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Charkhi Dadri News: हाईकोर्ट ने दिए एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने के आदेश
Mon, 22 Jul 2024 06:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 22 Jul 2024 06:19 AM IST
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चरखी दादरी। दादरी एसपी की कार्यशैली के खिलाफ सोशल मीडिया पर जातिगत टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज की गई एफआईआर को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसकी पुष्टि याची के वकील प्रदीप रापडिया ने की है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने पुलिस चालान भी रद्द करने का आदेश दिया है।
एक युवक ने तत्कालीन एसपी विनोद कुमार की कार्यशैली को लेकर जातिगत आरक्षण टिप्पणी की थी। इस आधार पर 22 अप्रैल 2021 को शहर थाने में एससी-एसटी और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। एक फर्जी मुठभेड़ संबंधी वीडियो में आरोपी ने कहा था कि आरक्षित कोटे से एसपी और डॉक्टर भर्ती होने तक न तो लोगों को न्याय मिलेगा और न ही अच्छा इलाज। आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र जटासरा ने इस वीडियो को शेयर किया था। इसलिए उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई थी।
इस मामले के आरोपी जितेंद्र जटासरा ने अपने वकील प्रदीप रापड़िया के माध्यम से एफआईआर और चालान को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बहस के दौरान याची के वकील ने बताया कि सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और एक पुलिस अधिकारी की कार्यशैली पर अपने विचार प्रकट करना संविधान की ओर से दिया गया एक महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है।
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इसलिए व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए पुलिस एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं कर सकती। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जज संदीप मुद्गिल ने याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकारते हुए एफआईआर और चालान दोनों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता की फेसबुक पोस्ट में समाज को बांटने वाली कोई बात नजर नहीं आती।
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एक युवक ने तत्कालीन एसपी विनोद कुमार की कार्यशैली को लेकर जातिगत आरक्षण टिप्पणी की थी। इस आधार पर 22 अप्रैल 2021 को शहर थाने में एससी-एसटी और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। एक फर्जी मुठभेड़ संबंधी वीडियो में आरोपी ने कहा था कि आरक्षित कोटे से एसपी और डॉक्टर भर्ती होने तक न तो लोगों को न्याय मिलेगा और न ही अच्छा इलाज। आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र जटासरा ने इस वीडियो को शेयर किया था। इसलिए उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई थी।
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इस मामले के आरोपी जितेंद्र जटासरा ने अपने वकील प्रदीप रापड़िया के माध्यम से एफआईआर और चालान को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बहस के दौरान याची के वकील ने बताया कि सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और एक पुलिस अधिकारी की कार्यशैली पर अपने विचार प्रकट करना संविधान की ओर से दिया गया एक महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है।
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इसलिए व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए पुलिस एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं कर सकती। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जज संदीप मुद्गिल ने याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकारते हुए एफआईआर और चालान दोनों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता की फेसबुक पोस्ट में समाज को बांटने वाली कोई बात नजर नहीं आती।