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एनएचआई ने एसटीपी का एक टैंक मिट्टी डालकर किया बंद, स्टोरेज क्षमता आधी बचने से मानसून में जल चक्रवात के भंवर में फंसेगा शहर
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NHI closed STP tank by pouring soil
- फोटो : CharkhiDadri
एनएच-152 डी निर्माण के लिए एनएचआई ने दिल्ली रोड स्थित समसपुर एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का एक टैंक मिट्टी डालकर बंद कर दिया है। अब इस एसटीपी की स्टोरेज क्षमता आधी ही रह गई है। एसटीपी से छुछकवास ड्रेन नंबर आठ में पानी पहुंचाने के लिए 35 किलोमीटर लंबी लाइन डालने का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। एसटीपी की स्टोरेज क्षमता घटने और मानसून सीजन को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।
विभाग की योजना है कि बारिश के पानी को पंप सेटों के जरिए सीवर लाइनों में डाला जाए लेकिन एसटीपी से आगे पानी पहुंचाने की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मानसून सीजन में शहर जल चक्रवात के भंवर में फंस सकता है।
शहर के दूषित पानी की निकासी के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बना रखे हैं। एक एसटीपी कनीना रोड पर रामनगर गांव के समीप तो दूसरा दिल्ली रोड पर समसपुर गांव के समीप बनाया गया है। दोनों एसटीपी की स्टोरेज क्षमता पांच-पांच एमएलडी है। रामनगर एसटीपी 36 इंची लाइन डैमेज होने के चलते पिछले तीन साल से बंद पड़ा है। वहीं, पूरे शहर का दबाव पड़ने पर समसपुर एसटीपी की स्टोरेज क्षमता भी पिछले तीन साल से कम पड़ रही है। ऐसे में शहर में सीवर व्यवस्था का बुरा हाल है और लोग भारी परेशान हैं।
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समसपुर एसटीपी के एक टैंक की जमीन एनएच-152 डी के लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एक्वायर करनी शुरू कर दी है। इसके तहत एक स्टोरेज टैंक को मिट्टी डालकर बंद किया जा रहा है। समसपुर एसटीपी पर दो ही टैंक बने हैं जिनमें से अब एक ही बच गया है। इस स्थिति को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए रामनगर-कपूरी, टिकान कलां, ढाणी फौगाट, समसपुर, झिंझर, रानीला व बौंद कलां आदि गांवों कीर जमीन एक्वायर की गई है।
पहले ही स्टोरेज क्षमता थी कम, अब और बढ़ी परेशानी
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ढाणी फौगाट गांव की सीमा में बना है। अब जो निशानदेही कर रखी है उसके अनुसार राजमार्ग एसटीपी के एक पौंड के बीच से गुजरना है और करीब एक एकड़ की चौड़ाई राजमार्ग में कवर होनी है। जनस्वास्थ्य विभाग ने सीवर पानी स्टोरेज का विकल्प अभी तक नहीं तलाशा है जिससे आने वाले मानसून सीजन में बारिश से शहर के हालात खराब होना स्वाभाविक है।
पार्षद बोले: शहर को डूबने से बचाना है तो विकल्प तलाशे विभाग
नगर परिषद वाइस चेयरमैन दीपक श्योराण समेत पार्षद आनंद महराणा, रचना देवी, मनोज वर्मा, कुलदीप गांधी, विरेंद्र पप्पू, महेश गुप्ता आदि ने बताया कि एसटीपी टैंक का दायरा पहले ही कम था और अब एक टैंक बंद होने से समस्या और गहरा जाएगी। मानसून सीजन में अगर शहर को डूबने से बचाना है तो विभाग जल्द से जल्द विकल्प तलाश करे।
किसान एसटीपी टैंक ओवरफ्लो की समस्या से परेशान
एसटीपी के साथ समसपुर और ढाणी फौगाट गांवों के किसानों के खे हैं। एसटीपी के टैंक प्रत्येक साल ओवरफ्लो होते हैं और खेतों में दूषित पानी भरने से किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं। इस समस्या को लेकर किसान एसटीपी की मोटरें तक बंद करवा चुके हैं।
37 करोड़ का प्रोजेक्ट दिलाएगा स्थायी समाधानविधायक सेेमबीर सांगवान के निर्देशों पर सीवर व्यवस्था में सुधार के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने छुछक्वास ड्रेन नंबर आठ तक एसटीपी का ट्रीटेड पानी पहुंचाने के लिए एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। करीब 37 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से ड्रेन नंबर आठ तक 35 किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन बिछाई जाएगी। शहर की सीवर व्यवस्था सुधारने में यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा। चिंता की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट अब तक काम शुरू नहीं हुआ है जबकि मानसून आ चुका है।
जनस्वास्थ्य विभाग एक्सईएन शशिकांत से सवाल-जवाब
सवाल: क्या एनएचआई ने समसपुर एसटीपी का एक टैंक मिट्टी डालकर बंद किया है?
