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Charkhi Dadri News: खेतों की मिट्टी में ऑर्गेनिक कॉर्बन और सल्फर की कमी, पीएच मान बढ़ा
Sun, 22 Dec 2024 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 22 Dec 2024 12:15 AM IST
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अमर उजाला विशेष::
कृषि विभाग की ओर से लिए गए 6590 नमूनों में हुआ खुलासा, रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल और भूमि व जल प्रदूषण है वजह
जगवीर शर्मा
चरखी दादरी। लगातार रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल करने और भूमि एवं जल प्रदूषण की वजह से जिले की कृषि योग्य भूमि की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी हो गई है। इतना ही नहीं, मिट्टी का पीएच मान भी बढ़ गया है। यह आने वाले समय में खेती के लिए संकट पैदा कर सकता है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो यह क्रम इसी प्रकार जारी रहा तो उपजाऊ मिट्टी बंजर हाे जाएगी।
कृषि विभाग की मिट्टी जांच लैब में गत नवंबर माह में 6590 नमूनों की जांच की गई है। जांच में कई भागों में जमीन में सल्फर की भी कमी पाई गई है। इसके अलावा ऑर्गेनिक कॉर्बन की भी कमी पाई गई है, जो चिंता का विषय है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति में सुधार की योजना भी तैयार की जाएगी और किसानों को जागरूक करना भी इसका हिस्सा रहेगा।
दरअसल, पिछले डेढ़ दशक से किसान सभी प्रकार की फसल में रासायनिक खाद का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। देसी गोबर खाद की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जैविक खाद का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। किसान फसल चक्र को भी नहीं अपना रहे हैं ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति कम न हाेने पाए। इतना ही नहीं, धान व अन्य फसल के अवशेष भी खेत में जला दिए जाते हैं। इससे जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं। संवाद
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- जल दोहन और मानसून में कम बारिश भी कारण
विशेषज्ञों की मानें तो वैसे ही जलवायु परिवर्तन से जल व भूमि प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। जल का दोहन भी ज्यादा हो रहा है। मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से भूमिगत जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है। जो और भी चिंता का विषय है। सरकार की ओर से अब किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग व सरकार ने मिट्टी जांच की मुहिम भी तेज कर रखी है।
- ऑर्गेनिक कॉर्बन बढ़ाता है पैदावार
कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो नवंबर माह में विभाग की भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में 6590 मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। जांच में मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन नामक पोषक तत्व की सबसे ज्यादा कमी आई है। इस तत्व की फसल की पैदावार बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका होती है। इसी प्रकार, इन नमूनों की जांच में सल्फर की भी कमी पाई गई है।
- साढ़े 6 से साढ़े 8 के बीच होना चाहिए पीएच मान
जांच में सामने आया है कि कृषि जमीन का पीएच मान भी बढ़ रहा है। पीएच मान एक प्रकार से मिट्टी का ताप होता है। जांच में पीएच मान आठ से नौ के बीच पाया गया है। इसकी सामान्य रेंज साढ़े छह से साढ़े आठ तक मानी जाती है। यह भी चिंता का विषय का बन गया है। पीएच मान के पीछे जल प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भूमिगत जल लगातार क्षारीय होता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पानी का संकट पैदा हो जाएगा।
वर्सन:
हमने लैब में नवंबर माह में 6590 नमूनों की जांच की है। जांच में मिट्टी का पीएच मान सामान्य से ज्यादा पाया गया है। इसी प्रकार, मिट्टी की कार्बनिक शक्ति कमजोर मिली है। किसान इसके लिए फसल चक्र अपनाएं। रासायनिक खादों के बजाय जैविक व देसी खाद का इस्तेमाल करें।
-प्रवीन कुमार, लैब विशेषज्ञ, भूमि परीक्षण प्रयोगशाला
फोटो-05
दादरी शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित खेत। संवाद
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कृषि विभाग की ओर से लिए गए 6590 नमूनों में हुआ खुलासा, रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल और भूमि व जल प्रदूषण है वजह
जगवीर शर्मा
चरखी दादरी। लगातार रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल करने और भूमि एवं जल प्रदूषण की वजह से जिले की कृषि योग्य भूमि की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी हो गई है। इतना ही नहीं, मिट्टी का पीएच मान भी बढ़ गया है। यह आने वाले समय में खेती के लिए संकट पैदा कर सकता है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो यह क्रम इसी प्रकार जारी रहा तो उपजाऊ मिट्टी बंजर हाे जाएगी।
कृषि विभाग की मिट्टी जांच लैब में गत नवंबर माह में 6590 नमूनों की जांच की गई है। जांच में कई भागों में जमीन में सल्फर की भी कमी पाई गई है। इसके अलावा ऑर्गेनिक कॉर्बन की भी कमी पाई गई है, जो चिंता का विषय है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति में सुधार की योजना भी तैयार की जाएगी और किसानों को जागरूक करना भी इसका हिस्सा रहेगा।
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दरअसल, पिछले डेढ़ दशक से किसान सभी प्रकार की फसल में रासायनिक खाद का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। देसी गोबर खाद की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जैविक खाद का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। किसान फसल चक्र को भी नहीं अपना रहे हैं ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति कम न हाेने पाए। इतना ही नहीं, धान व अन्य फसल के अवशेष भी खेत में जला दिए जाते हैं। इससे जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं। संवाद
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- जल दोहन और मानसून में कम बारिश भी कारण
विशेषज्ञों की मानें तो वैसे ही जलवायु परिवर्तन से जल व भूमि प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। जल का दोहन भी ज्यादा हो रहा है। मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से भूमिगत जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है। जो और भी चिंता का विषय है। सरकार की ओर से अब किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग व सरकार ने मिट्टी जांच की मुहिम भी तेज कर रखी है।
- ऑर्गेनिक कॉर्बन बढ़ाता है पैदावार
कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो नवंबर माह में विभाग की भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में 6590 मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। जांच में मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन नामक पोषक तत्व की सबसे ज्यादा कमी आई है। इस तत्व की फसल की पैदावार बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका होती है। इसी प्रकार, इन नमूनों की जांच में सल्फर की भी कमी पाई गई है।
- साढ़े 6 से साढ़े 8 के बीच होना चाहिए पीएच मान
जांच में सामने आया है कि कृषि जमीन का पीएच मान भी बढ़ रहा है। पीएच मान एक प्रकार से मिट्टी का ताप होता है। जांच में पीएच मान आठ से नौ के बीच पाया गया है। इसकी सामान्य रेंज साढ़े छह से साढ़े आठ तक मानी जाती है। यह भी चिंता का विषय का बन गया है। पीएच मान के पीछे जल प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भूमिगत जल लगातार क्षारीय होता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पानी का संकट पैदा हो जाएगा।
वर्सन:
हमने लैब में नवंबर माह में 6590 नमूनों की जांच की है। जांच में मिट्टी का पीएच मान सामान्य से ज्यादा पाया गया है। इसी प्रकार, मिट्टी की कार्बनिक शक्ति कमजोर मिली है। किसान इसके लिए फसल चक्र अपनाएं। रासायनिक खादों के बजाय जैविक व देसी खाद का इस्तेमाल करें।
-प्रवीन कुमार, लैब विशेषज्ञ, भूमि परीक्षण प्रयोगशाला
फोटो-05
दादरी शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित खेत। संवाद