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रानीला पीएचसी को मिला एनक्वास सर्टिफिकेट, तीन साल में मिलेगी 9 लाख की प्राइज मनी
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चरखी दादरी। जिले की रानीला पीएचसी को एनक्वास सर्टिफिकेट (नेशनल क्वालिटी एस्योरेंस स्कीम पात्रता प्रमाण पत्र) मिला है। यह सर्टिफिकेट दिल्ली से आई टीम के यहां की व्यवस्थाओं और नेशनल स्कीम प्रदर्शन के रिकॉर्ड को देखते हुए दिया है। इसके तहत अब अगले तीन साल में इस पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) को मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने के लिए 9 लाख का बजट मिलेगा। फिलहाल यह जिले का इकलौता ऐसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जिसे एनक्वास सर्टिफिकेट मिला है।
बता दें कि रानीला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन तीन उप स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। पीएचसी और तीनों उप स्वाथ्य केंद्रों में एक एएनएम के पद को छोड़कर बाकी सभी पर स्टाफ तैनात है। रानीला पीएचसी पर करीब दो सप्ताह पहले टीम आई थी। टीम ने यहां व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ सुविधाओं और राष्ट्रीय योजनाओं से जुड़ा रिकॉर्ड जांचा था। टीम के निरीक्षण में यहां तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गईं और इस प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र को एनक्वास सर्टिफिकेट मिला है। हालांकि इससे तीन साल पहले बाढड़ा पीएचसी को भी यह सर्टिफिकेट मिला था, लेकिन उसकी समय अवधि पूरी हो चुकी है और अब एनक्वास सर्टिफिकेट पाने वाला रानीला एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है।
भागेश्वरी, सांजरवास और फौगाट गांव स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र भी रानीला पीएचसी के अधीन हैं और इनका रिकॉर्ड भी दुरुस्त पाया गया है। रानीला पीएचसी को एनक्वास सर्टिफिकेट मिलने का फायदा इन गांवों को भी मिलेगा। इन चारों गांवों की जनसंख्या 22945 है। हर साल मरीजों की सुविधाओं के लिए यहां तीन लाख खर्च होंगे। ये बजट शौचालय की सुविधाएं बढ़ाने, मरीजों के बैठने के प्रबंध करने समेत अन्य कार्यों के लिए मिलेगा। तीन साल तक सर्टिफिकेट मान्य रहेगा और इसके बाद दोबारा से निरीक्षण करने टीम पहुंचेगी। उस दौरान पाई गई व्यवस्थाओं के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।
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ये स्टाफ है तैनात
रानीला पीएचसी और इसके अधीन आने वाले तीनों उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए यहां एमओ के तौर पर डॉ. अन्नू, डेंटल सर्जन डॉ. चंचल के अलावा पांच स्टाफ नर्स, सात एएनएम, तीन एमपीएचडब्ल्यू वर्कर्स, एक एचआई और एक एलएचवी तैनात है। यहां एक एएनएम की ही कमी है।
चार और पीएचसी का भी निरीक्षण कराने की तैयारी
जिला स्वास्थ्य विभाग ने रानीला के बाद अब चार और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का एनक्वास सर्टिफिकेट के लिए निरीक्षण कराने की तैयारी कर ली है। इनमें हड़ौदी, छपार, सांवड़ और बाढड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल है। यहां भी नेशनल टीम जल्द ही व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंच सकती है।
ये होंगे एक्वास सर्टिफिकेट के फायदें
डेंटल सर्जन डॉ. चंचल तोमर ने बताया कि एनक्वास सर्टिफिकेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि तीन साल के अंदर 9 लाख की प्राइज मनी मिलेगी। हर साल सुविधाओं के लिए हम तीन लाख का बजट खर्च कर सकेंगे। इससे यहां व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी, जिनका सीधे तौर पर मरीजों को फायदा मिलेगा। इसके अलावा नेशनल टीम के निरीक्षण के बाद स्टाफ का मनोबल बढ़ा है, अब वो कार्य और बेहतर करेंगे।