जवाब: एसटीपी की जमीन एनएच-152 डी के लिए एक्वायर होनखी है और टैंक की जमीन भी इसमें शामिल है।
सवाल: एसटीपी की स्टोरेज क्षमता अब आधी रह गई है, आपने क्या वैकल्पिक प्रबंध किए हैं?
जवाब: छुछकवास ड्रेन नंबर आठ तक पाइप लाइन के जरिए एसटीपी से आगे पानी की निकासी की जाएगी।
सवाल: ड्रेन नंबर आठ तक पाइप लाइन बिछाने का काम क्या अभी शुरू हुआ है?
जवाब: अभी काम शुरू नहीं हुआ है लेकिन जल्द शुरू करवा देंगे। यह प्रोजेक्ट सीवर समस्या से स्थायी निजात दिलाएगा।
सवाल: पाइप लाइन प्रोजेक्ट पूरा होने में काफी समय लगेगा, तब तक क्या विकल्प खोजा गया है ?
जवाब: शहर में जलभराव की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। पंप सेट लगाकर पानी की निकासी गलियों और सड़कों से की जाएगी।
शहर की सीवर और पेयजल व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। मैंने मेरे कोष से जनस्वास्थ्य विभाग को समस्याओं के समाधान के लिए पांच करोड़ भी दिए हैं। इसके अलावा ड्रेन नंबर आठ तक पाइप लाइन डालने के प्रोजेक्ट की सरकार से स्वीकृत्ति ले ली है। जल्द ही सीवर व्यवस्था में सुधार करवा दिया जाएगा।
सोमबीर सांगवान, विधायक, दादरी
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विभाग की योजना है कि बारिश के पानी को पंप सेटों के जरिए सीवर लाइनों में डाला जाए लेकिन एसटीपी से आगे पानी पहुंचाने की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मानसून सीजन में शहर जल चक्रवात के भंवर में फंस सकता है।
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शहर के दूषित पानी की निकासी के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बना रखे हैं। एक एसटीपी कनीना रोड पर रामनगर गांव के समीप तो दूसरा दिल्ली रोड पर समसपुर गांव के समीप बनाया गया है। दोनों एसटीपी की स्टोरेज क्षमता पांच-पांच एमएलडी है। रामनगर एसटीपी 36 इंची लाइन डैमेज होने के चलते पिछले तीन साल से बंद पड़ा है। वहीं, पूरे शहर का दबाव पड़ने पर समसपुर एसटीपी की स्टोरेज क्षमता भी पिछले तीन साल से कम पड़ रही है। ऐसे में शहर में सीवर व्यवस्था का बुरा हाल है और लोग भारी परेशान हैं।
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समसपुर एसटीपी के एक टैंक की जमीन एनएच-152 डी के लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एक्वायर करनी शुरू कर दी है। इसके तहत एक स्टोरेज टैंक को मिट्टी डालकर बंद किया जा रहा है। समसपुर एसटीपी पर दो ही टैंक बने हैं जिनमें से अब एक ही बच गया है। इस स्थिति को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए रामनगर-कपूरी, टिकान कलां, ढाणी फौगाट, समसपुर, झिंझर, रानीला व बौंद कलां आदि गांवों कीर जमीन एक्वायर की गई है।
पहले ही स्टोरेज क्षमता थी कम, अब और बढ़ी परेशानी
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ढाणी फौगाट गांव की सीमा में बना है। अब जो निशानदेही कर रखी है उसके अनुसार राजमार्ग एसटीपी के एक पौंड के बीच से गुजरना है और करीब एक एकड़ की चौड़ाई राजमार्ग में कवर होनी है। जनस्वास्थ्य विभाग ने सीवर पानी स्टोरेज का विकल्प अभी तक नहीं तलाशा है जिससे आने वाले मानसून सीजन में बारिश से शहर के हालात खराब होना स्वाभाविक है।
