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Charkhi Dadri News: समय रहते माता-पिता ने करवाया उपचार, अपने पैरों पर चलने लगे टॉलिप्स से ग्रस्त 8 बच्चे
Thu, 06 Apr 2023 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 06 Apr 2023 11:56 PM IST
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उपचार के दौरान बच्चे को दिए जाने वाले शूज दिखाते स्वास्थ्य कर्मी।
चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में टॉलिप्स (पैरों का अंदर की ओर मुड़ना) बीमारी का उपचार निशुल्क मिलने से बच्चों के परिजनों को काफी राहत मिली है। यह सुविधा दादरी में शुरू करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक 8 बच्चे उपचार करवाकर अपने पैरों पर चलने लगे हैं जबकि 15 का अभी भी उपचार चल रहा है।
दिसंबर 2020 से पहले दादरी में टॉलिप्स के उपचार की सुविधा नहीं थी। टॉलिप्स का शिकार बने बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग क्लब फुट क्लीनिक नामक साप्ताहिक सेवा मुहैया करवा रहा है। इसके तहत हर मंगलवार को सिविल अस्पताल में टॉलिप्स से ग्रस्त लोगों का उपचार किया जा रहा है। वर्ष 2020 में यह सुविधा शुरू होने से पहले मरीजों को चार साल तक के बच्चे के उपचार के लिए रोहतक पीजीआई या भिवानी सिविल अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे।
दरअसल, टॉलिप्स एक जन्मजात बीमारी है। इसमें जन्म के दौरान बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं। जागरूकता के अभाव में समय पर इस बीमारी का उपचार न कराने पर बच्चा ताउम्र अपने पैरों पर चल नहीं पाता। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह बीमारी बेहद घातक है और अभिभावकों को इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों का उपचार समय रहते कराना चाहिए। अब तक दादरी सिविल अस्पताल में टॉलिप्स से ग्रस्त 23 बच्चे पहुंचे हैं जिनमें से 8 स्वस्थ हो चुके हैं।
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- 12 से 13 प्लस्तर से होते हैं पांव ठीक
अगर किसी बच्चे के दोनों पांव जन्म से अंदर की ओर मुड़े हैं तो दो विधियों के जरिये उसका उपचार किया जाता है। प्लस्तर विधि में 12 से 13 प्लस्तर किए जाते हैं और इस विधि में तीन से चार माह का समय लग जाता है। ऑपरेशन विधि से ज्यादा लोग प्लस्तर विधि को तवज्जो देते हैं।
- 50 हजार है निजी तौर पर खर्च
प्राइवेट तौर पर टॉलिप्स का उपचार महंगा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग खर्च वहन नहीं कर पाते और यहीं कारण है कि बीमारी से ग्रस्त बच्चे को आगे चलकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार एक विजिट का खर्च करीब चार हजार है और इस लिहाज से 13 विजिट का खर्च 50 हजार से अधिक बैठता है।
प्रत्येक मंगलवार को सिविल अस्पताल में क्लब फुट क्लीनिक लगाया जाता है। टॉलिप्स से ग्रस्त 8 बच्चे अब तक ठीक हो चुके हैं जबकि 15 का उपचार चल रहा है। अगर किसी बच्चे के जन्मजात पैर अंदर की तरफ मुड़े हैं तो उसका समय पर उपचार कराना बेहद जरूरी है।
-डॉ. अंकुर नागर, डिप्टी सीएमओ
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दिसंबर 2020 से पहले दादरी में टॉलिप्स के उपचार की सुविधा नहीं थी। टॉलिप्स का शिकार बने बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग क्लब फुट क्लीनिक नामक साप्ताहिक सेवा मुहैया करवा रहा है। इसके तहत हर मंगलवार को सिविल अस्पताल में टॉलिप्स से ग्रस्त लोगों का उपचार किया जा रहा है। वर्ष 2020 में यह सुविधा शुरू होने से पहले मरीजों को चार साल तक के बच्चे के उपचार के लिए रोहतक पीजीआई या भिवानी सिविल अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे।
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दरअसल, टॉलिप्स एक जन्मजात बीमारी है। इसमें जन्म के दौरान बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं। जागरूकता के अभाव में समय पर इस बीमारी का उपचार न कराने पर बच्चा ताउम्र अपने पैरों पर चल नहीं पाता। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह बीमारी बेहद घातक है और अभिभावकों को इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों का उपचार समय रहते कराना चाहिए। अब तक दादरी सिविल अस्पताल में टॉलिप्स से ग्रस्त 23 बच्चे पहुंचे हैं जिनमें से 8 स्वस्थ हो चुके हैं।
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- 12 से 13 प्लस्तर से होते हैं पांव ठीक
अगर किसी बच्चे के दोनों पांव जन्म से अंदर की ओर मुड़े हैं तो दो विधियों के जरिये उसका उपचार किया जाता है। प्लस्तर विधि में 12 से 13 प्लस्तर किए जाते हैं और इस विधि में तीन से चार माह का समय लग जाता है। ऑपरेशन विधि से ज्यादा लोग प्लस्तर विधि को तवज्जो देते हैं।
- 50 हजार है निजी तौर पर खर्च
प्राइवेट तौर पर टॉलिप्स का उपचार महंगा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग खर्च वहन नहीं कर पाते और यहीं कारण है कि बीमारी से ग्रस्त बच्चे को आगे चलकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार एक विजिट का खर्च करीब चार हजार है और इस लिहाज से 13 विजिट का खर्च 50 हजार से अधिक बैठता है।
प्रत्येक मंगलवार को सिविल अस्पताल में क्लब फुट क्लीनिक लगाया जाता है। टॉलिप्स से ग्रस्त 8 बच्चे अब तक ठीक हो चुके हैं जबकि 15 का उपचार चल रहा है। अगर किसी बच्चे के जन्मजात पैर अंदर की तरफ मुड़े हैं तो उसका समय पर उपचार कराना बेहद जरूरी है।
-डॉ. अंकुर नागर, डिप्टी सीएमओ