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आठ केंद्रों पर नहीं पहुंचा एक भी किसान, आवक कम रहने से श्रमिक झेल रहे आर्थिक संकट
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चरखी दादरी। गेहूं खरीद का सीजन पिक पर है, लेकिन इस बासर आवक बेहद कम है। बुधवार को तो जिले के आठों खरीद केंद्र वीरान रहे। यहां एक भी किसान गेहूं बेचने नहीं पहुंचा। दूसरी ओर इस बार गेहूं की आवक कम होने के चलते जिले में काम की तलाश में आए करीब 300 श्रमिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इन श्रमिकों का कहना है कि उनके लिए काम ढूंढना मुश्किल बना हुआ है जिसके चलते दूसरे प्रदेश में बैठे परिजनों को भी इस बार वो आर्थिक मदद नहीं भेज पा रहे हैं।
इस सीजन में अब तक सिर्फ करीब 52 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। जबकि पिछले साल करीब तीन लाख क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी। आवक कम रहने के कारण मंडी में काम करने वाले प्रवासी मजदूर भी परेशान हैं। इस बार आवक कम होने का कारण अच्छी पैदावार न होना भी है। पिछले साल के मुकाबले इस साल प्रति एकड़ करीब पांच से छह क्विंटल गेहूं कम हुआ है और यही हाल सरसों का भी है।
बुधवार की अगर बात करें तो दादरी के अलावा बाढड़ा मंडी, छपार, बौंदकलां, कादमा, बेरला, बधवाना और झोझूकलां खरीद केंद्र पर एक भी किसान नहीं पहुंचा। इसके चलते इन खरीद केंद्रों पर एक भी गेटपास नहीं कटा। दादरी मंडी में बुधवार को वेयर हाउस को खरीद करनी थी।
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श्रमिक बोले: खुद का नहीं निकाल पा रहे खर्च, परिवार को कैसे भेजें मदद
- दिनभर में मुश्किल से अपने रहने का खर्च निकाल पा रहे हैं। इस बार काम काफी कम है और इसके चलते परिवार को भी आर्थिक मदद नहीं भेज पा रहे हैं।
कैलाश, प्रवासी श्रमिक
- पिछले सीजन में अच्छी कमाई हो गई थी जिसके कारण घर का खर्चा अच्छी तरह से निकल जाता था। इस बार किसान ही मंडी नहीं पहुंच रहे हैं।
- सतू पासवान, प्रवासी श्रमिक
- दो सप्ताह बाद ठीक हुई सरसों गुणवत्ता जांच लैब
पुरानी अनाज मंडी स्थित सरसों गुणवत्ता जांच लैब की मशीन दो सप्ताह के लंबे इंतजार के बाद बुधवार को ठीक हो गई है। इससे किसानों को राहत मिलेगी, क्योंकि मशीन में खराबी आने के चलते उन्हें 100 रुपये देकर प्राइवेट लैब पर गुणवत्ता जांच करवानी पड़ रही थी और इसके बदले उन्हें 100 से 150 रुपये देने पड़ रहे थ। अनाज मंडी स्थित सरकारी लैब में यह सुविधा निशुल्क है।
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फोटो: 21
सरसों गुणवत्ता जांच लैब मशीन को ठीक करता मैकेनिक।
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इस सीजन में अब तक सिर्फ करीब 52 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। जबकि पिछले साल करीब तीन लाख क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी। आवक कम रहने के कारण मंडी में काम करने वाले प्रवासी मजदूर भी परेशान हैं। इस बार आवक कम होने का कारण अच्छी पैदावार न होना भी है। पिछले साल के मुकाबले इस साल प्रति एकड़ करीब पांच से छह क्विंटल गेहूं कम हुआ है और यही हाल सरसों का भी है।
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बुधवार की अगर बात करें तो दादरी के अलावा बाढड़ा मंडी, छपार, बौंदकलां, कादमा, बेरला, बधवाना और झोझूकलां खरीद केंद्र पर एक भी किसान नहीं पहुंचा। इसके चलते इन खरीद केंद्रों पर एक भी गेटपास नहीं कटा। दादरी मंडी में बुधवार को वेयर हाउस को खरीद करनी थी।
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श्रमिक बोले: खुद का नहीं निकाल पा रहे खर्च, परिवार को कैसे भेजें मदद
- दिनभर में मुश्किल से अपने रहने का खर्च निकाल पा रहे हैं। इस बार काम काफी कम है और इसके चलते परिवार को भी आर्थिक मदद नहीं भेज पा रहे हैं।
कैलाश, प्रवासी श्रमिक
- पिछले सीजन में अच्छी कमाई हो गई थी जिसके कारण घर का खर्चा अच्छी तरह से निकल जाता था। इस बार किसान ही मंडी नहीं पहुंच रहे हैं।
- सतू पासवान, प्रवासी श्रमिक
- दो सप्ताह बाद ठीक हुई सरसों गुणवत्ता जांच लैब
पुरानी अनाज मंडी स्थित सरसों गुणवत्ता जांच लैब की मशीन दो सप्ताह के लंबे इंतजार के बाद बुधवार को ठीक हो गई है। इससे किसानों को राहत मिलेगी, क्योंकि मशीन में खराबी आने के चलते उन्हें 100 रुपये देकर प्राइवेट लैब पर गुणवत्ता जांच करवानी पड़ रही थी और इसके बदले उन्हें 100 से 150 रुपये देने पड़ रहे थ। अनाज मंडी स्थित सरकारी लैब में यह सुविधा निशुल्क है।
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सरसों गुणवत्ता जांच लैब मशीन को ठीक करता मैकेनिक।