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नप कार्यालय पहुंचने पर मिली बैठक स्थगित होने की सूचना, भड़के पार्षद
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नप कार्यालय पहुंचने के बाद पार्षदों को बैठक स्थगित होने की लिखित सूचना देता कर्मचारी।
- फोटो : CharkhiDadri
शहर के विकास कार्यों के लिए आयोजित होने वाली बैठक की सूचना पाकर सोमवार सुबह नगर परिषद कार्यालय पहुंचे पार्षदों को बड़ा झटका लगा। बैठक कक्ष में पहुंचने के 30 मिनट बाद उनके पास बैठक स्थगित होने की सूचना आई। इस संबंध में चेयरमैन संजय छपारिया ने गत 30 जून को ही आदेश जारी कर दिए थे। पार्षदों को आरोप है कि अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर षड्यंत्र के तहत यह बैठक स्थगित की गई है। इसका असर सीधे तौर पर विकास कार्यों पर पड़ेगा। वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण सहित आठ पार्षदों व तीन पार्षद प्रतिनिधियों ने बैठक स्थगित करने की सूचना न देने का आरोप लगाया। वहीं, नप अधिकारियों का कहना है कि सीएम के कार्यक्रम और कार्यालय अवकाश के चलते सूचना पार्षदों तक नहीं पहुंचाई जा सकी।
वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण सहित पार्षद विरेंद्र पप्पू, पार्षद बख्शी सैनी, पार्षद विनोद वाल्मीकि, पार्षद कुलदीप गांधी, पार्षद पार्वती सैनी सहित पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र चरखी, एडवोकेट विक्रम श्योराण सतबीर चौहान व प्रवीन सैनी आदि चेयरमैन कार्यालय में बैठक के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि गत 27 अगस्त को सूचना और एजेंडा की कॉपी नगर परिषद अधिकारियों ने भेजी थी, जिसके मुताबिक दो सितंबर को सुबह 11 बजे नगर परिषद कार्यालय में शहर के विकास कार्यों का खाका खींचने के लिए पार्षदों की बैठक होनी थी। सवा 11 बजे तक भी बैठक शुरू न होने पर पार्षद अधिकारियों के पास पहुंचे और वहां उन्हें बैठक स्थगित होने की जानकारी हुई। इससे पार्षद भड़क गए और वापस चेयरमैन कार्यालय में आकर बैठ गए। चेयरमैन संजय छपारिया की गैरमौजूदगी में पार्षदों ने बैठक बिना सूचना दिए स्थगित करने पर रोष जताया। इसके बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने नप अधिकारियों व चेयरमैन पर कई आरोप भी जड़े।
करीब साढ़े 11 बजे नप कर्मचारी बैठक स्थगित होने की लिखित सूचना लेकर पार्षदों के पास पहुंचा। यह सूचना पार्षदों ने तारीख और समय लिखकर रिसीव की। पार्षदों का कहना है कि 21 पार्षदों में से आठ पार्षद और चार महिला पार्षदों से पहले उनके प्रतिनिधि बैठक कक्ष में पहुंचे। इन 12 पार्षदों को बैठक स्थगित होने की सूचना नहीं दी गई, जबकि कुछ पार्षदों को यह सूचना पहले ही दे दी गई थी।
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दो माह और 22 दिन बाद होनी थी बैठक
चेयरमैन और ईओ पर मिलीभगत कर बैठक स्थगित करने का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर नगर परिषद कार्यालय में बैठक आयोजित की जाती है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार हर माह बैठक आयोजित होनी चाहिए, लेकिन चेयरमैन मनमर्जी से बैठक की तिथि फाइनल करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछली बैठक 10 जून को आयोजित की गई थी और दो माह 22 दिन बाद दो सितंबर को बैठक बुलाई गई थी। उसे भी अधिकारी बिना अगली तारीख बताए स्थगित करने की बात कह रहे हैं।
वाइस चेयरमैन और चेयरमैन हुए आमने-सामने
- शहर का विकास नहीं विनाश करवा रहे हैं चेयरमैन संजय : वाइस चेयरमैन
वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण ने कहा कि नगर परिषद में विकास कार्यों के नाम पर बड़े घोटाले किए जा रहे हैं। चेयरमैन शहर का विकास नहीं, विनाश करवा रहे हैं। उन्होंने कहा सरकार विरोधी नीतियों वाले पार्षदों के साथ चेयरमैन और अधिकारी पक्षपात कर रहे हैं। ऐसे पार्षदों के वार्डों में न तो विकास कार्य करवाए जा रहे हैं और न ही जन समस्याओं का निदान किया जा रहा है। यह रणनीति के तहत हो रहा है।
- बबलू ने पहले भी लगाए थे आरोप, फिर डीसी को सौंपा संतुष्टि पत्र : चेयरमैन
चेयरमैन संजय छपारिया ने कहा कि वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण ने पहले भी इस तरह के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त को लिखित में दे दिया था कि वह विकास कार्यों से संतुष्ट हैं। वाइच चेयरमैन ने लिखा था कि उनकी भ्रांतियां विकास कार्यों के रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद दूर हो गई हैं। मैंने बैठक अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद गत 30 अगस्त को ही स्थगित कर दी थी।
पार्षदों ने बनाई वाइस चेयरमैन की अध्यक्षता में बैठक करने की रणनीति