रानीला पीएचसी को एनक्वास सर्टिफिकेट मिल गया है। जल्द ही जिले के चार और प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्रों का नेशनल टीम से निरीक्षण कराया जाएगा।
डॉ. कृष्ण, सीएमओ, चरखी दादरी
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बता दें कि रानीला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन तीन उप स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। पीएचसी और तीनों उप स्वाथ्य केंद्रों में एक एएनएम के पद को छोड़कर बाकी सभी पर स्टाफ तैनात है। रानीला पीएचसी पर करीब दो सप्ताह पहले टीम आई थी। टीम ने यहां व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ सुविधाओं और राष्ट्रीय योजनाओं से जुड़ा रिकॉर्ड जांचा था। टीम के निरीक्षण में यहां तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गईं और इस प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र को एनक्वास सर्टिफिकेट मिला है। हालांकि इससे तीन साल पहले बाढड़ा पीएचसी को भी यह सर्टिफिकेट मिला था, लेकिन उसकी समय अवधि पूरी हो चुकी है और अब एनक्वास सर्टिफिकेट पाने वाला रानीला एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है।
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भागेश्वरी, सांजरवास और फौगाट गांव स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र भी रानीला पीएचसी के अधीन हैं और इनका रिकॉर्ड भी दुरुस्त पाया गया है। रानीला पीएचसी को एनक्वास सर्टिफिकेट मिलने का फायदा इन गांवों को भी मिलेगा। इन चारों गांवों की जनसंख्या 22945 है। हर साल मरीजों की सुविधाओं के लिए यहां तीन लाख खर्च होंगे। ये बजट शौचालय की सुविधाएं बढ़ाने, मरीजों के बैठने के प्रबंध करने समेत अन्य कार्यों के लिए मिलेगा। तीन साल तक सर्टिफिकेट मान्य रहेगा और इसके बाद दोबारा से निरीक्षण करने टीम पहुंचेगी। उस दौरान पाई गई व्यवस्थाओं के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।
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ये स्टाफ है तैनात
रानीला पीएचसी और इसके अधीन आने वाले तीनों उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए यहां एमओ के तौर पर डॉ. अन्नू, डेंटल सर्जन डॉ. चंचल के अलावा पांच स्टाफ नर्स, सात एएनएम, तीन एमपीएचडब्ल्यू वर्कर्स, एक एचआई और एक एलएचवी तैनात है। यहां एक एएनएम की ही कमी है।
चार और पीएचसी का भी निरीक्षण कराने की तैयारी
जिला स्वास्थ्य विभाग ने रानीला के बाद अब चार और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का एनक्वास सर्टिफिकेट के लिए निरीक्षण कराने की तैयारी कर ली है। इनमें हड़ौदी, छपार, सांवड़ और बाढड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल है। यहां भी नेशनल टीम जल्द ही व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंच सकती है।
ये होंगे एक्वास सर्टिफिकेट के फायदें
डेंटल सर्जन डॉ. चंचल तोमर ने बताया कि एनक्वास सर्टिफिकेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि तीन साल के अंदर 9 लाख की प्राइज मनी मिलेगी। हर साल सुविधाओं के लिए हम तीन लाख का बजट खर्च कर सकेंगे। इससे यहां व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी, जिनका सीधे तौर पर मरीजों को फायदा मिलेगा। इसके अलावा नेशनल टीम के निरीक्षण के बाद स्टाफ का मनोबल बढ़ा है, अब वो कार्य और बेहतर करेंगे।
रानीला पीएचसी को एनक्वास सर्टिफिकेट मिल गया है। जल्द ही जिले के चार और प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्रों का नेशनल टीम से निरीक्षण कराया जाएगा।
डॉ. कृष्ण, सीएमओ, चरखी दादरी