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Charkhi Dadri News: पेयजल प्रेशर में सुधार के लिए शहरवासियों को करना पड़ेगा जनवरी तक इंतजार
Thu, 24 Jul 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 24 Jul 2025 01:07 AM IST
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शहर की रविदास बस्ती में बना बूस्टिंग स्टेशन। संवाद
फोटो 05
चंपापुरी जलघर का पेयजल भंडारण टैंक। संवाद
फोटो 06
शहर की रविदास बस्ती में बना बूस्टिंग स्टेशन। संवाद
- जलघरों से सभी 7 बूस्टिंग स्टेशनों तक स्वतंत्र पेयजल लाइन डालने का काम मानसून सीजन की वजह से अभी बंद, डेढ़ माह बाद हो पाएगा शुरू
- दिसंबर के अंत तक परियोजना होगी पूरी, इसके बाद मौजूदा से आधे समय में पानी से लबालब हो जाएंगे बूस्टिंग स्टेशन के टैंक, लो प्रेशर आपूर्ति से मिलेगा छुटकारा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहरवासियों को पेयजल प्रेशर में सुधार के लिए अब जनवरी माह तक इंतजार करना पड़ेगा। जनस्वास्थ्य विभाग का शहर में जलघरों से बूस्टिंग स्टेशनों तक अलग से नई पेयजल लाइनें बिछाने का प्रोजेक्ट बारिश की वजह से फिलहाल बाधित है। मौसम अनुकूल होने के बाद ही विभाग एजेंसी के जरिये काम शुरू करवा पाएगा।
बूस्टिंग की लाइनों के अलावा कई हिस्सों में मेन लाइनें भी बिछाई जानी हैं। उसके बाद कॉलोनियों में कनेक्शनों की स्थिति देखी जाएगी। मानसून सीजन का समय आमतौर पर 15 सितंबर तक माना जाता है। ऐसे में उसके बाद ही इस प्रोजेक्ट पर सामान्य रूप से काम शुरू होने की उम्मीद है।
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दरअसल, विभाग ने अगस्त 2022 में यह प्रोजेक्ट तैयार कर मुख्यालय भेजा था। वहां से स्वीकृति और बजट मिलने के बाद विभाग ने 5 माह पहले परियोजना पर काम शुरू कराया था। इसके तहत शहर के सभी सात बूस्टिंग स्टेशन सीधे जलघरों से जोड़े जाने हैं। इस समय बूस्टिंग स्टेशनों को जाने वाली मेन लाइनों में लोगों ने अवैध पेयजल कनेक्शन कर रखे हैं। इससे पानी अंतिम छोर तक प्रेशर के साथ नहीं पहुंच पा रहा है। सभी बूस्टिंग का जलघर से सीधा कनेक्शन होने के बाद अवैध पेयजल कनेक्शन नहीं रहेंगे।
- पेयजल व्यवस्था पर खर्च हो रहे 115 करोड़
विभाग शहर में पेयजल प्रोजेक्ट पर विभिन्न मदों पर 115 करोड़ का बजट खर्च करेगा। इसके तहत कई कार्य करवाए जा रहे हैं। वहीं, शहर के हर घर में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचाने की दिशा में विभाग दो साल से काम कर रहा है। शहर के कई हिस्सों में ज्यादा मात्रा में पानी पहुंचता है तो कहीं कम प्रेशर की वजह से पानी नहीं पहुंच पाता है। पानी का समान वितरण नहीं हो रहा है। इसके लिए अलग से ड्राइंंग तैयार की जा रही है। ताकि, यह समस्या फिर से नहीं होने पाए। शहर में करीब 45 साल पुरानी पेयजल लाइनें जर्जर हाल में हैं।
- लंबे समय से पानी की गुणवत्ता सही नहीं
शहर में पेयजल की गुणवत्ता लंबे समय से नहीं है। जिस समय शहर का जलघर बना था, उस समय येे मेन लाइनें बिछाई गई थीं। ये मेन लाइनें अब जवाब दे चुकी हैं। इनके समानांतर ही सीवर की लाइनें भी बिछा रखी हैं। अब पेयजल लाइनों के जर्जर होने की वजह से इनमें सीवर का पानी मिलाकर आपूर्ति हो रहा है। जिस समय पेयजल लाइनें बिछाई गई थीं, उस समय पुरानी तकनीक थी। अब विभाग हर जगह लोहे की डीआई पाइप लाइनें बिछा रहा है। इन पाइपों में जंग नहीं लगती है। इनकी उम्र भी लंबी होती है।
- दादरी शहर में दो जलघरों से होती है आपूर्ति
शहर में इस समय दो जलघर हैं। मेन जलघर चंपापुरी में और दूसरा रामनगर में बना है। चंपापुरी जलघर करीब 45 साल पुराना है। अब पेयजल प्रोजेक्ट के तहत दोनों जलघरों की भंडारण क्षमता बढ़ाई जा रही है। बूस्टिंग स्टेशनों की लाइनें जलघर से सीधे जोड़ने से इनमें पानी थोड़े समय में भरा जा सकेगा। इन बूस्टिंग स्टेशन में पानी भरने के बाद ही कॉलोनियों में आपूर्ति की जाती है। इस समय बूस्टिंग स्टेशन में पानी भरने में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, जबकि अलग से लाइन डलने के बाद दो से ढाई घंटे में ये भरे जाएंगे।
वर्सन
बारिश के मौसम में बाधा जरूर आती है। जगह-जगह जलभराव होने की वजह से काम रुक जाता है। पेयजल सुधार के लिए विभाग योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।
-मोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
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चंपापुरी जलघर का पेयजल भंडारण टैंक। संवाद
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शहर की रविदास बस्ती में बना बूस्टिंग स्टेशन। संवाद
- जलघरों से सभी 7 बूस्टिंग स्टेशनों तक स्वतंत्र पेयजल लाइन डालने का काम मानसून सीजन की वजह से अभी बंद, डेढ़ माह बाद हो पाएगा शुरू
- दिसंबर के अंत तक परियोजना होगी पूरी, इसके बाद मौजूदा से आधे समय में पानी से लबालब हो जाएंगे बूस्टिंग स्टेशन के टैंक, लो प्रेशर आपूर्ति से मिलेगा छुटकारा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहरवासियों को पेयजल प्रेशर में सुधार के लिए अब जनवरी माह तक इंतजार करना पड़ेगा। जनस्वास्थ्य विभाग का शहर में जलघरों से बूस्टिंग स्टेशनों तक अलग से नई पेयजल लाइनें बिछाने का प्रोजेक्ट बारिश की वजह से फिलहाल बाधित है। मौसम अनुकूल होने के बाद ही विभाग एजेंसी के जरिये काम शुरू करवा पाएगा।
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बूस्टिंग की लाइनों के अलावा कई हिस्सों में मेन लाइनें भी बिछाई जानी हैं। उसके बाद कॉलोनियों में कनेक्शनों की स्थिति देखी जाएगी। मानसून सीजन का समय आमतौर पर 15 सितंबर तक माना जाता है। ऐसे में उसके बाद ही इस प्रोजेक्ट पर सामान्य रूप से काम शुरू होने की उम्मीद है।
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दरअसल, विभाग ने अगस्त 2022 में यह प्रोजेक्ट तैयार कर मुख्यालय भेजा था। वहां से स्वीकृति और बजट मिलने के बाद विभाग ने 5 माह पहले परियोजना पर काम शुरू कराया था। इसके तहत शहर के सभी सात बूस्टिंग स्टेशन सीधे जलघरों से जोड़े जाने हैं। इस समय बूस्टिंग स्टेशनों को जाने वाली मेन लाइनों में लोगों ने अवैध पेयजल कनेक्शन कर रखे हैं। इससे पानी अंतिम छोर तक प्रेशर के साथ नहीं पहुंच पा रहा है। सभी बूस्टिंग का जलघर से सीधा कनेक्शन होने के बाद अवैध पेयजल कनेक्शन नहीं रहेंगे।
- पेयजल व्यवस्था पर खर्च हो रहे 115 करोड़
विभाग शहर में पेयजल प्रोजेक्ट पर विभिन्न मदों पर 115 करोड़ का बजट खर्च करेगा। इसके तहत कई कार्य करवाए जा रहे हैं। वहीं, शहर के हर घर में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचाने की दिशा में विभाग दो साल से काम कर रहा है। शहर के कई हिस्सों में ज्यादा मात्रा में पानी पहुंचता है तो कहीं कम प्रेशर की वजह से पानी नहीं पहुंच पाता है। पानी का समान वितरण नहीं हो रहा है। इसके लिए अलग से ड्राइंंग तैयार की जा रही है। ताकि, यह समस्या फिर से नहीं होने पाए। शहर में करीब 45 साल पुरानी पेयजल लाइनें जर्जर हाल में हैं।
- लंबे समय से पानी की गुणवत्ता सही नहीं
शहर में पेयजल की गुणवत्ता लंबे समय से नहीं है। जिस समय शहर का जलघर बना था, उस समय येे मेन लाइनें बिछाई गई थीं। ये मेन लाइनें अब जवाब दे चुकी हैं। इनके समानांतर ही सीवर की लाइनें भी बिछा रखी हैं। अब पेयजल लाइनों के जर्जर होने की वजह से इनमें सीवर का पानी मिलाकर आपूर्ति हो रहा है। जिस समय पेयजल लाइनें बिछाई गई थीं, उस समय पुरानी तकनीक थी। अब विभाग हर जगह लोहे की डीआई पाइप लाइनें बिछा रहा है। इन पाइपों में जंग नहीं लगती है। इनकी उम्र भी लंबी होती है।
- दादरी शहर में दो जलघरों से होती है आपूर्ति
शहर में इस समय दो जलघर हैं। मेन जलघर चंपापुरी में और दूसरा रामनगर में बना है। चंपापुरी जलघर करीब 45 साल पुराना है। अब पेयजल प्रोजेक्ट के तहत दोनों जलघरों की भंडारण क्षमता बढ़ाई जा रही है। बूस्टिंग स्टेशनों की लाइनें जलघर से सीधे जोड़ने से इनमें पानी थोड़े समय में भरा जा सकेगा। इन बूस्टिंग स्टेशन में पानी भरने के बाद ही कॉलोनियों में आपूर्ति की जाती है। इस समय बूस्टिंग स्टेशन में पानी भरने में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, जबकि अलग से लाइन डलने के बाद दो से ढाई घंटे में ये भरे जाएंगे।
वर्सन
बारिश के मौसम में बाधा जरूर आती है। जगह-जगह जलभराव होने की वजह से काम रुक जाता है। पेयजल सुधार के लिए विभाग योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।
-मोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग