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Charkhi Dadri News: सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई
Sun, 01 Dec 2024 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 01 Dec 2024 12:38 AM IST
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चरखी दादरी के कीकरवासनी मंदिर में आयोजित कथा में शामिल महिलाएं।
चरखी दादरी। शहर स्थित कीकरवासनी बड़ा हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। इसके सातवें दिन स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि सुदामा जितेंद्रिय एवं भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर परिवार पालते थे। गरीबी के बावजूद हमेशा भगवान का ध्यान करते। पत्नी सुशीला सुदामा से आग्रह करती कि उनके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह उनकी मदद कर दें।
पत्नी के कहने पर सुदामा द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते हैं। उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण भावुक हो गए। सिंहासन पर बैठाकर कृष्ण सुदामा के चरण धोने लगे। सभी पटरानियां सुदामा से आशीर्वाद लेती हैं।
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सुदामा विदा लेकर घर लौटे तो भगवान कृष्ण की कृपा से महल बना पाते हैं फिर भी सुदामा फूंस की बनी कुटिया में रहकर भगवान को याद करते हैं।
इस दाैरान ट्रस्ट के प्रधान जीतराम गुप्ता, ट्रस्टी सुरेश वशिष्ठ, राकेश अरोड़ा, मनोज जांगिड़, राजेश मित्तल, शिवचरण लाला, जयप्रकाश, अजय, प्रहलाद शर्मा, पुजारी केशव पंत आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि सुदामा जितेंद्रिय एवं भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर परिवार पालते थे। गरीबी के बावजूद हमेशा भगवान का ध्यान करते। पत्नी सुशीला सुदामा से आग्रह करती कि उनके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह उनकी मदद कर दें।
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पत्नी के कहने पर सुदामा द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते हैं। उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण भावुक हो गए। सिंहासन पर बैठाकर कृष्ण सुदामा के चरण धोने लगे। सभी पटरानियां सुदामा से आशीर्वाद लेती हैं।
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सुदामा विदा लेकर घर लौटे तो भगवान कृष्ण की कृपा से महल बना पाते हैं फिर भी सुदामा फूंस की बनी कुटिया में रहकर भगवान को याद करते हैं।
इस दाैरान ट्रस्ट के प्रधान जीतराम गुप्ता, ट्रस्टी सुरेश वशिष्ठ, राकेश अरोड़ा, मनोज जांगिड़, राजेश मित्तल, शिवचरण लाला, जयप्रकाश, अजय, प्रहलाद शर्मा, पुजारी केशव पंत आदि मौजूद रहे।