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Charkhi Dadri News: स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद को जेल में सहनी पड़ी थीं अमानवीय यातनाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Aug 2023 12:05 AM IST
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Freedom fighter Nanakchand had to face inhuman tortures in jail
संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। गांव फतेहगढ़ निवासी स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद को जेल में अमानवीय यातनाएं सहनी पड़ी थीं। जेल की कोठरी में बोरी में लपेटकर शरीर पर ठंडा पानी डाला जाता था और भूखा-प्यास होने पर घास उबालकर खाते थे। कई दिनों तक भूखा-प्यास रहकर भी नानकचंद ने अंग्रेजों के जुल्मों का डटकर मुकाबला दिया।
स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद को धजा जेल में यातनाएं दी गईं लेकिन बावजूद इसके वो अंग्रेजी शासन के आगे झुके नहीं। आजाद हिंद फौज में रहते हुए ब्रिटिश हुकूमत के समक्ष अपने पराक्रम का उन्होंने लोहा मनवाया। आजादी के बाद भारत सरकार की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया। नानकचंद का जन्म तीन जनवरी 1922 को हुआ था। 18 वर्ष की आयु में वे सेना में भर्ती हो गए थे। बाद में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आह्वान पर आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। नेताजी की फौज में वे गुरिल्ला रेजिमेंट में तैनात किए गए।
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- यहां लड़ी थी लड़ाई
नानकचंद ने सिंगापुर, रंगून, इम्फाल, टिडमरोड़ में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। उन्हें जेल में सड़ा एवं बासी भोजन खिलाया जाता था। कई बार 12 से 15 मील दूर पैदल चलना पड़ता था।
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- 18 मार्च 1946 को हुई थी रिहाई
18 मार्च 1946 को नानकचंद की जेल से रिहाई हुई। जेल से रिहा होने के बाद घर लौट आए और इसके बाद में आठ मार्च 1952 को रेलवे सुरक्षा बल में भर्ती होकर देश सेवा की। नानकचंद को तत्कालीन राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के हाथों सम्मान मिला। भारत सरकार ने उन्हें ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया था। नानकचंद के बेटे सुरेंद्र सिंह ने बताया कि दो मार्च 1994 को उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था। राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। उनको संतान के रूप में एक बेटा है।
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