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सिविल अस्पताल में बनेगा आंखों के ऑपरेशन के लिए ओटी और ट्रेनिंग सेंटर
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आंखों का ब्लॉक बनाने के लिए सिविल अस्पताल में चिह्नित जगह।
- फोटो : CharkhiDadri
सिविल अस्पताल में आंखों के मरीजों के लिए अलग से ब्लॉक और कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बनवाने की योजना को सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इन दोनों प्रोजेक्ट पर एक करोड़ रुपये खर्च होंगे। आंखों के ब्लॉक में ऑपरेशन की सुविधा भी होगी। अब जल्द ही इन परियोजनाओं के लिए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। सिविल अस्पताल में आंखों की ओटी बनने से प्रतिमाह करीब 400 मरीजों को फायदा होगा।
इस समय सिविल अस्पताल में सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल और रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। वहीं, ट्रेनिंग सेंटर की कमी के कारण कर्मचारियों और चिकित्सकों को भी दी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते
आंखों का अलग से ब्लॉक बनाने की योजना नवंबर 2020 में तैयार की गई थी। सीएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार ने नवंबर में ही पीडब्ल्यूडी को दोनों प्रस्तावों का प्रारूप तैयार करने के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी टीम ने ड्राइंग और एस्टीमेट तैयार करने के लिए जगहों का निरीक्षण किया था। स्वास्थ्य विभाग की संस्तुति पर आंखों का ब्लॉक के लिए पुराने भवन के समीप जगह का चयन किया गया है, जबकि ट्रेनिंग सेंटर नए भवन बूस्टिंग स्टेशन के पास बनाया जाएगा। वहीं, सरकार ने भी इस योजना को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है।
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ट्रेनिंग सेंटर और भवन की ड्राइंग तैयार
पीडब्ल्यूडी ने ट्रेनिंग सेंटर और आंखों के ब्लॉक भवन की ड्राइंग तैयार कर ली है। आंखों का ब्लॉक दो मंजिला बनाया जाएगा। भू-तल पर ओपीडी देखी जाएंगी जबकि पहली मंजिल पर आंखों का ऑपरेशन थिएटर बनाया जाएगा। संसाधनों की खरीद के लिए सरकार अलग से बजट मुहैया करवाएगी।
एक दिन में 20 मरीज होते हैं रेफर
आंखों के विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और इसके चलते मरीजों को सिविल अस्पताल से दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। एक दिन में औसतन 20 और महीने में करीब 400 मरीज रेफर किए जा जाते हैं।
एक साल में होते हैं 50 से अधिक ट्रेनिंग सेशन
सिविल अस्पताल में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की ट्रेनिंग के लिए भी जगह का अभाव है। कांफ्रेंस हॉल में 50 से अधिक स्टाफ सदस्य के बैठने की व्यवस्था नहीं है। एक साल में स्वास्थ्य विभाग के 50 से अधिक ट्रेनिंग सेशन होते हैं। मजबूरी में नए भवन के गेट के समीप ही ये ट्रेनिंग सेशन करने पड़ते हैं। इस समस्या को देखते हुए ट्रेनिंग सेंटर ब्लॉक तैयार करवाया जा रहा है।
सितंबर में मिला था जिले को आंखों का सर्जन
लंबे समय से सिविल अस्पताल में आंखों का सर्जन न होने की कमी खल रही थी। सितंबर 2020 में ही स्वास्थ्य विभाग ने आंखों का सर्जन तैनात किया था। इसके एक सप्ताह बाद ही सिविल अस्पताल के पुराने भवन में आंखों की ओपीडी शुरू कर दी थी। हालांकि सर्जन की तैनाती के छह माह बाद भी आंखों के मरीजों को ऑपरेशन सुविधा शुरू नहीं हो पाई। आंखों के ऑपरेशन के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।
आंखों के ब्लॉक और ट्रेनिंग सेंटर भवन निर्माण के लिए हमें सरकार से अनुमति मिल गई है। करीब एक करोड़ रुपये इस पर खर्च होने का अनुमान है। आंखों का ओटी बनने के बाद मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा।
डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ
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इस समय सिविल अस्पताल में सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल और रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। वहीं, ट्रेनिंग सेंटर की कमी के कारण कर्मचारियों और चिकित्सकों को भी दी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते
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आंखों का अलग से ब्लॉक बनाने की योजना नवंबर 2020 में तैयार की गई थी। सीएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार ने नवंबर में ही पीडब्ल्यूडी को दोनों प्रस्तावों का प्रारूप तैयार करने के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी टीम ने ड्राइंग और एस्टीमेट तैयार करने के लिए जगहों का निरीक्षण किया था। स्वास्थ्य विभाग की संस्तुति पर आंखों का ब्लॉक के लिए पुराने भवन के समीप जगह का चयन किया गया है, जबकि ट्रेनिंग सेंटर नए भवन बूस्टिंग स्टेशन के पास बनाया जाएगा। वहीं, सरकार ने भी इस योजना को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है।
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ट्रेनिंग सेंटर और भवन की ड्राइंग तैयार
पीडब्ल्यूडी ने ट्रेनिंग सेंटर और आंखों के ब्लॉक भवन की ड्राइंग तैयार कर ली है। आंखों का ब्लॉक दो मंजिला बनाया जाएगा। भू-तल पर ओपीडी देखी जाएंगी जबकि पहली मंजिल पर आंखों का ऑपरेशन थिएटर बनाया जाएगा। संसाधनों की खरीद के लिए सरकार अलग से बजट मुहैया करवाएगी।
एक दिन में 20 मरीज होते हैं रेफर
आंखों के विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और इसके चलते मरीजों को सिविल अस्पताल से दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। एक दिन में औसतन 20 और महीने में करीब 400 मरीज रेफर किए जा जाते हैं।
एक साल में होते हैं 50 से अधिक ट्रेनिंग सेशन
सिविल अस्पताल में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की ट्रेनिंग के लिए भी जगह का अभाव है। कांफ्रेंस हॉल में 50 से अधिक स्टाफ सदस्य के बैठने की व्यवस्था नहीं है। एक साल में स्वास्थ्य विभाग के 50 से अधिक ट्रेनिंग सेशन होते हैं। मजबूरी में नए भवन के गेट के समीप ही ये ट्रेनिंग सेशन करने पड़ते हैं। इस समस्या को देखते हुए ट्रेनिंग सेंटर ब्लॉक तैयार करवाया जा रहा है।
सितंबर में मिला था जिले को आंखों का सर्जन
लंबे समय से सिविल अस्पताल में आंखों का सर्जन न होने की कमी खल रही थी। सितंबर 2020 में ही स्वास्थ्य विभाग ने आंखों का सर्जन तैनात किया था। इसके एक सप्ताह बाद ही सिविल अस्पताल के पुराने भवन में आंखों की ओपीडी शुरू कर दी थी। हालांकि सर्जन की तैनाती के छह माह बाद भी आंखों के मरीजों को ऑपरेशन सुविधा शुरू नहीं हो पाई। आंखों के ऑपरेशन के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।
आंखों के ब्लॉक और ट्रेनिंग सेंटर भवन निर्माण के लिए हमें सरकार से अनुमति मिल गई है। करीब एक करोड़ रुपये इस पर खर्च होने का अनुमान है। आंखों का ओटी बनने के बाद मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा।
डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