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सीवर और पेयजल व्यवस्था में सुधारीकरण का प्रोजेक्ट सरकार ने रोका
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शहरवासियों को अभी सीवर और पेयजल समस्या का दंश और झेलना पड़ेगा। सीवर और पेयजल से संबंधित पांच करोड़ के प्रोजेक्ट को फिलहाल सरकार ने रोकने के आदेश दिए हैं। पिछले नौ माह से विभाग को ग्रांट का इंतजार था, लेकिन सरकार ने ऐसा करने की बजाय प्रोजेक्ट को लंबित रखा है। फिलहाल अधिकारी ये नहीं बता पा रहे है कि यह प्रोजेक्ट अब कब तक परवान चढ़ेगा। दूसरी ओर लचर सीवर व्यवस्था के चलते शहर की 80 हजार की आबादी को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
दस माह पहले पार्षदों ने विधायक सोमबीर सांगवान के सामने करीब सीवर और पेयजल संबंधी समस्याएं रखी थीं। इसके बाद विधायक ने व्यवस्था में सुधार के लिए पांच करोड़ की ग्रांट देने की घोषणा की थी। विधायक की घोषणा के बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने प्रपोजल तैयार किया था। फरवरी से ही प्रोजेक्ट के लिए बजट जारी होने का इंतजार है। जस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल बजट तो जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रोजेक्ट को अभी रोकने के आदेश जरूर मिले हैं। ऐसे में शहरवासियों को सीवर ओर पेयजल समस्याओं से निजात मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है। शहर की 45 साल पुरानी सीवर व्यवस्था समय-समय पर लोगों को परेशान कर रही है। लचर सीवर व्यवस्था में सुधार के लिए मास्टर प्लान के तहत पांच करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था।
पुरानी सीवर लाइनों से हो रही ज्यादा दिक्कतें
पिछले दिनों शहर में 13 सौ मीटर लंबी सीवर की नई लाइन भी बिछाई गई है, लेकिन इससे भी सुधार नहीं आ रहा है। पुरानी सीवर लाइनें ज्यादा दिक्कत खड़ी कर रही हैं। सीवर लाइनों का नए सिरे से मास्टर प्लान तैयार कर स्थायी समाधान करने की जरूरत है। शहर के दोनों एसटीएम वर्किंग में नहीं हैं। शहर से नियमित रूप से दूषित पानी का उठान नहीं हो रहा है इस वजह से लाइनें ब्लॉक बनी रहती हैं। जेटिंग और सुपर सकर मशीन से भी लाइनें नहीं खुल पा रही हैं।
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पार्षदों के धरने भी नहीं लाए रंग
सीवर व्यवस्था से तंग आकर नगर के पार्षदों ने पिछले साल धरना भी दिया था। उसके बाद सीवर सफाई का काम शुरू कर दिया था, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही हालात हो गए थे। शहर में सीवर की पुरानी लाइनों को बदलने की दरकार है। वहीं, 2018 में भी पार्षदों ने सीवर और पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए धरना दिया था, लेकिन नतीजा शून्य है। शहर में 35 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनें बिछी हुई हैं, जिनका ठीक प्रकार से रखरखाव करना विभाग के लिए मुश्किल बना हुआ है।
सरकार की ओर से प्रोजेक्ट को पेंडिंग में डालने संबंधी पत्र आ चुका है। विभाग ने इस प्रोजेक्ट को रोक दिया है। शहर में मशीन से नियमित रूप से सीवर की सफाई का काम जारी है। सीवर लाइनेें ब्लॉक नहीं होने दिया जाएगा।
शशिकांत, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
सीवर और पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए मैंने पांच करोड़ की ग्रांट देने की घोषणा की थी। इस संबंध में मैं विभागीय अधिकारियों से अपडेट लूंगा और जल्द ही ग्रांट जारी करवाने का प्रयास करूंगा।
सोमबीर सांगवान, विधायक, दादरी
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दस माह पहले पार्षदों ने विधायक सोमबीर सांगवान के सामने करीब सीवर और पेयजल संबंधी समस्याएं रखी थीं। इसके बाद विधायक ने व्यवस्था में सुधार के लिए पांच करोड़ की ग्रांट देने की घोषणा की थी। विधायक की घोषणा के बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने प्रपोजल तैयार किया था। फरवरी से ही प्रोजेक्ट के लिए बजट जारी होने का इंतजार है। जस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल बजट तो जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रोजेक्ट को अभी रोकने के आदेश जरूर मिले हैं। ऐसे में शहरवासियों को सीवर ओर पेयजल समस्याओं से निजात मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है। शहर की 45 साल पुरानी सीवर व्यवस्था समय-समय पर लोगों को परेशान कर रही है। लचर सीवर व्यवस्था में सुधार के लिए मास्टर प्लान के तहत पांच करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था।
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पुरानी सीवर लाइनों से हो रही ज्यादा दिक्कतें
पिछले दिनों शहर में 13 सौ मीटर लंबी सीवर की नई लाइन भी बिछाई गई है, लेकिन इससे भी सुधार नहीं आ रहा है। पुरानी सीवर लाइनें ज्यादा दिक्कत खड़ी कर रही हैं। सीवर लाइनों का नए सिरे से मास्टर प्लान तैयार कर स्थायी समाधान करने की जरूरत है। शहर के दोनों एसटीएम वर्किंग में नहीं हैं। शहर से नियमित रूप से दूषित पानी का उठान नहीं हो रहा है इस वजह से लाइनें ब्लॉक बनी रहती हैं। जेटिंग और सुपर सकर मशीन से भी लाइनें नहीं खुल पा रही हैं।
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पार्षदों के धरने भी नहीं लाए रंग
सीवर व्यवस्था से तंग आकर नगर के पार्षदों ने पिछले साल धरना भी दिया था। उसके बाद सीवर सफाई का काम शुरू कर दिया था, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही हालात हो गए थे। शहर में सीवर की पुरानी लाइनों को बदलने की दरकार है। वहीं, 2018 में भी पार्षदों ने सीवर और पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए धरना दिया था, लेकिन नतीजा शून्य है। शहर में 35 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनें बिछी हुई हैं, जिनका ठीक प्रकार से रखरखाव करना विभाग के लिए मुश्किल बना हुआ है।
सरकार की ओर से प्रोजेक्ट को पेंडिंग में डालने संबंधी पत्र आ चुका है। विभाग ने इस प्रोजेक्ट को रोक दिया है। शहर में मशीन से नियमित रूप से सीवर की सफाई का काम जारी है। सीवर लाइनेें ब्लॉक नहीं होने दिया जाएगा।
शशिकांत, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
सीवर और पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए मैंने पांच करोड़ की ग्रांट देने की घोषणा की थी। इस संबंध में मैं विभागीय अधिकारियों से अपडेट लूंगा और जल्द ही ग्रांट जारी करवाने का प्रयास करूंगा।
सोमबीर सांगवान, विधायक, दादरी