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Charkhi Dadri News: खो-खो के साथ थ्रो-बॉल में 26 पदक जीत मंजू ने बनाई पहचान
Tue, 05 Mar 2024 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 05 Mar 2024 12:53 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। खेलों की बदौलत बेटियां भी अपनी पहचान बना सकती हैं, बशर्ते इरादे मजबूत होने चाहिए। जिले के गांव कमोद निवासी मंजू इसकी बानगी है। मंजू ने एकसाथ दो गेम (खो-खो और थ्रो-बॉल) खेलते हुए अपनी पहचान बनाई। दोनों खेलों में मंजू राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 26 पदक जीत चुकी है और अब थ्रो-बॉल कोच बनना उसका सपना है।
कमोद निवासी एथलीट मंजू ने बताया कि स्कूल समय में खो-खो खेलना शुरू किया था। शुरुआत में शौक से वो खेल मैदान में उतरी थी, लेकिन प्रदर्शन अच्छा हुआ तो आत्मविश्वास और बढ़ गया। मंजू का कहना है कि इसी प्रकार थ्रो-बॉल की शुरुआत हुई थी और बाद में रुझान बढ़ता गया। मंजू अब तक दोनों खेलों में राज्य स्तर पर 17 और राष्ट्रीय स्तर पर 9 पदक जीत चुकी है। फिलहाल वह मैदान से दूरी बनाए हुए हैं और कोच भर्ती होने के लिए तैयारी कर रही है।
डीपीई की प्रेरणा आई काम
मंजू ने बताया कि स्कूल समय में डीपीई धर्मेंद्र के मार्गदर्शन में खो-खो खेला। दसवीं उत्तीर्ण होने पर उसने शहर के राजकीय कन्या स्कूल में कार्यरत डीपी खजानी नेहरा के नेतृत्व में थ्रो बाॅल की तैयारी की। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। मंजू ने बताया कि खो-खो में राज्यस्तर पर उसने 17 पदक जीते हैं, जिनमें 16 स्वर्ण व एक रजत पदक शामिल है। इसके अलावा उसने थ्रो-बॉल की नेशनल प्रतियोगिताओं में 9 पदक जीते हैं, जिनमें 7 स्वर्ण और दो रजत पदक हैं।
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राज्य स्तर पर खो-खो में बनाया रिकॉर्ड
खिलाड़ी मंजू ने बताया कि भिवानी में कुंगड़ और दादरी के बीच खो-खो मैच हुआ था। इसमें खेलने के लिए नौ मिनट का समय होता है, लेकिन इसमें उसने अकेले ही पांच मिनट तक खेलकर राज्यस्तर पर रिकॉर्ड बनाया था।
ये है मंजू की उपलब्धियां
- 2007 में अंबाला में आयोजित राष्ट्रीय खो-खो स्पर्धा में रजत।
- 2007 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खो-खो स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2012 में दिल्ली में आयोजित स्कूल राष्ट्रीय थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2012 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2013 में भिवानी में आयोजित राष्ट्रीय थ्रो-बाॅल प्रतियोगिता में स्वर्ण।
- 2013 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2014 में अमृतसर में आयोजित राष्ट्रीय खो-खो स्पर्धा में रजत।
- 2014 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2015 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
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चरखी दादरी। खेलों की बदौलत बेटियां भी अपनी पहचान बना सकती हैं, बशर्ते इरादे मजबूत होने चाहिए। जिले के गांव कमोद निवासी मंजू इसकी बानगी है। मंजू ने एकसाथ दो गेम (खो-खो और थ्रो-बॉल) खेलते हुए अपनी पहचान बनाई। दोनों खेलों में मंजू राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 26 पदक जीत चुकी है और अब थ्रो-बॉल कोच बनना उसका सपना है।
कमोद निवासी एथलीट मंजू ने बताया कि स्कूल समय में खो-खो खेलना शुरू किया था। शुरुआत में शौक से वो खेल मैदान में उतरी थी, लेकिन प्रदर्शन अच्छा हुआ तो आत्मविश्वास और बढ़ गया। मंजू का कहना है कि इसी प्रकार थ्रो-बॉल की शुरुआत हुई थी और बाद में रुझान बढ़ता गया। मंजू अब तक दोनों खेलों में राज्य स्तर पर 17 और राष्ट्रीय स्तर पर 9 पदक जीत चुकी है। फिलहाल वह मैदान से दूरी बनाए हुए हैं और कोच भर्ती होने के लिए तैयारी कर रही है।
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डीपीई की प्रेरणा आई काम
मंजू ने बताया कि स्कूल समय में डीपीई धर्मेंद्र के मार्गदर्शन में खो-खो खेला। दसवीं उत्तीर्ण होने पर उसने शहर के राजकीय कन्या स्कूल में कार्यरत डीपी खजानी नेहरा के नेतृत्व में थ्रो बाॅल की तैयारी की। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। मंजू ने बताया कि खो-खो में राज्यस्तर पर उसने 17 पदक जीते हैं, जिनमें 16 स्वर्ण व एक रजत पदक शामिल है। इसके अलावा उसने थ्रो-बॉल की नेशनल प्रतियोगिताओं में 9 पदक जीते हैं, जिनमें 7 स्वर्ण और दो रजत पदक हैं।
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राज्य स्तर पर खो-खो में बनाया रिकॉर्ड
खिलाड़ी मंजू ने बताया कि भिवानी में कुंगड़ और दादरी के बीच खो-खो मैच हुआ था। इसमें खेलने के लिए नौ मिनट का समय होता है, लेकिन इसमें उसने अकेले ही पांच मिनट तक खेलकर राज्यस्तर पर रिकॉर्ड बनाया था।
ये है मंजू की उपलब्धियां
- 2007 में अंबाला में आयोजित राष्ट्रीय खो-खो स्पर्धा में रजत।
- 2007 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खो-खो स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2012 में दिल्ली में आयोजित स्कूल राष्ट्रीय थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2012 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2013 में भिवानी में आयोजित राष्ट्रीय थ्रो-बाॅल प्रतियोगिता में स्वर्ण।
- 2013 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2014 में अमृतसर में आयोजित राष्ट्रीय खो-खो स्पर्धा में रजत।
- 2014 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।
- 2015 में पानीपत में आयोजित सीनियर नेशनल थ्रो-बाॅल स्पर्धा में स्वर्ण।