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Charkhi Dadri News: दो साल में स्वास्थ्य विभाग ने निदेशालय को नौ बार भेजी मांग, नहीं हुई मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती, मरीज किए जा रहे रेफर

Tue, 30 Jan 2024 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 30 Jan 2024 12:05 AM IST
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In two years, the health department sent demands to the directorate nine times, no psychiatrist was appointed, patients were being referred.
चरखी दादरी सिविल अस्पताल भवन जहां मनारोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। लंबा समय बीतने के बाद भी सिविल अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हुई है। इसके चलते मरीज काउंसिलिंग के लिए रोहतक और गुरुग्राम जाने को विवश हैं। पिछले दो साल में जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संदर्भ में निदेशालय को नौ बार मांग भेजी गई है, लेकिन अब तक नतीजा सिफर है।
जिले की आबादी करीब साढ़े छह लाख है। शहर में सिविल अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 35 उप-स्वास्थ्य केंद्र हैं। दादरी के जिले बनने के छह साल बाद सिविल अस्पताल में जिला स्तरीय उपचार मरीजों को नहीं मिल रहा। मनोरोग विशेषज्ञ की कमी इसकी बानगी भर है।
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दरअसल, मौजूदा समय में लोगों में भारी तनाव है। ऐसे में मनोरोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। सिविल अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीज यहां आने के बजाय सीधे रोहतक पीजीआई और गुरुग्राम के निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। पीजीआई में मरीजों की भीड़ के चलते ज्यादातर मरीजों के तीमारदार निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें वहां पर महंगे उपचार के लिए जेबी ढीली करनी पड़ रही है।
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1200 है सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी

सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 1200 रहती है। चार साल पहले से तुलना करे तो दैनिक ओपीडी करीब 50 फीसदी बढ़ी है। दूसरी ओर सरकार जिले को मेडिकल ऑफिसर देने में तो कामयाब रही है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी अब तक दूर नहीं हो पाई है।



इन विशेषज्ञों के पद भी पड़े खाली

दादरी सिविल अस्पताल की बात करे तो विशेषज्ञों के दस से अधिक पद खाली हैं। इनमें अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेष और फिजिशियन अहम है। इसके चलते जिला स्तरीय कई सेवाएं प्रभावित हैं। इनका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।




वर्जन
मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए सरकार को मांग भेज चुके हैं। जिले में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती होते ही ओपीडी शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मरीजों को काउंसिलिंग के लिए दूसरे जिले के अस्पतालों में भेजा जा रहा है। - डॉ. नरेंद्र, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग
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