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Charkhi Dadri News: दो से पांच सितंबर तक बारिश की संभावना
Sun, 01 Sep 2024 04:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 01 Sep 2024 04:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। क्षेत्र में शनिवार को दिनभर मौसम शुष्क एवं साफ बना रहा। अधिकतम तापमान 34 व न्यूनतम 27 डिग्री दर्ज किया गया। वातावरण में नमी की मात्रा 70 प्रतिशत बनी रही। 12 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा चली।
सुबह से ही मौसम साफ रहा। दोपहर के समय तेज धूप खिलने पर उमस भरी गर्मी बढ़ गई। इससे लोगों को परेशानी हुई। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्र मोहन ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य में डिप डिप्रेशन राजस्थान से गुजरात पर बना हुआ है। इसकी वजह से हरियाणा, एनसीआर दिल्ली पर पिछले एक सप्ताह से दक्षिणी पूर्वी नमी वाली मानसून हवा चल रही है।
उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी पर एक नया कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। साथ ही एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने से एक बार फिर से मानसून टर्फ हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर आने की संभावना है। यह वर्तमान में राजस्थान के दक्षिणी हिस्से पर बना हुआ है। इसकी वजह से दो से पांच सितंबर के दौरान एक बार फिर से मानसून सक्रिय होने की संभावना है।
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बताया कि अभी बारिश की और जरूरत है। अब तक औसत से 30 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मानसून सीजन में कम से कम 550 एमएम बारिश होनी चाहिए तब जाकर भूमिगत जलस्तर कुछ ऊपर आ सकता है। बारिश की अभी खरीफ की फसलों को और जरूरत है।
फोटो-19
खेतोंं में खड़ी मूंग की फसल। संवाद
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चरखी दादरी। क्षेत्र में शनिवार को दिनभर मौसम शुष्क एवं साफ बना रहा। अधिकतम तापमान 34 व न्यूनतम 27 डिग्री दर्ज किया गया। वातावरण में नमी की मात्रा 70 प्रतिशत बनी रही। 12 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा चली।
सुबह से ही मौसम साफ रहा। दोपहर के समय तेज धूप खिलने पर उमस भरी गर्मी बढ़ गई। इससे लोगों को परेशानी हुई। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्र मोहन ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य में डिप डिप्रेशन राजस्थान से गुजरात पर बना हुआ है। इसकी वजह से हरियाणा, एनसीआर दिल्ली पर पिछले एक सप्ताह से दक्षिणी पूर्वी नमी वाली मानसून हवा चल रही है।
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उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी पर एक नया कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। साथ ही एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने से एक बार फिर से मानसून टर्फ हरियाणा एनसीआर दिल्ली पर आने की संभावना है। यह वर्तमान में राजस्थान के दक्षिणी हिस्से पर बना हुआ है। इसकी वजह से दो से पांच सितंबर के दौरान एक बार फिर से मानसून सक्रिय होने की संभावना है।
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बताया कि अभी बारिश की और जरूरत है। अब तक औसत से 30 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मानसून सीजन में कम से कम 550 एमएम बारिश होनी चाहिए तब जाकर भूमिगत जलस्तर कुछ ऊपर आ सकता है। बारिश की अभी खरीफ की फसलों को और जरूरत है।
फोटो-19
खेतोंं में खड़ी मूंग की फसल। संवाद