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शेल्टर होम में ठहरे प्रवासी मजदूरों को मिला काम
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खेत में अपने हाथ धोता श्रमिक।
- फोटो : CharkhiDadri
दादरी में लॉकडाउन के कारण मजदूरों का जीवन दोबारा पटरी पर आना शुरू हो गया है। कई मजदूरों को उनकी इच्छा पर काम करने के लिए विभिन्न स्थानों पर भेजा गया है। जहां ये मजदूर पहले से ज्यादा अच्छा महसूस कर रहे हैं। अब तक जिला प्रशासन 46 मजदूरों को उनकी इच्छा अनुसार काम पर भेज चुका है। इसके अलावा 31 श्रमिकों को उनके गृह जनपद भेज चुका है।
बीते 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही प्रवासी श्रमिकों ने पलायन शुरू कर दिया था। सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने इनके पलायन को रोकने के लिए शेल्टर होम में ठहराया था। उपायुक्त शयामलाल पूनिया ने तीन यात्री शिविर बनाकर 376 प्रवासी मजदूरों को ठहराया और सभी व्यवस्थाएं की थी। शेल्टर होम में रहते-रहते इन मजदूरों ने काम करने की इच्छा जताई। इसके बाद प्रशासन ने 46 लोगों को दूसरे स्थानों पर काम के लिए भेज दिया। जिससे कि इनकी जिंदगी पटरी पर आना शुरू हो। इनको आसपास काम मिलना किसी संजीवनी से कम नहीं है।
श्रमिकों के काम करने वाले क्षेत्र को रिलीफ कैंप किया घोषित
खास बात यह है कि जहां मजदूर भेजे गए हैं, उन स्थानों को भी सब रिलीफ कैंप घोषित कर दिया गया है। यही नहीं जब इन मजदूरों को शिविरों से काम करने के लिए भेजा जाता है। तब सामाजिक दूरी सहित अन्य बातों का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। इनको ले जाने वाली गाड़ी को सैनिटाइज किया जाता है। मास्क लगाना सभी के लिए जरूरी है। भेजने से पहले मजदूरों को लेने आए व्यक्तियों की भी मेडिकल जांच की जाती है।
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31 श्रमिकों को रोडवेज बसों से भेजा गया गृह जिलों में
उपायुक्त ने बताया कि तीन शिविरों में से 31 श्रमिकों को उनके गृह जिलों में रोडवेज बसों में बैठाकर भेज दिया है। इनमें भिवानी जिला में एक, सिरसा व हिसार में 5-5, महेंद्रगढ़ में तीन, गुरूग्राम में एक, करनाल में सात, रेवाड़ी में एक एवं पलवल में आठ मजदूरों को भिजवाया गया है।
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बीते 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही प्रवासी श्रमिकों ने पलायन शुरू कर दिया था। सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने इनके पलायन को रोकने के लिए शेल्टर होम में ठहराया था। उपायुक्त शयामलाल पूनिया ने तीन यात्री शिविर बनाकर 376 प्रवासी मजदूरों को ठहराया और सभी व्यवस्थाएं की थी। शेल्टर होम में रहते-रहते इन मजदूरों ने काम करने की इच्छा जताई। इसके बाद प्रशासन ने 46 लोगों को दूसरे स्थानों पर काम के लिए भेज दिया। जिससे कि इनकी जिंदगी पटरी पर आना शुरू हो। इनको आसपास काम मिलना किसी संजीवनी से कम नहीं है।
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श्रमिकों के काम करने वाले क्षेत्र को रिलीफ कैंप किया घोषित
खास बात यह है कि जहां मजदूर भेजे गए हैं, उन स्थानों को भी सब रिलीफ कैंप घोषित कर दिया गया है। यही नहीं जब इन मजदूरों को शिविरों से काम करने के लिए भेजा जाता है। तब सामाजिक दूरी सहित अन्य बातों का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। इनको ले जाने वाली गाड़ी को सैनिटाइज किया जाता है। मास्क लगाना सभी के लिए जरूरी है। भेजने से पहले मजदूरों को लेने आए व्यक्तियों की भी मेडिकल जांच की जाती है।
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31 श्रमिकों को रोडवेज बसों से भेजा गया गृह जिलों में
उपायुक्त ने बताया कि तीन शिविरों में से 31 श्रमिकों को उनके गृह जिलों में रोडवेज बसों में बैठाकर भेज दिया है। इनमें भिवानी जिला में एक, सिरसा व हिसार में 5-5, महेंद्रगढ़ में तीन, गुरूग्राम में एक, करनाल में सात, रेवाड़ी में एक एवं पलवल में आठ मजदूरों को भिजवाया गया है।