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Charkhi Dadri News: जंग के आसार बने तो शादी के चार दिन बाद ही सरहद पर लौट गए थे नायक कुलदीप

Mon, 24 Jul 2023 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 24 Jul 2023 11:20 PM IST
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Nayak Kuldeep had returned to the border only after four days of marriage when there was a possibility of war
चरखी दादरी। सेना को जांबाज देने में दादरी और भिवानी जिला अव्वल है। यहां के जवान जरूरत पड़ने पर देश के लिए बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटते हैं। 18 जून 1999 को कारगिल युद्ध में शहादत दे गांव महराणा निवासी नायक कुलदीप ने इसे सिद्ध भी किया है। जंग के आसार बनने पर शादी के चार दिन बाद ही कुलदीप सरहद पर लौट गए थे। शहादत के करीब सवा दो माह बाद उनकी पार्थिव देह घर पहुंची थी।
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इस शहादत के बाद भी गांव महराणा निवासी शहीद नायक कुलदीप सिंह के गांव में आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी है। अहम बात ये है कि महराणा के आठ जांबाज देश के लिए अब तक शहादत दे चुके हैं। बावजूद इसके ग्रामीणों के जहन में जलघर व स्वास्थ्य केंद्र सुविधा की कमी की टीस है। ग्रामीण अपने स्तर पर तमाम प्रयास कर चुके हैं, लेकिन अब तक नेताओं ने इस ओर ध्यान दिया है और न ही सरकार ने।
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बता दें कि कुलदीप सिंह 12वीं पास करने के बाद सेना में भर्ती हुए थे। मार्च में शादी होने के 4 दिन बाद ही उच्च धिकारियों का मैसेज मिलने पर वह सरहद पर लौट गया। शहीद के भाई संदीप कुमार ने बताया कि 18 जून 1999 को कुलदीप ने देश के लिए शहादत दी। गांव से देश के लिए अब तक आठ जवान शहीद हो चुके हैं।
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- 70 युवा इस समय सेवा में, 100 पूर्व सैनिक भी
गांव में इस समय करीब 70 जवान सेना में रहते हुए देश की रक्षा कर रहे हैं। गांव में करीब 100 पूर्व सैनिक हैं। गांव के पूर्व सैनिक रामकिशन शर्मा ने बताया कि उसने देश की रक्षा के लिए दो लड़ाइयां लड़ी हैं। 1965 व 1971 में पाकिस्तान को धूल चटाई। उसे अपने देश पर गर्व है। सरकार को गांव में सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवानी चाहिए।


- महराणा के इन वीर जांबाजों ने दी है शहादत
शहीद का नाम- शहादत वर्ष
1 सिपाही हरद्वारीलाल- 1965
2 सूबेदार दीवान सिंह-1971

3 सिपाही जगदीश ग्रोवर-1971
4 सिपाही जगदीश नायक-1971

5 शहीद अनूप सिंह- 1994
6 नायक कुलदीप सिंह- 1999
7 सिपाही समून अली- 2001
8 सूबेदार श्रीओम गौतम-2022



- इन समस्याओं को झेल रहे ग्रामीण
-पूर्व सैनिक रामकिशन शर्मा ने बताया कि गांव के मुख्य रास्ते में जलभराव की समस्या बनी रहती है। गांव में चिकित्सालय निर्माण की दरकार है। सरकारी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था नहीं होने पर लोगों को ट्यूबवेल के सहारे ही काम चलाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि तीन हजार की आबादी के इस गांव से देश की रक्षा करते हुए आठ जवान शहीद हो चुके हैं जबकि सरकार गांव को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं करवा पा रही है।
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