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Charkhi Dadri News: ...दस पौधों से की शुरुआत, अब महक रही पूरी बगिया
Sun, 09 Feb 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 09 Feb 2025 01:11 AM IST
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बगीचे में पत्नी संतोष रानी के साथ रमेशचंद्र सैनी। संवाद
मेरी बगिया
मुख्य अध्यापक पद से सेवानिवृत्त हैं शहर निवासी रमेशचंद्र, खाली समय का सदुपयोग के लिए की बागवानी
चरखी दादरी। विद्यार्थियों को प्रकृति को संवारने की सीख देने वाले शिक्षक रमेशचंद्र सैनी सेवानिवृत्ति के बाद अब घर पर पौधे उगाकर सेहत संवार रहे हैं। 10 साल पहले 10 पौधों से की गई शुरुआत अब बागवानी का रूप ले चुकी है। फिलहाल, उन्होंने 250 गज जमीन पर करीब 150 सजावटी व फलदार पौधे लगाए हैं।
रमेशचंद्र सैनी को बागवानी का शौक है। उनके पास 10 फलदार व 60 वेरायटी के सजावटी पौधे हैं। वह स्कूल में विद्यार्थियों को विज्ञान पढ़ाते थे। उनको पर्यावरण व सेहत के बारे में बताते थे। यह भी बताते थे कि रसाेईघर से निकले फल-सब्जियाें के वेस्ट को खाद में परिवर्तित कैसे करना है।
सैनी बताते हैं कि बगिया लगाने में उनकी पत्नी संतोष रानी का भी पूरा सहयोग रहा। दोनों मिलकर पौधों की देखभाल करते करते हैं। घर पर सजावटी पौधे लगाए हुए हैं। उनकी बेटी प्रतिभा पंचकूला में रहती है। आठ माह पहले सजावट के लिए नगर निगम की ओर से उन्हें बीस हजार का इनाम दिया गया था। संवाद
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- इस तरह तैयार करते हैं किचन वेस्ट से खाद
उनके पास पांच मटके हैं। रसोई से निकलने वाले फल-सब्जियों के छिलके, चायपत्ती, पौधों के पत्ते आदि मटके में भर देते हैं। जल्दी खाद बनाने के लिए इनमें पुरानी खाद, मट्ठा व गुड़ भी डालते हैं। इससे किसी प्रकार की बदबू भी नहीं आती। एक मटके में खाद बनने में 3 से 4 महीने लग जाते हैं। बाद में हर पौधे में आकार के अनुसार तीन माह में एक बार खाद डालते हैं।
- पेस्टीसाइड भी करते हैं तैयार
खाद के अलावा नींबू, मौसमी, प्याज, लहसुन व नीम से पेस्टीसाइड यानी जैविक कीटनाशक भी तैयार करते हैं। साथ ही केला, एलोवेरा, संतरे से खाद तैयार कर पौधों में 15 दिन के अंतराल पर पानी में मिलाकर देते हैं। वहीं, फूल व फलों के पौधों पर इसी पेस्टीसाइड का स्प्रे करते हैं ताकि, इनमें कीट न लगें।
- ये पौधे बढ़ा रहे बगिया की शोभा
रमेशचंद्र ने घर पर सजावट के लिए गुलदाऊदी, गुलाब, गुड़हल, पोर्चुलका, गेंदा, ऐरिका पाम, यूफोर्बिया मिली, स्नेक प्लांट, एलोवेरा, क्रॉटोन, टर्टल वाइन व अन्य कई किस्म के पौधे लगा रखे हैं। उनकी बगिया में आम, अमरूद, जामुन, किन्नू, मौसमी, नींबू, सेब के पौधे हैं।
फोटो-07
बगीचे में पत्नी संतोष रानी के साथ रमेशचंद्र सैनी। संवाद
फोटो- 08
घर पर क्यारी बनाकर लगाई गईं सब्जियां। संवाद
फोटो-09
