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Charkhi Dadri News: पराली प्रबंधन का पाठ पढ़ाया, पर्यावरण संरक्षण का आह्वान
Tue, 04 Nov 2025 10:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 04 Nov 2025 10:56 PM IST
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बच्चों को पराली प्रबंधन की जानकारी देते विभाग के अधिकारी। विज्ञप्ति
चरखी दादरी।
शहीद धर्मेश सांगवान राजकीय माध्यमिक विद्यालय खेड़ी बत्तर में मंगलवार को कृषि विभाग की ओर से जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, पराली निस्तारण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की मुख्य अध्यापिका पूनम बूरा ने की।
मुख्य अध्यापिका पूनम बूरा ने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों को बुलाया जाता है ताकि वे विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद कर सकें और उन्हें सरकारी योजनाओं व सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बना सकें। इस कड़ी में मंगलवार को कृषि विभाग की टीम कनिष्ठ अभियंता विवेक बागला, दीपक और अन्य कर्मचारियों ने विद्यालय में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि पराली जलाना पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता घटती है, बल्कि वायु प्रदूषण भी बढ़ता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सरकार की ओर से चलाई जा रही पराली निस्तारण योजनाओं और आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी दी ताकि किसान इनका लाभ उठाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दे सकें। विज्ञान अध्यापक मास्टर रविंद्र सांगवान बादल ने छात्रों को भूमि की ऊपरी परत के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता फसल उत्पादन का सबसे अहम आधार है और पराली जलाने से यही परत सबसे पहले क्षतिग्रस्त होती है। जब मिट्टी की उपजाऊ शक्ति घटती है तो फसलों की पैदावार भी प्रभावित होती है इसलिए वे अपने परिजनों को पराली के निस्तारण के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करें।
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इस अवसर पर संस्कृत अध्यापिका प्रवेश देवी, ड्राइंग अध्यापिका राजेश देवी, अनिल रावलधी आदि भी मौजूद रहे।
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शहीद धर्मेश सांगवान राजकीय माध्यमिक विद्यालय खेड़ी बत्तर में मंगलवार को कृषि विभाग की ओर से जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, पराली निस्तारण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की मुख्य अध्यापिका पूनम बूरा ने की।
मुख्य अध्यापिका पूनम बूरा ने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों को बुलाया जाता है ताकि वे विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद कर सकें और उन्हें सरकारी योजनाओं व सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बना सकें। इस कड़ी में मंगलवार को कृषि विभाग की टीम कनिष्ठ अभियंता विवेक बागला, दीपक और अन्य कर्मचारियों ने विद्यालय में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि पराली जलाना पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता घटती है, बल्कि वायु प्रदूषण भी बढ़ता है।
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उन्होंने विद्यार्थियों को सरकार की ओर से चलाई जा रही पराली निस्तारण योजनाओं और आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी दी ताकि किसान इनका लाभ उठाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दे सकें। विज्ञान अध्यापक मास्टर रविंद्र सांगवान बादल ने छात्रों को भूमि की ऊपरी परत के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता फसल उत्पादन का सबसे अहम आधार है और पराली जलाने से यही परत सबसे पहले क्षतिग्रस्त होती है। जब मिट्टी की उपजाऊ शक्ति घटती है तो फसलों की पैदावार भी प्रभावित होती है इसलिए वे अपने परिजनों को पराली के निस्तारण के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करें।
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इस अवसर पर संस्कृत अध्यापिका प्रवेश देवी, ड्राइंग अध्यापिका राजेश देवी, अनिल रावलधी आदि भी मौजूद रहे।