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Charkhi Dadri News: जीएच में यूरिक एसिड टेस्टिंग किट खत्म, 10 दिन से नहीं हो रहे जोड़ो सहित कई प्रकार के टेस्ट
Tue, 07 May 2024 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 07 May 2024 01:21 AM IST
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नागरिक अस्पताल स्थित लैब के बाहर खड़े मरीज।
चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में यूरिक एसिड टेस्टिंग किट खत्म है। इसके चलते मरीजों के विभिन्न प्रकार के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। मजबूरीवश मरीजों को बाहर निजी लैब में जाकर जेब ढीली कर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। मरीजों का कहना है कि सिविल अस्पताल प्रबंधन को तत्काल यूरिक एसिड किट की व्यवस्था कर टेस्ट सुविधा शुरू करवानी चाहिए।
सिविल अस्पताल में पिछले 10 दिन से यूरिक एसिड टेस्टिंग (रीजेंट किट) किट खत्म है। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो एक सप्ताह पहले ही किट खरीद के ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं और एक या दो दिन के अंदर ही किट मुहैया होने की उम्मीद है।
सिविल अस्पताल में उपचार करवाने आए मरीज मनीष कुमार, हरेंद्र सिंह, संदीप कुमार, संजय कुमार, निर्मला देवी, चंचल कुमारी, भतेरी देवी आदि ने बताया कि लैब में टेस्टिंग नहीं होने से बाहर निजी लैब में महंगे दामों में टेस्ट करवाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गरीब तबके के लोग निशुल्क उपचार के लिए सरकारी अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां पर पर्याप्त मात्रा में सुविधा नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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ये जांच हैं प्रभावित
किट खत्म होने से खून में उच्च यूरिक एसिड का स्तर पता लगाने संबंधी टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा गठिया से पीड़ित मरीजों के स्वास्थ्य की निगरानी रखने के लिए भी जांच नहीं हो पा रही हैं। यूरिक एसिड एक रसायन है, जो तब बनता है जब शरीर प्यूरीन नामक पदार्थों को तोड़ता है।
निजी लैब संचालकों लेते हैं 200 रुपये
अस्पताल में हर रोज 100 से अधिक मरीज यूरिक एसिड टेस्ट करवाने के लिए आते हैं। यहां उनका टेस्ट निशुल्क किया जाता है। अगर मरीज इसी टेस्ट को निजी लैब में करवाया जाए तो मरीजों को 150 से 200 रुपये तक खर्च करना पड़ता है।
रीजेंट किट के लिए ऑर्डर कर दिया गया है। एक-दो दिन में ही किट मुहैया हो जाएगी और इसके तत्काल बाद टेस्ट सुविधा शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी।
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सिविल अस्पताल में पिछले 10 दिन से यूरिक एसिड टेस्टिंग (रीजेंट किट) किट खत्म है। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो एक सप्ताह पहले ही किट खरीद के ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं और एक या दो दिन के अंदर ही किट मुहैया होने की उम्मीद है।
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सिविल अस्पताल में उपचार करवाने आए मरीज मनीष कुमार, हरेंद्र सिंह, संदीप कुमार, संजय कुमार, निर्मला देवी, चंचल कुमारी, भतेरी देवी आदि ने बताया कि लैब में टेस्टिंग नहीं होने से बाहर निजी लैब में महंगे दामों में टेस्ट करवाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गरीब तबके के लोग निशुल्क उपचार के लिए सरकारी अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां पर पर्याप्त मात्रा में सुविधा नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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ये जांच हैं प्रभावित
किट खत्म होने से खून में उच्च यूरिक एसिड का स्तर पता लगाने संबंधी टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा गठिया से पीड़ित मरीजों के स्वास्थ्य की निगरानी रखने के लिए भी जांच नहीं हो पा रही हैं। यूरिक एसिड एक रसायन है, जो तब बनता है जब शरीर प्यूरीन नामक पदार्थों को तोड़ता है।
निजी लैब संचालकों लेते हैं 200 रुपये
अस्पताल में हर रोज 100 से अधिक मरीज यूरिक एसिड टेस्ट करवाने के लिए आते हैं। यहां उनका टेस्ट निशुल्क किया जाता है। अगर मरीज इसी टेस्ट को निजी लैब में करवाया जाए तो मरीजों को 150 से 200 रुपये तक खर्च करना पड़ता है।
रीजेंट किट के लिए ऑर्डर कर दिया गया है। एक-दो दिन में ही किट मुहैया हो जाएगी और इसके तत्काल बाद टेस्ट सुविधा शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी।