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विशेषज्ञों की कमी, रेफर केंद्र बना चरखी दादरी सिविल अस्पताल

Fri, 02 Jul 2021 12:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jul 2021 12:15 AM IST
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Lack of specialists, Charkhi Dadri Civil Hospital becomes referral center
चरखी दादरी। कोरोना की दो लहर आने के बावजूद दादरी जिले में विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हुई है। इसके चलते जिला स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बनकर रह गया है। विशेषज्ञों की कमी के चलते जिले से प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी रेफर किए जा रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक विशेषज्ञों की जिले में तैनाती नहीं हो पाई है। जिसका सीधे तौर पर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मजबूरीवश मरीजों को भी दूसरे जिला अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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लंबे अरसे के बाद कोरोना की दूसरी लहर में दादरी जिले में फिजिशियन की कमी दूर हुई थी, लेकिन फिर से पहले जैसी स्थिति बन गई है। रोहतक पीजीआई से भेजे गए दोनों फिजिशियन करीब एक माह पूर्व वापस लौट चुके हैं और इस समय जिले में एक भी फिजिशियन नहीं है। विभाग के पास करीब 15 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इन्हें ऑपरेट करने वाला एक भी विशेषज्ञ नहीं है। अगर किसी संक्रमित की तबीयत बिगड़ जाए तो ऐसी स्थिति में फिजिशियन की कमी खलेगी। कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर विशेषज्ञों की कमी दूर करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की कमी के चलते दादरी सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सेवा का लाभ पिछले तीन सालों से मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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संवाददाता ने वीरवार को स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया तो सामने आया कि फिजिशियन नियुक्त न होने का असर सीधे तौर पर पड़ रहा है। ईएनटी स्पेशलिस्ट न होने के चलते मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल जाकर उपचार करवाना पड़ रहा है। कमोबख्श यहीं स्थिति अल्ट्रासाउंड सुविधा की है। निशुल्क सेवा का लाभ उठाने के लिए मरीज रोहतक पीजीआई और भिवानी अस्पताल जाने को मजबूर हैं जबकि भागदौड़ से बचने के लिए काफी मरीज निजी केंद्रों पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं। सिविल अस्पताल में सरकारी अल्ट्रासाउंड सेवा न होने से मरीज निजी केंद्रों पर जाकी जेब ढीली करने को विवश हैं और मामला संज्ञान में होते हुए भी स्वास्थ्य विभाग मौन है।
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डेढ़ लाख बच्चों पर नहीं एक भी बाल रोग विशेषज्ञ
जिले में बच्चों की तादाद करीब डेढ लाख है और बड़ी बात यह है कि जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में मां-बाप और परिजन बच्चों को उपचार के लिए शहर के निजी अस्पतालों में ले जाने को विवश हैं। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने का अंदेशा है और ऐसे में आने वाले समय में बाल रोग विशेषज्ञ की जिले को कमी खलेगी।

विशेषज्ञों की तैनाती की डिमांड हमने हेड ऑफिस भेजी हुई है। अल्ट्रासाउंड सेवा हम जल्द से जल्द शुरू करवाने का प्रयास करेंगे। विशेषज्ञों की तैनाती होते ही स्वास्थ्य सेवाओं में इजाफा कर दिया जाएगा।
डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ, चरखी दादरी
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