारा रजिस्ट्रेशन, तत्कालीन एसडीएम व लिपिक पर केस दर्ज
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एसडीएम कार्यालय में जांच करती मुख्यमंत्री उडनदस्ता ।
- फोटो : CharkhiDadri
दादरी एसडीएम ऑफिस में तैनात कर्मचारी की मिलीभगत से एक गिरोह ने चोरी की दो गाड़ियों का फर्जी दस्तावेजों के सहारे रजिस्ट्रेशन करवाया है। दोनों वाहनों की रजिस्ट्रेशन फाइल की जांच करने के बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने दादरी सिटी थाने में शिकायत दी है। इसके आधार पर पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम सतबीर कुंडू समेत मोटर रजिस्ट्रेशन लिपिक राजकुमारी के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस को दी शिकायत में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के एसआई अनूप सिंह ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि दूसरे राज्यों से चोरी की गई गाड़ियों का दादरी एसडीएम कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के सहारे और कम मोटर व्हीकल टैक्स वसूल करके रजिस्ट्रेशन किया गया है। गिरोह ने कर्मचारी और अधिकारी की मिलीभगत से इन वाहनों का दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाकर आगे बेच दिया। एक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर एचआर-19 एन-7957 और दूसरी का एचआर-19 एन-1249 है। ये दोनों गाड़ियां रोहतक के सुभाष नगर निवासी सुनील के नाम से अथॉरिटी में रजिस्टर्ड हैं।
इस सूचना के आधार पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ता शुक्रवार को जांच के लिए दादरी एसडीएम ऑफिस पहुंचा। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने दादरी एसडीएम विरेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें मामले की जानकारी दी। इसके बाद एसडीएम ने लिपिक अजीत को रिकॉर्ड जांचने के लिए मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के साथ रिकॉर्ड रूम में भेज दिया। यहां काफी समय तक जांच करने के बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने फाइलों को कब्जे में ले लिया और इसके बाद सिटी थाने में इस संबंध में मामला दर्ज करने के लिए शिकायत सौंप दी। शिकायत के आधार पर सिटी थाना पुलिस ने शुक्रवार देर शाम ही तत्कालीन एसडीएम और मोटर रजिस्ट्रेशन क्लर्क के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
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एक गाड़ी पहले राजस्थान से तो दूसरी महाराष्ट्र से है रजिस्टर्ड
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने शिकायत में बताया कि रजिस्ट्रेशन नंबर एचआर-19 एन- 7957 पहले राजस्थान में रजिस्टर्ड है। राजस्थान अथॉरिटी की तरफ से इस गाड़ी को आरजे-14 टीडी- 8047 नंबर मिला था। दादरी अथॉरिटी के कर्मचारियों ने रजिस्ट्रेशन के वक्त इस गाड़ी की कीमत एक्स शोरूम न दिखाकर केवल एक लाख 92 हजार दिखाई है। ऐसा कम मोटर व्हीकल टैक्स वसूलने के लिए किया गया है। इस गाड़ी की असली रजिस्ट्रेशन तिथि 15 फरवरी 2017 है, जबकि दादरी अथॉरिटी की फाइल में इसे 14 दिसंबर 2016 दर्शाई गई है। वहीं, दूसरी गाड़ी एचआर-19 एन-1249 पहले महाराष्ट्र में रजिस्टर्ड है।
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फाइनेंसर के सेल लेटर और अथॉरिटी के साफ्टवेयर में चेसिस नंबर नही खा रहा मेल
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की जांच में सामने आया कि इन गाड़ियों के चेसिस नंबर में भी गड़बड़ी की गई है। फाइनेंसर कंपनी के सेल लेटर और अथॉरिटी के सॉफ्टवेयर में जो चेसिस नंबर चढ़ाया गया है, वो एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहा। रजिस्ट्रेशन फाइल में एक गाड़ी की एनओसी बिहार के अररिया जिले से वर्ष 2019 में जारी होनी दिखाई गई है, जबकि दादरी अथॉरिटी के सॉफ्टवेयर में 14 दिसंबर 2016 दर्ज है।
जिनके नाम किया दोबारा रजिस्ट्रेशन, उनके स्थायी पते का नहीं प्रमाण
दादरी अथॉरिटी के कर्मचारियों ने जिन व्यक्तियों के नाम से दोबारा रजिस्ट्रेशन किया है, उनके स्थायी पते का कोई दस्तावेज फाइल में नहीं है। इसके अलावा फिटनेस सर्टिफिकेट, पुरानी आरसी की असली कॉपी और एनसीआरबी की रिपोर्ट भी लगाई गई है।
ये है रजिस्ट्रेशन का प्रावधान
जिले से बाहर स्थायी पते पर गाड़ी रजिस्ट्रेशन करने का अधिकार एसडीएम के पास ही होता है। गाड़ी के रजिस्ट्रेशन से संबंधित दस्तावेजों की जांच मोटर व्हीकल क्लर्क लिपिक करता है। रजिस्ट्रेशन की अंतिम अथॉरिटी एसडीएम होता है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने बताया कि एसडीएम की मिलीभगत के बिना ये काम संभव नहीं है। इसमें अन्य कर्मचारियों का हाथ होने की भी संभावना है।
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वर्जन::
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की शिकायत पर तत्कालीन एसडीएम सतबीर कुंडू और मोटर रजिस्ट्रेशन लिपिक राजकुमारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। दोनों वाहनों की रजिस्ट्रेशन फाइलें मुख्यमंत्री उड़नदस्ता ने हमें सौंप दी है।
