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Charkhi Dadri News: सामान्य से 30 प्रतिशत कम हुई चरखी दादरी जिले में बारिश
Tue, 27 Aug 2024 02:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 27 Aug 2024 02:48 AM IST
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चरखी दादरी। क्षेत्र में अब तक मानसून की बारिश 30 प्रतिशत कम हुई है। बारिश कम होने की वजह से खरीफ सीजन में अनाज उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा भूमिगत जलस्तर में भी सुधार होने की उम्मीद धूमिल हुई है। वहीं, सोमवार को भी जिले में बारिश हुई।
बता दें कि दादरी जिले में पिछले कई सालों से मानसून की बारिश का आंकड़ा काफी कम बना हुआ है, जो चिंता का विषय है। अब तक जिला में करीब दो सौ एमएम बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से 30 प्रतिशत कम है। मानसून सीजन में कम से कम 550 मिमी बारिश होनी चाहिए। जुलाई में 47 मिमी बारिश हुई। शेष अगस्त माह में हुई है। बारिश नहीं होने से उमस भरी गर्मी भी लगातार बनी हुई है। जल संचयन का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। जमीनी बोरिंग पर सरकार ने मोटा बजट खर्च कर रखा है।
क्षेत्र में सोमवार को बूंदाबांदी हुई, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिली। अधिकतम तापमान 33 व न्यूनतम 28 डिग्री दर्ज किया गया। आठ किलोमीटर प्रति घंटा की गति से पूर्वी हवा चली। नमी की मात्रा 73 प्रतिशत बनी रही।
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किसान ढिल्लू फौगाट व सुरेंद्र ने बताया कि बारिश कम होने की वजह से अगली रबी की फसलों की बिजाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। रबी की फसलों की बिजाई तक जमीन में मानसून की बारिश की नमी नहीं बचेगी, जिससे सिंचाई करके ही सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ जाएगी।
10 साल में दो बार ही हुई 500 मिमी से अधिक बारिश
पिछले 10 वर्षों में जिले में मानसून फीका ही रहा है। एक दशक में सिर्फ दो बार ही जिले में 500 मिमी से अधिक बारिश हुई है। दूसरी ओर जिले का 80 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र मानसून पर ही निर्भर करता है। जिले का कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। करीब 68,000 किसान हैं। रबी व खरीफ सीजन की तकरीबन सभी प्रकार की फसलों की खेती होती है। करीब 30 प्रतिशत बरानी क्षेत्र तो पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करता है। ऐसे में जिले में मानसून सीजन में औसत 550 एमएम बारिश की जरूरत होती है।
- वर्ष 2014 से 2024 तक जिले में हुई बारिश के आंकड़े
वर्ष- बारिश मिमी में
2014- 207
2015- 309
2016- 576
2017 - 315
2018 - 311
2019- 183
2020- 289
2021- 512
2022- 347
2023- 352
2024- 175
जिले में बारिश सामान्य से कम हुई है। यह चिंता का विषय है। मानसून सीजन में कम से कम 550 एमएम बारिश तो होनी चाहिए तब जाकर पूर्ति हो सकेगी। कम बारिश का अगली रबी फसलों की बिजाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
-जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी
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बता दें कि दादरी जिले में पिछले कई सालों से मानसून की बारिश का आंकड़ा काफी कम बना हुआ है, जो चिंता का विषय है। अब तक जिला में करीब दो सौ एमएम बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से 30 प्रतिशत कम है। मानसून सीजन में कम से कम 550 मिमी बारिश होनी चाहिए। जुलाई में 47 मिमी बारिश हुई। शेष अगस्त माह में हुई है। बारिश नहीं होने से उमस भरी गर्मी भी लगातार बनी हुई है। जल संचयन का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। जमीनी बोरिंग पर सरकार ने मोटा बजट खर्च कर रखा है।
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क्षेत्र में सोमवार को बूंदाबांदी हुई, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिली। अधिकतम तापमान 33 व न्यूनतम 28 डिग्री दर्ज किया गया। आठ किलोमीटर प्रति घंटा की गति से पूर्वी हवा चली। नमी की मात्रा 73 प्रतिशत बनी रही।
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किसान ढिल्लू फौगाट व सुरेंद्र ने बताया कि बारिश कम होने की वजह से अगली रबी की फसलों की बिजाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। रबी की फसलों की बिजाई तक जमीन में मानसून की बारिश की नमी नहीं बचेगी, जिससे सिंचाई करके ही सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ जाएगी।
10 साल में दो बार ही हुई 500 मिमी से अधिक बारिश
पिछले 10 वर्षों में जिले में मानसून फीका ही रहा है। एक दशक में सिर्फ दो बार ही जिले में 500 मिमी से अधिक बारिश हुई है। दूसरी ओर जिले का 80 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र मानसून पर ही निर्भर करता है। जिले का कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। करीब 68,000 किसान हैं। रबी व खरीफ सीजन की तकरीबन सभी प्रकार की फसलों की खेती होती है। करीब 30 प्रतिशत बरानी क्षेत्र तो पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करता है। ऐसे में जिले में मानसून सीजन में औसत 550 एमएम बारिश की जरूरत होती है।
- वर्ष 2014 से 2024 तक जिले में हुई बारिश के आंकड़े
वर्ष- बारिश मिमी में
2014- 207
2015- 309
2016- 576
2017 - 315
2018 - 311
2019- 183
2020- 289
2021- 512
2022- 347
2023- 352
2024- 175
जिले में बारिश सामान्य से कम हुई है। यह चिंता का विषय है। मानसून सीजन में कम से कम 550 एमएम बारिश तो होनी चाहिए तब जाकर पूर्ति हो सकेगी। कम बारिश का अगली रबी फसलों की बिजाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
-जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी