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जांच में मिली नियमों की अनदेखी, एडीसी ने नप के जमीन बेचने के प्रस्ताव को किया खारिज

Sun, 20 Sep 2020 12:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 12:48 AM IST
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Ignoring rules found in investigation, ADC rejects NAP's offer to sell land
नगर परिषद हाउस की बैठक में पास किए ब्राह्मण सभा चरखी दादरी को छह कनाल सात मरला जमीन बेचने के प्रस्ताव को एडीसी मोहम्मद इमरान रजा ने जांच के बाद खारिज कर दिया है। डीसी के पास से शिकायत मार्क होकर एडीसी के पास जांच के लिए पहुंची थी। करीब दस माह जांच के बाद एडीसी ने अपनी रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय में सौंप दी है। जांच के दौरान कई ऐसे बिंदु सामने आए, जिनमें नियमों को ताक पर रखा गया।
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नप सूत्रों के अनुसार तीन अगस्त 2018 को हुई बैठक में नगर परिषद ने ब्राह्मण सभा चरखी दादरी को कलेक्टर रेट पर छह कनाल सात मरला जमीन बेचने का प्रस्ताव पास किया गया था। पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर ऐतराज जताया था। पार्षदों का कहना था कि शहर में विकास कार्यों का खाका खींचने के लिए प्रशासन और नगर परिषद के पास पहले ही जगह की कमी है और ऐसे में कलेक्टर रेट पर जमीन बेचना सही नहीं है।
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नप उप-प्रधान दीपक श्योराण समेत अन्य शहरवासियों ने उपायुक्त कार्यालय में शिकायत सौंपकर प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की थी। तत्कालीन डीसी श्यामलाल पूनिया ने मामले की जांच के लिए फाइल एडीसी मोहम्मद इमरान रजा को सौंपी थी। कोरोना के चलते करीब छह माह तक जांच प्रक्रिया प्रभावित रही। अब एडीसी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर आगामी कार्रवाई के लिए डीसी ऑफिस भेजी है। इस जांच रिपोर्ट में जमीन देने के प्रस्ताव को खारिज करने की सिफारिश भी उपायुक्त से की गई है। हालांकि इस मामले में एडीसी ने कुछ कहने से इंकार कर दिया और उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट डीसी को सौंप दी गई है। अगली कार्रवाई डीसी के द्वारा अमल में लाई जानी है। बता दें कि जिले में मुख्यमंत्री की कई ऐसी घोषणाएं हैं, जो जगह की कमी के चलते सिरे नहीं चढ़ पा रही हैं।
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तत्कालीन डीसी ने भी प्रस्ताव पर लगाए थे दस ऑब्जेक्शन
सूत्रों के अनुसार किसी सभा को कलेक्टर रेट पर जमीन देने का प्रस्ताव पास करने के बाद फाइल डीसी ऑफिस भेजी गई थी। तत्कालीन डीसी श्यामलाल पूनिया ने फरवरी में इस प्रस्ताव को देखने के बाद दस ऑब्जेक्शन लगाए थे। इनमें प्रमुख ऑब्जेक्शन ब्राह्मण सभा चरखी दादरी का ही चयन करने को लेकर था। इस पर डीसी ने नप अधिकारियों से जवाब भी तलब किया था, जो अब तक नहीं मिला है।
क्या हैं जमीन बेचने के प्रावधान
- अगर नप को जमीन बेचनी है तो ऑक्शन करके ही बेची जाएगी। कलेक्टर रेट पर किसी संस्था को सीधे जमीन नहीं दे सकते।
- जमीन बेचने के लिए डीसी के नेतृत्व में कमेटी गठित होगी, जिसमें डीटीपी और राजस्व विभाग के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
- जमीन बेचने से पहले ये भी देखना होगा कि इसकी लोकेशन क्या है और जनहित के कामों के लिए कहीं इसकी आवश्यकता तो नहीं है।
जिले में इन प्रोजेक्टों के लिए जमीन का अभाव
- जिले में मूक-बधिर केंद्र खोला जाना है।
- जिला स्तरीय लाइब्रेरी निर्माण भी प्रस्तावित है।
- बुजुर्गों के लिए ओल्ड ऐज होम भी खोला जाना है।
- जिले में पीडीआईसीयूएस का कार्यालय भी बनना है।
संस्था विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए नगर परिषद चेयरमैन और अधिकारियों ने मिलीभगत कर यह प्रस्ताव पास किया था। यह शहर के हित में नहीं था और प्रस्ताव का पता चलते ही हमने इसकी शिकायत डीसी से की थी।
दीपक श्योराण, वाइस चेयरमैन, नगर परिषद
पिछले कई सालों से नगर परिषद की जमीन पर कई लोगों ने कब्जा कर रखा है, जिसकी पैमाईश करवाकर नगर परिषद के कब्जे में लिया गया है। वाइस चेयरमैन के परिवार के सदस्यों का भी नप की जमीन पर कब्जा था। मैं ब्राह्मण सभा चरखी दादरी का सदस्य भी नहीं हूं और इसके प्रधान कुलदीप जोशी हैं। कब्जामुक्त की गई जमीन विभिन्न समाज की धर्मशालाएं बनवाने के लिए देने की हमारी योजना थी। ब्राह्मण सभा चरखी दादरी ने जमीन खरीदने के लिए लिखित रूप में इच्छा जाहिर की थी और बैठक में चर्चा के उपरांत यह प्रस्ताव पास किया गया था। कुछ राजनीतिक विरोधी ऐसे लोग हैं जो सरकार की मजबूरी बने हुए हैं और वो दबाव बनाकर मेरे खिलाफ ऐसे प्रपोगेंडा करवा रहे हैं।

संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद
डीसी ऑफिस से जांच के लिए फाइल मेरे पास भेजी गई थी। जांच कई माह तक कोरोना के चलते प्रभावित रही और अब मैंने अपनी रिपोर्ट तैयार कर डीसी ऑफिस में भेज दी है।
मोहम्मद इमरान रजा, एडीसी, चरखी दादरी
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