बगीचे में लगे सजावटी पौधे। संवाद
फोटो-10
खाद के लिए मटकों में भरे पौधों के पत्ते और सब्जियाें के छिलके। संवाद
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मुख्य अध्यापक पद से सेवानिवृत्त हैं शहर निवासी रमेशचंद्र, खाली समय का सदुपयोग के लिए की बागवानी
चरखी दादरी। विद्यार्थियों को प्रकृति को संवारने की सीख देने वाले शिक्षक रमेशचंद्र सैनी सेवानिवृत्ति के बाद अब घर पर पौधे उगाकर सेहत संवार रहे हैं। 10 साल पहले 10 पौधों से की गई शुरुआत अब बागवानी का रूप ले चुकी है। फिलहाल, उन्होंने 250 गज जमीन पर करीब 150 सजावटी व फलदार पौधे लगाए हैं।
रमेशचंद्र सैनी को बागवानी का शौक है। उनके पास 10 फलदार व 60 वेरायटी के सजावटी पौधे हैं। वह स्कूल में विद्यार्थियों को विज्ञान पढ़ाते थे। उनको पर्यावरण व सेहत के बारे में बताते थे। यह भी बताते थे कि रसाेईघर से निकले फल-सब्जियाें के वेस्ट को खाद में परिवर्तित कैसे करना है।
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सैनी बताते हैं कि बगिया लगाने में उनकी पत्नी संतोष रानी का भी पूरा सहयोग रहा। दोनों मिलकर पौधों की देखभाल करते करते हैं। घर पर सजावटी पौधे लगाए हुए हैं। उनकी बेटी प्रतिभा पंचकूला में रहती है। आठ माह पहले सजावट के लिए नगर निगम की ओर से उन्हें बीस हजार का इनाम दिया गया था। संवाद
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- इस तरह तैयार करते हैं किचन वेस्ट से खाद
उनके पास पांच मटके हैं। रसोई से निकलने वाले फल-सब्जियों के छिलके, चायपत्ती, पौधों के पत्ते आदि मटके में भर देते हैं। जल्दी खाद बनाने के लिए इनमें पुरानी खाद, मट्ठा व गुड़ भी डालते हैं। इससे किसी प्रकार की बदबू भी नहीं आती। एक मटके में खाद बनने में 3 से 4 महीने लग जाते हैं। बाद में हर पौधे में आकार के अनुसार तीन माह में एक बार खाद डालते हैं।
- पेस्टीसाइड भी करते हैं तैयार
खाद के अलावा नींबू, मौसमी, प्याज, लहसुन व नीम से पेस्टीसाइड यानी जैविक कीटनाशक भी तैयार करते हैं। साथ ही केला, एलोवेरा, संतरे से खाद तैयार कर पौधों में 15 दिन के अंतराल पर पानी में मिलाकर देते हैं। वहीं, फूल व फलों के पौधों पर इसी पेस्टीसाइड का स्प्रे करते हैं ताकि, इनमें कीट न लगें।
- ये पौधे बढ़ा रहे बगिया की शोभा
रमेशचंद्र ने घर पर सजावट के लिए गुलदाऊदी, गुलाब, गुड़हल, पोर्चुलका, गेंदा, ऐरिका पाम, यूफोर्बिया मिली, स्नेक प्लांट, एलोवेरा, क्रॉटोन, टर्टल वाइन व अन्य कई किस्म के पौधे लगा रखे हैं। उनकी बगिया में आम, अमरूद, जामुन, किन्नू, मौसमी, नींबू, सेब के पौधे हैं।
फोटो-07
बगीचे में पत्नी संतोष रानी के साथ रमेशचंद्र सैनी। संवाद
फोटो- 08
घर पर क्यारी बनाकर लगाई गईं सब्जियां। संवाद
फोटो-09
बगीचे में लगे सजावटी पौधे। संवाद
फोटो-10
खाद के लिए मटकों में भरे पौधों के पत्ते और सब्जियाें के छिलके। संवाद