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मिसरि गांव के हर घर से निकलते हैं फौजी
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चरखी दादरी।
दादरी-रोहतक रोड स्थित मिसरी गांव ने देशसेवा की मिसाल पेश की है। मौजूदा समय में गांव के 2800 युवा विभिन्न फोर्सेज में भर्ती होकर देश सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा गांव में पूर्व सैनिकों की संख्या करीब 2100 है। मिसरी गांव ने आठ स्वतंत्रता सेनानी भी देश को दिए हैं और इसके अलावा यहां के दो जाबांज शहादत दे चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि मिसरी की माटी में देश सेवा की महक रमी हुई है।
दस हजार की आबादी वाले मिसरी गांव का सेना में योगदान अतुल्य है। अब तक यह गांव करीब पांच हजार सैनिक देश को दे चुका है। इस गांव के जाबांजों ने न केवल कारगिल युद्ध में देश दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं, बल्कि श्रीनगर में हुई मुठभेड़ में आतंकियों को ढेर भी किया है। फिलहाल इस गांव के सबसे अधिक जवान आरटी तोपखाना रेजीमेंट में तैनात हैं।
मिसरी में 1300 घर हैं जबकि साक्षरता दर 99 प्रतिशत है। यहां एक हजार लड़कों पर 952 लड़कियां हैं। गांव के ज्यादातर युवा बारहवीं के बाद ही सेना में भर्ती हो जाते हैं। देशसेवा का इस गांव में जज्बा इतना है कि एक घर में दो-दो सैनिक तक हैं। गांव के युवा सुविधाओं के अभाव में अपने स्तर पर तैयारी कर सेना में भर्ती होते हैं। मिसरी ने देश को आठ स्वतंत्रता सेनानी और दो शहीद दिए हैं।
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- ये हैं गांव के आठ स्वतंत्रता सेनानी
मिसरी निवासी रामचंद्र पुत्र निहाल सिंह, प्रभुराम, मोहर सिंह, हरि सिंह, रामचंद्र, सदाराम, होशियार सिंह व सुल्तान सिंह ने स्वतंत्रता की लड़ाई में अपना योगदान दिया था। स्वतंत्रता सेनानी प्रभुराम आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाषचंद्र बोस की गाड़ी चलाते थे।
- कारगिल युद्ध में भी गांव का योगदान
वैसे तो मिसरी के जाबांज अपने कार्यस्थल पर देश सेवा करते हुए समय-समय पर घुसपठियों को सबक सीखते रहते हैं, लेकिन इस गांव का कारगिल युद्ध में भी योगदान है। गांव निवासी हवलदार रामकिशन कारगिल युद्ध मे शहीद हुए थे। उनके अलावा गांव निवासी जाबांज शैलेंद्र एयर क्राफ्ट हादसे में शहीद हुए थे।
जानिए.... किस रेजीमेंट और फोर्स में कितने हैं जवान
रेजीमेंट - जवानों की संख्या
आरटी तोपखाना-1600
म्हार कुमाउन- 250
आर्म्ड- 200
सिंगल कोर- 50
नेवी-350
एयरफोर्स-50
एएमसी- 50
हरियाणा/चंडीगढ़/दिल्ली पुलिस- 300
इन परिवारों की चौथी पीढ़ी अब सेना में
मिसरी में दो परिवार ऐसे हैं जिनकी चौथी पीढ़ी सेना में है। इनमें से एक परिवार रामजीवन का है। रामजीवन के अलावा उनका बेटा रणधीर सेना में था। रणधीर का बेटा जगबीर भी सैनिक रहा और अब उनका बेटा संदीप सैनिक है। वहीं, दूसरा परिवार रघुनाथ का है। रघुनाथ के अलावा उनका बेटा कंवर सिंह, पौत्र रमेश और अब परपौत्री श्रवणता सेना में है।
- खेल स्टेडियम में सुविधाओं की खल रही कमी
गांव के युवा देश सेवा के जज्बे से लबरेज हैं। सेना में जाकर देश सेवा करने की सीख उन्हें अपने बुजुर्गों से मिली है। हालांकि गांव के स्टेडियम में सुविधाएं न के बराबर हैं। यहां खेल स्टेडियम के नाम पर महज चहारदीवारी ही है जबकि दौड़ के अभ्यास के लिए यहां ट्रैक नहीं है। ऐसे में युवा तारकोल की सड़कों पर दौड़कर अभ्यास करने को विवश हैं।
मौजिज लोग बोले: गांव के युवाओं को विरासत में मिला है देश सेवा का जज्बा
हमारे गांव की आबादी करीब दस हजार है जबकि मौजूदा सैनिकों की संख्या 2800 है। गांव देश को 2100 पूर्व सैनिक और आठ स्वतंत्रता सेनानी दे चुका है। हमारे गांव के दो जाबांज शहीद भी हुए हैं। हर घर में दो से तीन सदस्य सेना में हैं।
अनीता रानी, निवर्तमान सरपंच, मिसरी
- देश सेवा का जज्बा हमारे युवाओं को विरासत में मिला है। गांव के हर घर ने देश को सैनिक दिए हैं। तीनों फोर्सेज में गांव के युवा अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मिसरी देश को स्वतंत्रता सेनानी भी दे चुका है। ज्यादातर युवाओं का रुझान सेना की ओर है।