- वीर सिंह, सिटी थाना प्रभारी
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फोटो 40
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता दादरी एसडीएम कार्यालय में रिकॉर्ड की जांच करते हुए।
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पुलिस को दी शिकायत में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के एसआई अनूप सिंह ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि दूसरे राज्यों से चोरी की गई गाड़ियों का दादरी एसडीएम कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के सहारे और कम मोटर व्हीकल टैक्स वसूल करके रजिस्ट्रेशन किया गया है। गिरोह ने कर्मचारी और अधिकारी की मिलीभगत से इन वाहनों का दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाकर आगे बेच दिया। एक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर एचआर-19 एन-7957 और दूसरी का एचआर-19 एन-1249 है। ये दोनों गाड़ियां रोहतक के सुभाष नगर निवासी सुनील के नाम से अथॉरिटी में रजिस्टर्ड हैं।
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इस सूचना के आधार पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ता शुक्रवार को जांच के लिए दादरी एसडीएम ऑफिस पहुंचा। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने दादरी एसडीएम विरेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें मामले की जानकारी दी। इसके बाद एसडीएम ने लिपिक अजीत को रिकॉर्ड जांचने के लिए मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के साथ रिकॉर्ड रूम में भेज दिया। यहां काफी समय तक जांच करने के बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने फाइलों को कब्जे में ले लिया और इसके बाद सिटी थाने में इस संबंध में मामला दर्ज करने के लिए शिकायत सौंप दी। शिकायत के आधार पर सिटी थाना पुलिस ने शुक्रवार देर शाम ही तत्कालीन एसडीएम और मोटर रजिस्ट्रेशन क्लर्क के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
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एक गाड़ी पहले राजस्थान से तो दूसरी महाराष्ट्र से है रजिस्टर्ड
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने शिकायत में बताया कि रजिस्ट्रेशन नंबर एचआर-19 एन- 7957 पहले राजस्थान में रजिस्टर्ड है। राजस्थान अथॉरिटी की तरफ से इस गाड़ी को आरजे-14 टीडी- 8047 नंबर मिला था। दादरी अथॉरिटी के कर्मचारियों ने रजिस्ट्रेशन के वक्त इस गाड़ी की कीमत एक्स शोरूम न दिखाकर केवल एक लाख 92 हजार दिखाई है। ऐसा कम मोटर व्हीकल टैक्स वसूलने के लिए किया गया है। इस गाड़ी की असली रजिस्ट्रेशन तिथि 15 फरवरी 2017 है, जबकि दादरी अथॉरिटी की फाइल में इसे 14 दिसंबर 2016 दर्शाई गई है। वहीं, दूसरी गाड़ी एचआर-19 एन-1249 पहले महाराष्ट्र में रजिस्टर्ड है।
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फाइनेंसर के सेल लेटर और अथॉरिटी के साफ्टवेयर में चेसिस नंबर नही खा रहा मेल
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की जांच में सामने आया कि इन गाड़ियों के चेसिस नंबर में भी गड़बड़ी की गई है। फाइनेंसर कंपनी के सेल लेटर और अथॉरिटी के सॉफ्टवेयर में जो चेसिस नंबर चढ़ाया गया है, वो एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहा। रजिस्ट्रेशन फाइल में एक गाड़ी की एनओसी बिहार के अररिया जिले से वर्ष 2019 में जारी होनी दिखाई गई है, जबकि दादरी अथॉरिटी के सॉफ्टवेयर में 14 दिसंबर 2016 दर्ज है।
जिनके नाम किया दोबारा रजिस्ट्रेशन, उनके स्थायी पते का नहीं प्रमाण
दादरी अथॉरिटी के कर्मचारियों ने जिन व्यक्तियों के नाम से दोबारा रजिस्ट्रेशन किया है, उनके स्थायी पते का कोई दस्तावेज फाइल में नहीं है। इसके अलावा फिटनेस सर्टिफिकेट, पुरानी आरसी की असली कॉपी और एनसीआरबी की रिपोर्ट भी लगाई गई है।
ये है रजिस्ट्रेशन का प्रावधान
जिले से बाहर स्थायी पते पर गाड़ी रजिस्ट्रेशन करने का अधिकार एसडीएम के पास ही होता है। गाड़ी के रजिस्ट्रेशन से संबंधित दस्तावेजों की जांच मोटर व्हीकल क्लर्क लिपिक करता है। रजिस्ट्रेशन की अंतिम अथॉरिटी एसडीएम होता है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने बताया कि एसडीएम की मिलीभगत के बिना ये काम संभव नहीं है। इसमें अन्य कर्मचारियों का हाथ होने की भी संभावना है।
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वर्जन::
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की शिकायत पर तत्कालीन एसडीएम सतबीर कुंडू और मोटर रजिस्ट्रेशन लिपिक राजकुमारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। दोनों वाहनों की रजिस्ट्रेशन फाइलें मुख्यमंत्री उड़नदस्ता ने हमें सौंप दी है।
- वीर सिंह, सिटी थाना प्रभारी
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फोटो 40
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता दादरी एसडीएम कार्यालय में रिकॉर्ड की जांच करते हुए।