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120 राजकीय स्कूलों में लाइब्रेरी खोलने की योजना ठंडे बस्ते में
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रावलधी गांव स्थित शहीद राजकुमार राजकीय उच्च विद्यालय का मुख्य द्वार।
- फोटो : CharkhiDadri
जिले के सरकारी ‘विद्यालयों का पुस्तकालय’ योजना बीते 11 माह से ठंडे बस्ते में पड़ी हुई हैं। नए शैक्षिक सत्र से अप्रैल में पुस्तकालय सुविधा मिलने की छात्रों और शिक्षकों को उम्मीद है।
राजकीय हाई और सीनियर सेकंडरी स्कूलों में पुस्तकालय भवन निर्माण की प्रोजेक्ट फाइल 11 माह से मुख्यालय में धूल फांक रही है। जिला में 360 राजकीय स्कूल हैं। शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत सभी स्कूलों में पुस्तकालय खोलने का प्रावधान है। इसके अनुसार ही जिला शिक्षा विभाग ने यह प्रोजेक्ट तैयार कर हेड ऑफिस भेजा था। पुस्तकालय को किसी भी स्कूल व कॉलेज में ज्ञान का भंडार एवं रीढ़ माना जाता है। जिले में 120 राजकीय हाई और सीनियर सेकंडरी स्कूल हैं जहां पुस्तकालय की सुविधा नहीं है।
11 साल पहले लागू हुआ था शिक्षा अधिकारी अधिनियम
सरकार की ओर से 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया था इसे एक अप्रैल 2010 से लागू किया गया था। इस प्रावधान के तहत सभी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सभी स्कूलों में 30:1 के अनुपात में शिक्षकों का होना जरूरी है। इसी प्रकार स्कूल में लाइब्रेरी, खेल मैदान, सभी विषयों की लैब, पर्याप्त भवन का होना जरूरी है ताकि बच्चों को शिक्षण करने व शिक्षकों को शिक्षण करवाने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए।
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स्कूलों में पुस्तकालय भवन तक नहीं
इस समय राजकीय स्कूलों में पुस्तकालय भवन नहीं हैं। हर साल पाठ्यक्रम की जो पुस्तकें सरकार की ओर से भेजी जाती हैं उनको एक कमरे में रखा जाता है और एक शिक्षक को इनकी संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है लेकिन इन पुस्तकों में संदर्भ पुस्तकें, महापुरूषों की जीवनी, अध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक ज्ञान विकास, मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें नहीं होती हैं और बच्चे केवल स्कूली पाठयक्रम तक ही सीमित रह जाते हैं।
पुस्तकालयध्यक्ष के पद भी करने होंगे सृजित
जिले के तीनों ब्लॉकों में करीब 360 राजकीय स्कूल हैं जिनमें हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या करीब 120 है। फिलहाल स्कूलों में बच्चों व शिक्षकों को पुस्तकालय की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सभी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में लाइब्रेरी भवन बनाए जाने हैं। इसके साथ पुस्तकालयध्यक्ष के पद सृजित करने की भी जरूरत पड़ेगी।
स्कूलों में लाइब्रेरी बेहद जरूरी है। सरकार को नए शिक्षा सत्र से लाइब्रेरी की सुविधा शुरू कर देनी चाहिए। शिक्षा एक्ट 2099 में लाइब्रेरी खोले जाने का प्रावधान है और लाइब्रेरी से ही बालक का संपूर्ण विकास संभव है।
कृष्ण शास्त्री, अध्यापक संघ ब्लॉक प्रधान।
स्कूलों में पुस्तकालय भवन निर्माण के लिए प्रोजेक्ट फाइल हेड ऑफिस भेज रखी है। जैसे ही फाइल को मंजूरी मिल जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। नए शिक्षा सत्र से पुस्तकालय की कमी दूर होने की उम्मीद है।
-जयवीर सिंह, एसडीओ, तकनीकी शाखा, शिक्षा विभाग।
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राजकीय हाई और सीनियर सेकंडरी स्कूलों में पुस्तकालय भवन निर्माण की प्रोजेक्ट फाइल 11 माह से मुख्यालय में धूल फांक रही है। जिला में 360 राजकीय स्कूल हैं। शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत सभी स्कूलों में पुस्तकालय खोलने का प्रावधान है। इसके अनुसार ही जिला शिक्षा विभाग ने यह प्रोजेक्ट तैयार कर हेड ऑफिस भेजा था। पुस्तकालय को किसी भी स्कूल व कॉलेज में ज्ञान का भंडार एवं रीढ़ माना जाता है। जिले में 120 राजकीय हाई और सीनियर सेकंडरी स्कूल हैं जहां पुस्तकालय की सुविधा नहीं है।
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11 साल पहले लागू हुआ था शिक्षा अधिकारी अधिनियम
सरकार की ओर से 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया था इसे एक अप्रैल 2010 से लागू किया गया था। इस प्रावधान के तहत सभी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सभी स्कूलों में 30:1 के अनुपात में शिक्षकों का होना जरूरी है। इसी प्रकार स्कूल में लाइब्रेरी, खेल मैदान, सभी विषयों की लैब, पर्याप्त भवन का होना जरूरी है ताकि बच्चों को शिक्षण करने व शिक्षकों को शिक्षण करवाने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए।
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स्कूलों में पुस्तकालय भवन तक नहीं
इस समय राजकीय स्कूलों में पुस्तकालय भवन नहीं हैं। हर साल पाठ्यक्रम की जो पुस्तकें सरकार की ओर से भेजी जाती हैं उनको एक कमरे में रखा जाता है और एक शिक्षक को इनकी संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है लेकिन इन पुस्तकों में संदर्भ पुस्तकें, महापुरूषों की जीवनी, अध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक ज्ञान विकास, मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें नहीं होती हैं और बच्चे केवल स्कूली पाठयक्रम तक ही सीमित रह जाते हैं।
पुस्तकालयध्यक्ष के पद भी करने होंगे सृजित
जिले के तीनों ब्लॉकों में करीब 360 राजकीय स्कूल हैं जिनमें हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या करीब 120 है। फिलहाल स्कूलों में बच्चों व शिक्षकों को पुस्तकालय की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सभी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में लाइब्रेरी भवन बनाए जाने हैं। इसके साथ पुस्तकालयध्यक्ष के पद सृजित करने की भी जरूरत पड़ेगी।
स्कूलों में लाइब्रेरी बेहद जरूरी है। सरकार को नए शिक्षा सत्र से लाइब्रेरी की सुविधा शुरू कर देनी चाहिए। शिक्षा एक्ट 2099 में लाइब्रेरी खोले जाने का प्रावधान है और लाइब्रेरी से ही बालक का संपूर्ण विकास संभव है।
कृष्ण शास्त्री, अध्यापक संघ ब्लॉक प्रधान।
स्कूलों में पुस्तकालय भवन निर्माण के लिए प्रोजेक्ट फाइल हेड ऑफिस भेज रखी है। जैसे ही फाइल को मंजूरी मिल जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। नए शिक्षा सत्र से पुस्तकालय की कमी दूर होने की उम्मीद है।
-जयवीर सिंह, एसडीओ, तकनीकी शाखा, शिक्षा विभाग।