राजपाल यादव, पूर्व सरपंच, मिसरी
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दादरी-रोहतक रोड स्थित मिसरी गांव ने देशसेवा की मिसाल पेश की है। मौजूदा समय में गांव के 2800 युवा विभिन्न फोर्सेज में भर्ती होकर देश सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा गांव में पूर्व सैनिकों की संख्या करीब 2100 है। मिसरी गांव ने आठ स्वतंत्रता सेनानी भी देश को दिए हैं और इसके अलावा यहां के दो जाबांज शहादत दे चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि मिसरी की माटी में देश सेवा की महक रमी हुई है।
दस हजार की आबादी वाले मिसरी गांव का सेना में योगदान अतुल्य है। अब तक यह गांव करीब पांच हजार सैनिक देश को दे चुका है। इस गांव के जाबांजों ने न केवल कारगिल युद्ध में देश दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं, बल्कि श्रीनगर में हुई मुठभेड़ में आतंकियों को ढेर भी किया है। फिलहाल इस गांव के सबसे अधिक जवान आरटी तोपखाना रेजीमेंट में तैनात हैं।
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मिसरी में 1300 घर हैं जबकि साक्षरता दर 99 प्रतिशत है। यहां एक हजार लड़कों पर 952 लड़कियां हैं। गांव के ज्यादातर युवा बारहवीं के बाद ही सेना में भर्ती हो जाते हैं। देशसेवा का इस गांव में जज्बा इतना है कि एक घर में दो-दो सैनिक तक हैं। गांव के युवा सुविधाओं के अभाव में अपने स्तर पर तैयारी कर सेना में भर्ती होते हैं। मिसरी ने देश को आठ स्वतंत्रता सेनानी और दो शहीद दिए हैं।
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- ये हैं गांव के आठ स्वतंत्रता सेनानी
मिसरी निवासी रामचंद्र पुत्र निहाल सिंह, प्रभुराम, मोहर सिंह, हरि सिंह, रामचंद्र, सदाराम, होशियार सिंह व सुल्तान सिंह ने स्वतंत्रता की लड़ाई में अपना योगदान दिया था। स्वतंत्रता सेनानी प्रभुराम आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाषचंद्र बोस की गाड़ी चलाते थे।
- कारगिल युद्ध में भी गांव का योगदान
वैसे तो मिसरी के जाबांज अपने कार्यस्थल पर देश सेवा करते हुए समय-समय पर घुसपठियों को सबक सीखते रहते हैं, लेकिन इस गांव का कारगिल युद्ध में भी योगदान है। गांव निवासी हवलदार रामकिशन कारगिल युद्ध मे शहीद हुए थे। उनके अलावा गांव निवासी जाबांज शैलेंद्र एयर क्राफ्ट हादसे में शहीद हुए थे।
जानिए.... किस रेजीमेंट और फोर्स में कितने हैं जवान
रेजीमेंट - जवानों की संख्या
आरटी तोपखाना-1600
म्हार कुमाउन- 250
आर्म्ड- 200
सिंगल कोर- 50
नेवी-350
एयरफोर्स-50
एएमसी- 50
हरियाणा/चंडीगढ़/दिल्ली पुलिस- 300
इन परिवारों की चौथी पीढ़ी अब सेना में
मिसरी में दो परिवार ऐसे हैं जिनकी चौथी पीढ़ी सेना में है। इनमें से एक परिवार रामजीवन का है। रामजीवन के अलावा उनका बेटा रणधीर सेना में था। रणधीर का बेटा जगबीर भी सैनिक रहा और अब उनका बेटा संदीप सैनिक है। वहीं, दूसरा परिवार रघुनाथ का है। रघुनाथ के अलावा उनका बेटा कंवर सिंह, पौत्र रमेश और अब परपौत्री श्रवणता सेना में है।
- खेल स्टेडियम में सुविधाओं की खल रही कमी
गांव के युवा देश सेवा के जज्बे से लबरेज हैं। सेना में जाकर देश सेवा करने की सीख उन्हें अपने बुजुर्गों से मिली है। हालांकि गांव के स्टेडियम में सुविधाएं न के बराबर हैं। यहां खेल स्टेडियम के नाम पर महज चहारदीवारी ही है जबकि दौड़ के अभ्यास के लिए यहां ट्रैक नहीं है। ऐसे में युवा तारकोल की सड़कों पर दौड़कर अभ्यास करने को विवश हैं।
मौजिज लोग बोले: गांव के युवाओं को विरासत में मिला है देश सेवा का जज्बा
हमारे गांव की आबादी करीब दस हजार है जबकि मौजूदा सैनिकों की संख्या 2800 है। गांव देश को 2100 पूर्व सैनिक और आठ स्वतंत्रता सेनानी दे चुका है। हमारे गांव के दो जाबांज शहीद भी हुए हैं। हर घर में दो से तीन सदस्य सेना में हैं।
अनीता रानी, निवर्तमान सरपंच, मिसरी
- देश सेवा का जज्बा हमारे युवाओं को विरासत में मिला है। गांव के हर घर ने देश को सैनिक दिए हैं। तीनों फोर्सेज में गांव के युवा अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मिसरी देश को स्वतंत्रता सेनानी भी दे चुका है। ज्यादातर युवाओं का रुझान सेना की ओर है।
राजपाल यादव, पूर्व सरपंच, मिसरी