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पंचायतों का कार्यकाल खत्म पर विकास की नहीं थमेगी रफ्तार
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पंचायत विभाग कार्यालय।
- फोटो : CharkhiDadri
पंचायतों का कार्यकाल भले ही पूरा हो गया है लेकिन गांवों में अति जरूरी विकास कार्य बाधित नहीं होंगे। यदि किसी गांव में किसी प्रोजेक्ट की आवश्यकता है तो पंचायत विभाग को लिखित में अवगत कराया जा सकता है। विभाग उस गांव में पांच लाख रुपये तक के विकास कार्य ई-टेंडरिंग के माध्यम से करवाए जा सकेंगे। इस संबंध में पंचायत विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।
बता दें कि पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल फरवरी अंतिम सप्ताह में पूरा हो चुका है। पंचायतों का रिकॉर्ड भी पंचायत विभाग ने जमा कर लिया है। सरपंचों की शक्तियां अब बीडीपीओ को प्रशासक के रूप में सौंप दी गई हैं। बीडीपीओ ही सभी प्रकार के कार्य संभाल रहा है। सरपंचों को चार्जमुक्त कर दिया गया है। जिला में 168 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें अब विकातस कार्य ठप पड़े हैं जबकि गांवों में आज भी विकास कार्यों की जरूरत है। कई गांवों में दूषित पानी की समस्या से हालात खराब बने हुए हैं। इन गांवों में दूषित पानी निकासी के लिए नालों के निर्माण की जरूरत है। इसी प्रकार कई गांवों में पेयजल लाइनें भी बिछाने की सख्त जरूरत है। अब गर्मी के मौसम में पेयजल संकट भी गहराया हुआ है। ऐसेे में गांवों में और भी कई ऐसे जरूरी काम होते हैं जो विशेष परिस्थितियों में पूरे करने जरूरी होते हैं। कई जगह पाइप लाइनें पहले से ही डाल रखी हैं लेकिन ऐसी गलियों की मरम्मत करने की भी जरूरत होती है।
प्रशासक के माध्यम से करवाया जा सकेगा काम
जारी पत्र के अनुसार जिस गांव में किसी जरूरी काम को पूरा करना है तो प्रशासक के माध्यम से इसे करवाया जा सकता है। प्रशासक को इसकी प्लान तैयार कर भेजी जा सकती है लेकिन कोई भी प्रोजेक्ट पांच लाख रुपये से ज्यादा बजट का नहीं होना चाहिए। इस काम को ई-टेंडरिंग के माध्यम से करवाया जाएगा। निवर्तमान सरपंच अपनी डिमांड पंचायत विभाग के प्रशासक को भेज सकते हैं। ब्लॉक समिति व जिला परिषद भी ऐसे विकास कार्य प्रशासक के माध्यम से करवा सकते हैं।
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मुख्य सचिव की ओर से इस आशय का पत्र मिल चुका है। पंचायत विभाग गांव में पांच लाख रुपये तक के विकास कार्य करवा सकता है। गांव में कोई जरूरी प्रोजेक्ट है तो उसे करवाया जा सकता है।
- अजीत सिंह, जेई, विकास एवं पंचायत विभाग
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बता दें कि पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल फरवरी अंतिम सप्ताह में पूरा हो चुका है। पंचायतों का रिकॉर्ड भी पंचायत विभाग ने जमा कर लिया है। सरपंचों की शक्तियां अब बीडीपीओ को प्रशासक के रूप में सौंप दी गई हैं। बीडीपीओ ही सभी प्रकार के कार्य संभाल रहा है। सरपंचों को चार्जमुक्त कर दिया गया है। जिला में 168 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें अब विकातस कार्य ठप पड़े हैं जबकि गांवों में आज भी विकास कार्यों की जरूरत है। कई गांवों में दूषित पानी की समस्या से हालात खराब बने हुए हैं। इन गांवों में दूषित पानी निकासी के लिए नालों के निर्माण की जरूरत है। इसी प्रकार कई गांवों में पेयजल लाइनें भी बिछाने की सख्त जरूरत है। अब गर्मी के मौसम में पेयजल संकट भी गहराया हुआ है। ऐसेे में गांवों में और भी कई ऐसे जरूरी काम होते हैं जो विशेष परिस्थितियों में पूरे करने जरूरी होते हैं। कई जगह पाइप लाइनें पहले से ही डाल रखी हैं लेकिन ऐसी गलियों की मरम्मत करने की भी जरूरत होती है।
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प्रशासक के माध्यम से करवाया जा सकेगा काम
जारी पत्र के अनुसार जिस गांव में किसी जरूरी काम को पूरा करना है तो प्रशासक के माध्यम से इसे करवाया जा सकता है। प्रशासक को इसकी प्लान तैयार कर भेजी जा सकती है लेकिन कोई भी प्रोजेक्ट पांच लाख रुपये से ज्यादा बजट का नहीं होना चाहिए। इस काम को ई-टेंडरिंग के माध्यम से करवाया जाएगा। निवर्तमान सरपंच अपनी डिमांड पंचायत विभाग के प्रशासक को भेज सकते हैं। ब्लॉक समिति व जिला परिषद भी ऐसे विकास कार्य प्रशासक के माध्यम से करवा सकते हैं।
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मुख्य सचिव की ओर से इस आशय का पत्र मिल चुका है। पंचायत विभाग गांव में पांच लाख रुपये तक के विकास कार्य करवा सकता है। गांव में कोई जरूरी प्रोजेक्ट है तो उसे करवाया जा सकता है।
- अजीत सिंह, जेई, विकास एवं पंचायत विभाग