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नमकीन बनाने की फैक्टरी में हाईकोर्ट के आदेश पर मारा छापा, ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने बरामद माल सुपरदारी पर छोड़ा
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फैक्टरी के अंदर रखे माल की जांच करती टीम।
- फोटो : CharkhiDadri
गांधी नगर में चल रही नमकीन बनाने की फैक्टरी में शनिवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ छापामारी की गई। उत्तर-प्रदेश की वीके होम सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में छापमारी के आदेश जारी किए थे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट चंद्रमुकेश सांगवान ने यहां से बरामद हुए माल को सुपरदारी पर छोड़ा है। वहीं, फैक्टरी संचालक का कहना है कि उन पर कॉपी राइट और ट्रेड मार्क एक्ट की अवहेलना करने के याची ने जो आरोप लगाए हैं, वो गलत हैं। वो भी न्यायालय की शरण लेंगे। छापामारी के दौरान पुलिस भी मौजूद रही।
वीके होम सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा अधिकृत अधिकारी अमित अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी परी नाम से नमकीन बनाती है। उन्हें उनके कॉपी राइट और ट्रेड मार्क पर एक और नमकीन बाजार में होने की शिकायत मिली थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और अपने स्तर पर इस फैक्टरी का पता लगाने का प्रयास जो कॉपी राइट और ट्रेड मार्का एक्ट की अवहेलना कर अपना प्रोडक्ट बाजार में बेच रही है। अमित अग्रवाल ने बताया कि तीन माह तक लगातार प्रयास करने के बाद उन्हें पता चला कि यह फैक्टरी दादरी शहर में है और प्रशासन के नाक नीचे नियमों की उल्लंघना कर रिहायशी इलाके में चलाई जा रही है। वहीं, याची पक्ष के वकील अमित तोमर ने बताया कि करीब तीन माह हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी और कोर्ट ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में छापमारी के आदेश दिए थे।
दोपहर करीब 12 बजे टीम गांधी नगर में पूर्व विधायक राजदीप फौगाट के आवास से कुछ दूरी पर घर में चल रही फैक्टरी पर पहुंची। टीम में ड्यूटी मजिस्ट्रेट एलसी चंद्रमुकेश सांगवान के अलावा पुलिस कर्मचारी भी शामिल किया गया। टीम करीब एक घंटा तक यहां रुकी और इस दौरान यहां मिले माल और पैकिंग रेपर के बंडलों को सील किया गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेड ने सुपरदारी के बाद ही सामान को छोड़ा और फैक्टरी संचालक गौरव अग्रवाल से लिखित में लिया गया कि कोर्ट के आदेश होने पर वो ये माल पेश कर देंगे। करीब एक बजे टीम यहां से रवाना हो गई।
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दो मशीनें और नमकीन बनाने का सामान भी मिला टीम को
कंपनी के अधिकृत अधिकारी अमित अग्रवाल ने बताया कि घर में चल रही फैक्टरी में दो मशीनें और नमकीन बनाने का सामान भी मिला है। उन्होंने बताया कि दिवाली की छुट्टियों पर लेबर जाने के चलते ज्यादा स्टॉक यहां नहीं पाया गया। उन्होंने बताया कि पैक किए गए नमकीन के 760 पैकेट के अलावा 576 किलोग्राम पैकिंग रेपर बंडल मिले हैं। यहां मिले सामान की कीमत एक लाख से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि यहां तैयार हो रही नमकीन के पाउच पर रंग और डिजाइन उनकी कंपनी जैसा है।
84 करोड़ का टर्नओवर है परी कंपनी का
याची पक्ष के वकील मोहित तोमर ने बताया कि वीके सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी परी नाम से नमकीन तैयार करती है। इसका सालाना टर्नओवर करीब 84 करोड़ रुपये का है। उन्होंने बताया कि तीन माह पहले भिवानी से एक शिकायत आई थी कि परी नमकीन खाकर एक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई है। जब उन्होंने रेपर मंगवाया तो यह हुबहू उनकी कंपनी से मिलता-जुलता था। इसमें परी के उपर बिना कॉपी राइट लिए सोन लिखा गया था लेकिन यह भी कॉपी राइट और ट्रेड मार्का एक्ट की अवहेलना है। तीन माह बाद पता चल पाया कि यह फैक्टरी दादरी में चल रही है।
हमने नहीं की नियमों की अवहेलना : फैक्टरी संचालक
फैक्टरी संचालक गौरव अग्रवाल ने बताया कि उन्हें किसी भी नियम की अवहेलना नहीं की है। उनके पाउच का न तो नाम मिलता है और न ही कलर। यह छापामारी कोर्ट के आदेशों पर की गई है तो वो भी कानूनी लड़ाई लडे़ंगेे। फैक्टरी की अनुमति लेने के लिए उन्होंने आवेदन किया हुआ है।