पार्षद बोले: शहर को डूबने से बचाना है तो विकल्प तलाशे विभाग
नगर परिषद वाइस चेयरमैन दीपक श्योराण समेत पार्षद आनंद महराणा, रचना देवी, मनोज वर्मा, कुलदीप गांधी, विरेंद्र पप्पू, महेश गुप्ता आदि ने बताया कि एसटीपी टैंक का दायरा पहले ही कम था और अब एक टैंक बंद होने से समस्या और गहरा जाएगी। मानसून सीजन में अगर शहर को डूबने से बचाना है तो विभाग जल्द से जल्द विकल्प तलाश करे।
किसान एसटीपी टैंक ओवरफ्लो की समस्या से परेशान
एसटीपी के साथ समसपुर और ढाणी फौगाट गांवों के किसानों के खे हैं। एसटीपी के टैंक प्रत्येक साल ओवरफ्लो होते हैं और खेतों में दूषित पानी भरने से किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं। इस समस्या को लेकर किसान एसटीपी की मोटरें तक बंद करवा चुके हैं।
37 करोड़ का प्रोजेक्ट दिलाएगा स्थायी समाधानविधायक सेेमबीर सांगवान के निर्देशों पर सीवर व्यवस्था में सुधार के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने छुछक्वास ड्रेन नंबर आठ तक एसटीपी का ट्रीटेड पानी पहुंचाने के लिए एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। करीब 37 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से ड्रेन नंबर आठ तक 35 किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन बिछाई जाएगी। शहर की सीवर व्यवस्था सुधारने में यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा। चिंता की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट अब तक काम शुरू नहीं हुआ है जबकि मानसून आ चुका है।
जनस्वास्थ्य विभाग एक्सईएन शशिकांत से सवाल-जवाब
सवाल: क्या एनएचआई ने समसपुर एसटीपी का एक टैंक मिट्टी डालकर बंद किया है?
जवाब: एसटीपी की जमीन एनएच-152 डी के लिए एक्वायर होनखी है और टैंक की जमीन भी इसमें शामिल है।
सवाल: एसटीपी की स्टोरेज क्षमता अब आधी रह गई है, आपने क्या वैकल्पिक प्रबंध किए हैं?
जवाब: छुछकवास ड्रेन नंबर आठ तक पाइप लाइन के जरिए एसटीपी से आगे पानी की निकासी की जाएगी।
सवाल: ड्रेन नंबर आठ तक पाइप लाइन बिछाने का काम क्या अभी शुरू हुआ है?
जवाब: अभी काम शुरू नहीं हुआ है लेकिन जल्द शुरू करवा देंगे। यह प्रोजेक्ट सीवर समस्या से स्थायी निजात दिलाएगा।
सवाल: पाइप लाइन प्रोजेक्ट पूरा होने में काफी समय लगेगा, तब तक क्या विकल्प खोजा गया है ?
जवाब: शहर में जलभराव की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। पंप सेट लगाकर पानी की निकासी गलियों और सड़कों से की जाएगी।
शहर की सीवर और पेयजल व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। मैंने मेरे कोष से जनस्वास्थ्य विभाग को समस्याओं के समाधान के लिए पांच करोड़ भी दिए हैं। इसके अलावा ड्रेन नंबर आठ तक पाइप लाइन डालने के प्रोजेक्ट की सरकार से स्वीकृत्ति ले ली है। जल्द ही सीवर व्यवस्था में सुधार करवा दिया जाएगा।
सोमबीर सांगवान, विधायक, दादरी