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Charkhi Dadri News: 100 बेड के अस्पताल में प्रबंधन की मनमानी, नहीं मिलता पीने का पानी

Thu, 09 Oct 2025 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 09 Oct 2025 01:38 AM IST
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problem of drinking water in civil hospital
नागरिक अस्पताल में वार्डों के पीछे से हटाया गया वाटर कूलर। संवाद
- वाटर कूलर की जगह लटकी हैं फिल्टर किट्स, टंकी के पानी में आती है दुर्गंध
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जगदीप सिंह
चरखी दादरी। शहर के 100 बेड वाले नागरिक अस्पताल में मरीजों पर प्रबंधन की मनमानी भारी पड़ रही है। पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को अस्पताल परिसर से बाहर जाकर दुकानों से पानी की बोतलें खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि वार्डों और परिसर में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। कहीं वाटर कूलर नहीं लगे हैं। पीने के पानी की जगहों पर केवल सूखी टंकियां हैं या खराब वाटर फिल्टर किट्स टंगी नजर आती हैं।
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मरीजों का कहना है कि बार-बार पानी के लिए बाहर जाना उनके लिए असुविधाजनक है। मरीज खुद तो चल नहीं सकते, ऐसे में उनके परिजनों को पानी लाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। स्टाफ कर्मचारी अपनी सुविधा के लिए निजी खर्चे पर कैंपर मंगवा लेते हैं पर मरीजों के लिए कोई वैकल्पिक प्रबंध नहीं है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से स्वास्थ्य व अन्य सुविधाएं दुरुस्त होने के दावे किए जाते हैं।
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अस्पताल परिसर में कई जगहों पर पीने का पानी लिखा हुआ है, उन स्थानों पर ऐसा कुछ नहीं है। तीन वाटर पोस्टों पर सिर्फ फिल्टर किट्स लटकी हैं। मरीजों ने बताया कि पूरे अस्पताल परिसर में पीने का पानी नहीं है। ऐसे में प्यास लगने पर पानी के लिए भटकना पड़ता है। संवाद
प्रतिदिन 1200 रहती है ओपीडी
अस्पताल में उपचार करवाने के लिए जिले के साथ लगते गांवों के मरीजों की भारी भीड़ उमड़ती है। आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन अस्पताल में लगभग 1200 मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में मरीजों के लिए पीने के पानी का प्रबंध नहीं होना अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
अस्पताल आने वालों ने बयां की पीड़ा

पांव की चोट लगने के बाद उपचार के लिए भर्ती हुए दो दिन बीत गए हैं। पूरे अस्पताल परिसर में पीने के पानी का प्रबंध नहीं है। यहां केवल शौचालयों में ही पानी है। प्यास बुझाने के लिए वार्डों के बाहर बनी टंकी से पानी मंगवाना पड़ता है।
-कमल सिंह, मरीज गांव समसपुर
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अस्पताल में मां को भर्ती हुए चार दिन हो गए हैं। यहां पर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास बुझाने के लिए बाहर बनाई गई टंंकी से पानी लाना पड़ता है। ये वार्डों से काफी दूरी पर बनाईं गई हैं। उसमें भी पानी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में बाहर जाकर दुकानों से पानी की बोतलें खरीदनी पड़ती हैं।
-महेंद्र सिंह, तीमारदार।
साथ आए परिवार के लोग बाहर से ही पानी लेकर आ रहे हैं। पीने के पानी में हल्की दुर्गंध सी आती है। अस्पताल में पानी नहीं मिलने के कारण मजबूरन यह पानी पीया जाता है। फिलहाल, पांच दिन से अस्पताल में भर्ती हैं।

-ओमपति देवी, गांव खरकड़ा
वर्सन:
अभी कुछ दिन पहले ही सीएमओ का कार्यभार संभाला है। वीरवार को अस्पताल पहुंचने के बाद पानी की व्यवस्था जांची जाएगी। इसके बाद जहां पानी की कमी है, वहां मरीजों के लिए पानी की उचित व्यवस्था करा दी जाएगी।
-नरेश कुमार, सीएमओ नागरिक अस्पताल
फोटो 19: अस्पताल परिसर में वाटर कूलर हटाने के बाद लटकी फिल्टर किट। संवाद
फोटो 20: नागरिक अस्पताल में वार्डों के पीछे से हटाया गया वाटर कूलर। संवाद
फोटो 21: अस्पताल के बाहर दीवार पर लिखा शीतल पानी लेकिन यहां पर कुछ भी नहीं है। संवाद
फोटो 22 : मरीजों के वार्ड में टेबल पर रखी पानी की बोतल, जो बाहर टंकी से मंगवाई गई है। संवाद
फोटो 23 : फर्स्ट फ्लोर पर डेंगू वार्ड के पास लटकती फिल्टर किट। संवाद
फोटो 24 : कमल सिंह
फोटो 25 :महेंद्र सिंह
फोटो 26 : ओमपति देवी
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