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Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Last year in waiting, 35 posts of doctors including 10 specialists are vacant in district hospital

इंतजार में बीता साल, जिला अस्पताल में 10 विशेषज्ञों समेत चिकित्सकों के 35 पद खाली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Dec 2021 11:45 PM IST
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Last year in waiting, 35 posts of doctors including 10 specialists are vacant in district hospital
चरखी दादरी के सिविल अस्पताल का भवन। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। जिले में वर्ष 2021 में भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं कर पाई। जिले में अब भी विशेषज्ञों के दस पद खाली हैं, जिसका असर सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। इनकी कमी के कारण जिला स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बनकर रह गया है। विशेषज्ञों की कमी के चलते जिले से प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी रेफर किए जा रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक विशेषज्ञों की जिले में तैनाती नहीं हो पाई है। मजबूरीवश मरीजों को भी दूसरे जिला अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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दादरी जिले की अगर बात करें तो चिकित्सकों के 94 पद स्वीकृत हैं। इनमें 21 पद विशेषज्ञों के भी हैं। जिले में 35 चिकित्सकों की कमी हैं जिनमें 10 विशेषज्ञ भी शामिल हैं। सिविल अस्पताल में चिकित्सकों के 42, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 21, 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों के 24 और मातृ-शिशु अस्पताल में चिकित्सकों के सात पद स्वीकृत हैं। सिविल अस्पताल लेकर पीएचसी तक चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। विशेषज्ञों की कमी के बाद भी जिला कोरोना की दो लहरों के प्रकोप को रोकने में कामयाब रहा।
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विशेषज्ञों की कमी के चलते दूसरी लहर के पिक पर पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग ने 13 दिन के लिए रोहतक से दो फिजिशियन भेजे थे, जो समयावधि पूरी होते ही लौट गए थे। इसके बाद से ही सरकार और विभाग ने जिले में फिजिशियन की तैनाती नहीं की है। संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि विशेषज्ञों के कई पद तो ऐसे हैं जो पिछले पांच साल से अधिक समय बीतने पर भी नहीं भरे गए हैं। इसका खामियाजा जिला के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल लोगों को और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को प्राथमिक उपचार ही जिले में मिल पा रहा है जबकि इससे आगे का उपचार उन्हें दूसरे जिलों में जाकर लेना पड़ रहा है।
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ईएनटी की भी खल रही कमी, भिवानी जा रहे मरीज
ईएनटी स्पेशलिस्ट न होने के चलते मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल जाकर उपचार करवाना पड़ रहा है। दादरी सिविल अस्पताल में लंबे समय से ईएनटी का पद रिक्त है। इस पद को भरने के दस मांग पत्र मुख्यालय भेजे जा चुके है। वहीं, कुछ मरीज भिवानी की भागदौड़ से बचने के लिए निजी अस्पतालों में जाकर महंगा उपचार करवाने को विवश हैं।
एक लाख बच्चों पर नहीं एक भी बाल रोग विशेषज्ञ
जिले में 18 वर्ष तक के बच्चों की संख्या करीब एक लाख है और बड़ी बात यह है कि जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में परिजन बच्चों को उपचार के लिए शहर के निजी अस्पतालों में ले जाने को विवश हैं। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने का अंदेशा है और ऐसे में आने वाले समय में बाल रोग विशेषज्ञ की जिले को कमी खलेगी।

विशेषज्ञों की तैनाती के लिए हमने मुख्यालय डिमांड भेज रखी है। जल्द ही इन पदों पर तैनाती होने की उम्मीद है। फिलहाल जो संसाधन हमारे पास हैं उनसे व्यवस्था बनाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। सर्जरी भी हमने शुरू कर दी है। - डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ।
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