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दादरी में इफको का गोदाम बनने से हो सकता है डीएपी किल्लत का समाधान
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फोटो 03 डीएपी खाद के लिए केंद्र के बाहर लगी किसानों की भीड़।
- फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। जिले में अब तक एक हजार क्विंटल खाद पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक संकट बरकरार है। किसानों को डीएपी ने मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में इफको का गोदाम न होने की वजह से भी ज्यादा खेप मंगवाने में दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल भिवानी इफको गोदाम से ही डीएपी दादरी पहुंच रही है। डीएपी खाद की किल्लत का स्थायी तौर पर फिलहाल इसके अलावा और कोई समाधान नहीं है।
डीएपी खाद का जिले में गोदाम नहीं होनेे की वजह से भिवानी जिला मुख्यालय से माल सप्लाई करना पड़ रहा है। इस समय सरसों की बिजाई का कार्य शुरू होने जा रहा है। ऐसे में किसानों को डीएपी खाद की सख्त जरूरत बनी हुई है। दिनभर इफको केंद्रों व पैक्स सोसायटी के कार्यालयों में किसानों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। एक किसान को आधार कार्ड पर 50 किलोग्राम वजन के दो बैग दिए जा रहे हैं। डीएसपी का एक बैग 1200 रुपये में मिलता है, जबकि इसकी कीमत करीब 2800 रुपये है। सरकार इस पर 1600 रुपये तक सब्सिडी दे रही है। डीएसपी खाद का उत्पादन देश में गुजरात स्थित कांडला व उड़ीसा प्लांट में होता है, जो देश में खपत के लिहाज से काफी कम है।
75 प्रतिशत होता है विदेशों से आयात
इस समय डीएपी खाद रूस, मिस्र व यूरोप के देशों से आयात करना पड़ रहा है। भारत में करीब 25 प्रतिशत मात्रा में ही डीएपी खाद का उत्पादन हो पाता है शेष खाद विदेशों से आयात करना पड़ता है, जो काफी महंगा पड़ता है। इस वजह से सरकार को इस पर सब्सिडी देनी पड़ती है।
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- जल्द पहुंच सकती है 300 मीट्रिक टन खाद
जिले में इफको का गोदाम नहीं होने से और भी दिक्कत बन रही है। फिलहाल भिवानी स्थित इफको के गोदाम से डीएपी खाद मंगवानी पड़ रही है। कई बार वाहन के समय पर नहीं पहुंचने की वजह से भी दिक्कत बन जाती है। बिक्री केंद्रों पर किसानों की लंबी लाइन लग जाती है। वहीं, प्रशासन के अनुसार जल्द ही 200 से 300 मीट्रिक टन डीएपी जिले में पहुंचने की उम्मीद है।
वर्जन::
इस समय रबी की फसलों की बिजाई का समय शुरू होने जा रहा है। सरसों में डीएपी खाद की जरूरत होती है। सरकार को पर्याप्त मात्रा में किसानों को डीएपी उपलब्ध करवाना चाहिए। किसानों को दिनभर लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है।
-जगबीर घसोला, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति
वर्जन::
डीएपी की कमी नहीं रहने दी जाएगी। जरूरत के अनुसार जिले के सभी पैक्स व इफको केंद्रों में खाद भिजवाई जा रही है। जैसे ही 2800 बैग की खपत हो जाएगी उसके बाद और भिजवा दिए जाएंगे। अगर एक किसान को चार या पंाच बैग बांटने शुरू कर दिए तो ब्लैक में बेचने का काम शुरू हो सकता है।
-कृष्ण कुमार, चीफ मैनेजर, इफको
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डीएपी खाद का जिले में गोदाम नहीं होनेे की वजह से भिवानी जिला मुख्यालय से माल सप्लाई करना पड़ रहा है। इस समय सरसों की बिजाई का कार्य शुरू होने जा रहा है। ऐसे में किसानों को डीएपी खाद की सख्त जरूरत बनी हुई है। दिनभर इफको केंद्रों व पैक्स सोसायटी के कार्यालयों में किसानों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। एक किसान को आधार कार्ड पर 50 किलोग्राम वजन के दो बैग दिए जा रहे हैं। डीएसपी का एक बैग 1200 रुपये में मिलता है, जबकि इसकी कीमत करीब 2800 रुपये है। सरकार इस पर 1600 रुपये तक सब्सिडी दे रही है। डीएसपी खाद का उत्पादन देश में गुजरात स्थित कांडला व उड़ीसा प्लांट में होता है, जो देश में खपत के लिहाज से काफी कम है।
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75 प्रतिशत होता है विदेशों से आयात
इस समय डीएपी खाद रूस, मिस्र व यूरोप के देशों से आयात करना पड़ रहा है। भारत में करीब 25 प्रतिशत मात्रा में ही डीएपी खाद का उत्पादन हो पाता है शेष खाद विदेशों से आयात करना पड़ता है, जो काफी महंगा पड़ता है। इस वजह से सरकार को इस पर सब्सिडी देनी पड़ती है।
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- जल्द पहुंच सकती है 300 मीट्रिक टन खाद
जिले में इफको का गोदाम नहीं होने से और भी दिक्कत बन रही है। फिलहाल भिवानी स्थित इफको के गोदाम से डीएपी खाद मंगवानी पड़ रही है। कई बार वाहन के समय पर नहीं पहुंचने की वजह से भी दिक्कत बन जाती है। बिक्री केंद्रों पर किसानों की लंबी लाइन लग जाती है। वहीं, प्रशासन के अनुसार जल्द ही 200 से 300 मीट्रिक टन डीएपी जिले में पहुंचने की उम्मीद है।
वर्जन::
इस समय रबी की फसलों की बिजाई का समय शुरू होने जा रहा है। सरसों में डीएपी खाद की जरूरत होती है। सरकार को पर्याप्त मात्रा में किसानों को डीएपी उपलब्ध करवाना चाहिए। किसानों को दिनभर लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है।
-जगबीर घसोला, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति
वर्जन::
डीएपी की कमी नहीं रहने दी जाएगी। जरूरत के अनुसार जिले के सभी पैक्स व इफको केंद्रों में खाद भिजवाई जा रही है। जैसे ही 2800 बैग की खपत हो जाएगी उसके बाद और भिजवा दिए जाएंगे। अगर एक किसान को चार या पंाच बैग बांटने शुरू कर दिए तो ब्लैक में बेचने का काम शुरू हो सकता है।
-कृष्ण कुमार, चीफ मैनेजर, इफको