कोर्ट के आदेश पर मुझे ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। कॉपी राइट और ट्रेड मार्क एक्ट की उल्लंघना की याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्ट ने छापामारी के आदेश दिए थे। यहां से बरामद सामान सुपरदारी पर ही छोड़ा गया है।
चंद्रमुकेश सांगवान, ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं लोअर कमिश्नर
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वीके होम सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा अधिकृत अधिकारी अमित अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी परी नाम से नमकीन बनाती है। उन्हें उनके कॉपी राइट और ट्रेड मार्क पर एक और नमकीन बाजार में होने की शिकायत मिली थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और अपने स्तर पर इस फैक्टरी का पता लगाने का प्रयास जो कॉपी राइट और ट्रेड मार्का एक्ट की अवहेलना कर अपना प्रोडक्ट बाजार में बेच रही है। अमित अग्रवाल ने बताया कि तीन माह तक लगातार प्रयास करने के बाद उन्हें पता चला कि यह फैक्टरी दादरी शहर में है और प्रशासन के नाक नीचे नियमों की उल्लंघना कर रिहायशी इलाके में चलाई जा रही है। वहीं, याची पक्ष के वकील अमित तोमर ने बताया कि करीब तीन माह हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी और कोर्ट ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में छापमारी के आदेश दिए थे।
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दोपहर करीब 12 बजे टीम गांधी नगर में पूर्व विधायक राजदीप फौगाट के आवास से कुछ दूरी पर घर में चल रही फैक्टरी पर पहुंची। टीम में ड्यूटी मजिस्ट्रेट एलसी चंद्रमुकेश सांगवान के अलावा पुलिस कर्मचारी भी शामिल किया गया। टीम करीब एक घंटा तक यहां रुकी और इस दौरान यहां मिले माल और पैकिंग रेपर के बंडलों को सील किया गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेड ने सुपरदारी के बाद ही सामान को छोड़ा और फैक्टरी संचालक गौरव अग्रवाल से लिखित में लिया गया कि कोर्ट के आदेश होने पर वो ये माल पेश कर देंगे। करीब एक बजे टीम यहां से रवाना हो गई।
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दो मशीनें और नमकीन बनाने का सामान भी मिला टीम को
कंपनी के अधिकृत अधिकारी अमित अग्रवाल ने बताया कि घर में चल रही फैक्टरी में दो मशीनें और नमकीन बनाने का सामान भी मिला है। उन्होंने बताया कि दिवाली की छुट्टियों पर लेबर जाने के चलते ज्यादा स्टॉक यहां नहीं पाया गया। उन्होंने बताया कि पैक किए गए नमकीन के 760 पैकेट के अलावा 576 किलोग्राम पैकिंग रेपर बंडल मिले हैं। यहां मिले सामान की कीमत एक लाख से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि यहां तैयार हो रही नमकीन के पाउच पर रंग और डिजाइन उनकी कंपनी जैसा है।
84 करोड़ का टर्नओवर है परी कंपनी का
याची पक्ष के वकील मोहित तोमर ने बताया कि वीके सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी परी नाम से नमकीन तैयार करती है। इसका सालाना टर्नओवर करीब 84 करोड़ रुपये का है। उन्होंने बताया कि तीन माह पहले भिवानी से एक शिकायत आई थी कि परी नमकीन खाकर एक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई है। जब उन्होंने रेपर मंगवाया तो यह हुबहू उनकी कंपनी से मिलता-जुलता था। इसमें परी के उपर बिना कॉपी राइट लिए सोन लिखा गया था लेकिन यह भी कॉपी राइट और ट्रेड मार्का एक्ट की अवहेलना है। तीन माह बाद पता चल पाया कि यह फैक्टरी दादरी में चल रही है।
हमने नहीं की नियमों की अवहेलना : फैक्टरी संचालक
फैक्टरी संचालक गौरव अग्रवाल ने बताया कि उन्हें किसी भी नियम की अवहेलना नहीं की है। उनके पाउच का न तो नाम मिलता है और न ही कलर। यह छापामारी कोर्ट के आदेशों पर की गई है तो वो भी कानूनी लड़ाई लडे़ंगेे। फैक्टरी की अनुमति लेने के लिए उन्होंने आवेदन किया हुआ है।
कोर्ट के आदेश पर मुझे ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। कॉपी राइट और ट्रेड मार्क एक्ट की उल्लंघना की याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्ट ने छापामारी के आदेश दिए थे। यहां से बरामद सामान सुपरदारी पर ही छोड़ा गया है।
चंद्रमुकेश सांगवान, ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं लोअर कमिश्नर

कंपनी के अधिकृत्त अधिकारी के सामने हाथ जोड़ता बुजुर्ग।- फोटो : CharkhiDadri