बैठक स्थगित होने की सूचना देर से मिलने पर बैठक कक्ष में मौजूद पार्षदों ने वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करने की रणनीति भी बताई। करीब दस पार्षदों ने इस पर सहमति जताते हुए अपने हस्ताक्षर भी किए। इसके बाद पार्षद ईओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन वो वहां नहीं मिले। इसके बाद पार्षद कार्यालय से चले गए।
नगर परिषद के ईओ अभे सिंह यादव ने कहा कि सीएम साहब के कार्यक्रम और कार्यालय अवकाश के चलते पार्षदों तक हम बैठक स्थगित होने की सूचना नहीं पहुंचा पाए थे। सोमवार सुबह नप कार्यालय में पहुंचते ही पार्षदों को हमने इसकी सूचना दे दी थी।
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वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण सहित पार्षद विरेंद्र पप्पू, पार्षद बख्शी सैनी, पार्षद विनोद वाल्मीकि, पार्षद कुलदीप गांधी, पार्षद पार्वती सैनी सहित पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र चरखी, एडवोकेट विक्रम श्योराण सतबीर चौहान व प्रवीन सैनी आदि चेयरमैन कार्यालय में बैठक के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि गत 27 अगस्त को सूचना और एजेंडा की कॉपी नगर परिषद अधिकारियों ने भेजी थी, जिसके मुताबिक दो सितंबर को सुबह 11 बजे नगर परिषद कार्यालय में शहर के विकास कार्यों का खाका खींचने के लिए पार्षदों की बैठक होनी थी। सवा 11 बजे तक भी बैठक शुरू न होने पर पार्षद अधिकारियों के पास पहुंचे और वहां उन्हें बैठक स्थगित होने की जानकारी हुई। इससे पार्षद भड़क गए और वापस चेयरमैन कार्यालय में आकर बैठ गए। चेयरमैन संजय छपारिया की गैरमौजूदगी में पार्षदों ने बैठक बिना सूचना दिए स्थगित करने पर रोष जताया। इसके बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने नप अधिकारियों व चेयरमैन पर कई आरोप भी जड़े।
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करीब साढ़े 11 बजे नप कर्मचारी बैठक स्थगित होने की लिखित सूचना लेकर पार्षदों के पास पहुंचा। यह सूचना पार्षदों ने तारीख और समय लिखकर रिसीव की। पार्षदों का कहना है कि 21 पार्षदों में से आठ पार्षद और चार महिला पार्षदों से पहले उनके प्रतिनिधि बैठक कक्ष में पहुंचे। इन 12 पार्षदों को बैठक स्थगित होने की सूचना नहीं दी गई, जबकि कुछ पार्षदों को यह सूचना पहले ही दे दी गई थी।
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दो माह और 22 दिन बाद होनी थी बैठक
चेयरमैन और ईओ पर मिलीभगत कर बैठक स्थगित करने का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर नगर परिषद कार्यालय में बैठक आयोजित की जाती है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार हर माह बैठक आयोजित होनी चाहिए, लेकिन चेयरमैन मनमर्जी से बैठक की तिथि फाइनल करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछली बैठक 10 जून को आयोजित की गई थी और दो माह 22 दिन बाद दो सितंबर को बैठक बुलाई गई थी। उसे भी अधिकारी बिना अगली तारीख बताए स्थगित करने की बात कह रहे हैं।
वाइस चेयरमैन और चेयरमैन हुए आमने-सामने
- शहर का विकास नहीं विनाश करवा रहे हैं चेयरमैन संजय : वाइस चेयरमैन
वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण ने कहा कि नगर परिषद में विकास कार्यों के नाम पर बड़े घोटाले किए जा रहे हैं। चेयरमैन शहर का विकास नहीं, विनाश करवा रहे हैं। उन्होंने कहा सरकार विरोधी नीतियों वाले पार्षदों के साथ चेयरमैन और अधिकारी पक्षपात कर रहे हैं। ऐसे पार्षदों के वार्डों में न तो विकास कार्य करवाए जा रहे हैं और न ही जन समस्याओं का निदान किया जा रहा है। यह रणनीति के तहत हो रहा है।
- बबलू ने पहले भी लगाए थे आरोप, फिर डीसी को सौंपा संतुष्टि पत्र : चेयरमैन
चेयरमैन संजय छपारिया ने कहा कि वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण ने पहले भी इस तरह के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त को लिखित में दे दिया था कि वह विकास कार्यों से संतुष्ट हैं। वाइच चेयरमैन ने लिखा था कि उनकी भ्रांतियां विकास कार्यों के रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद दूर हो गई हैं। मैंने बैठक अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद गत 30 अगस्त को ही स्थगित कर दी थी।
पार्षदों ने बनाई वाइस चेयरमैन की अध्यक्षता में बैठक करने की रणनीति
बैठक स्थगित होने की सूचना देर से मिलने पर बैठक कक्ष में मौजूद पार्षदों ने वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करने की रणनीति भी बताई। करीब दस पार्षदों ने इस पर सहमति जताते हुए अपने हस्ताक्षर भी किए। इसके बाद पार्षद ईओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन वो वहां नहीं मिले। इसके बाद पार्षद कार्यालय से चले गए।
नगर परिषद के ईओ अभे सिंह यादव ने कहा कि सीएम साहब के कार्यक्रम और कार्यालय अवकाश के चलते पार्षदों तक हम बैठक स्थगित होने की सूचना नहीं पहुंचा पाए थे। सोमवार सुबह नप कार्यालय में पहुंचते ही पार्षदों को हमने इसकी सूचना दे दी थी।