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15 दिन देरी से मानसून न ली विदाई, बारिश ने चार साल का रिकॉर्ड तोड़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 12:03 AM IST
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Monsoon did not bid farewell after 15 days delay,  Rain breaks four year record
\ समसपुर गांव के खेत में भरा पानी। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। इस बार मानसून ने 15 दिन देरी से विदा ली है। बारिश ने पिछले चार सालों को रिकॉर्ड तोड़ा है। इस मानसून सीजन में जिले में 512 एमएम बारिश हुई है। इससे पहले 2016 में 576 एमएम बारिश हुई थी। पिछले साल के मुकाबले इस बार जिले में करीब दोगुनी बारिश दर्ज की गई है। जिले में 2020 में 289 एमएम बारिश हुई थी। बारिश के चलते शहर में जहां व्यापारियों ने भारी नुकसान झेला, वहीं गांव में जलभराव से फसलें बर्बाद हो गईं। इसके साथ ही जलभराव होने से स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जिले में अब तक डेंगू के 35 मरीज मिल चुके हैं।
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जून मध्य से प्री- मानसून की बारिश का सिलसिला शुरू हुआ था। किसानों ने जून प्रथम सप्ताह में हुई 24 एमएम बारिश में बाजरा, ग्वार, ज्वार, मूंग आदि की अगेती बिजाई कर दी थी, लेकिन 11 जुलाई तक बारिश नहीं होने पर फसलों के सूखने की चिंता बढ़ गई थी। इसके बाद मानसून ने गति पकड़ी और 12 जुलाई से बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। मानसून की बारिश होने पर फसलों का विकास एवं वृद्धि ठीक प्रकार से हुई, लेकिन सितंबर में हुई बारिश के बाद से खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पाई और फसलें नष्ट होती चली गईं। अभी भी जिले में करीब आठ हजार एकड़ जमीन जलभराव से प्रभावित है और इसके चलते अगली बिजाई की चिंता भी किसानों में बनी हुई है। मानसून की बारिश के चलते जलभराव होने से स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जिले में अब तक डेंगू के 35 मरीज मिल चुके हैं।
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एक सितंबर की 123 एमएम बारिश ने ढहाया कहर
सितंबर में 247 एमएम बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश होने से कपास की फसल की रोगों की चपेट में आ गई। इसके साथ तराई वाले भागों में जलभराव होने पर कपास 90 तक खराब हो गई। इसी प्रकार बाजरा की फसल की पकने के बाद जब कटाई व कढ़ाई का समय आया तो यह फसल भी खराब हो गई। किसान जयभगवान, बल्लूराम, कृष्ण व सोमबीर का कहना है कि सितंबर माह में ज्यादा बारिश होने फसलों में ज्यादा नुकसान हुआ है।
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बरानी क्षेत्र में इस बार आसानी से होगी फसलों की बिजाई
जिला में इस मानसून सीजन में 12 जुलाई से पांच अक्तूबर तक 512 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। इस बार बरानी एरिया में भी किसान रबी की फसलों की बिजाई का कार्य आसानी से कर सकेेंगे। किसानों को बिजली से पूर्व सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी।
पिछले पांच सालों में ये रही है जिले में बारिश की स्थिति
वर्ष बारिश हुई
2014 207 एमएम
2015 309 एमएम
2016 576 एमएम
2017 315 एमएम
2019 183 एमएम
2020 289 एमएम
2021 512 एमएम
खरीफ सीजन की फसलों की स्थिति
फसल बिजित रकबा
बाजरा 137500 एकड़
धान 12500 एकड़
ग्वार 6250 एकड़
कपास 86250 एकड़
गन्ना 3750 एकड़
दलहन 1200 एकड़
मूंग 8562 एकड़
इस बार बारिश अच्छी हुई है। इससे अब बिरानी एरिया में भी रबी की फसलों की बिजाई का कार्य आसानी हो सकेगा। अब मानसून की विदाई भी हो चुकी है।
डॉ. जितेंद्र सिंह, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग
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