{"_id":"67118a7793e5ac2f2a0c0134","slug":"farmers-should-sow-mustard-only-when-the-temperature-is-around-30-degrees-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1001-124891-2024-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: तापमान 30 डिग्री के आसपास होने पर ही किसान करें सरसों की बिजाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: तापमान 30 डिग्री के आसपास होने पर ही किसान करें सरसों की बिजाई
Fri, 18 Oct 2024 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 18 Oct 2024 03:36 AM IST
विज्ञापन
चरखी दादरी। जब अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास आ जाए, तभी किसान सरसों की बिजाई का कार्य करें। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो ज्यादा तापमान में सरसों के पौधे अंकुरित होते ही नष्ट होने लगते हैं जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ जाता है। इस बार जिला में सरसों की बिजाई करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होने का अनुमान है।
बता दें कि पिछले पांच साल से किसानों का सरसों की बिजाई के प्रति रुझान ज्यादा बढ़ा है। सरसों किसानों की नकदी फसल मानी जाती है। सरसों में ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं होती है। तराई वाले क्षेत्रों में तो एक सिंचाई में ही फसल पक जाती है। रेतीला क्षेत्र में सिंचाई ज्यादा करनी पड़ती है क्योंकि बालू रेत में नमी जल्दी सूखती है।
इस बार मानसून की पछेती बारिश होने की वजह से किसानों को सरसों की बिजाई करने में दिक्कत नहीं आ रही है। किसानों को सिंचाई यानी प्लाव करके बिजाई नहीं करनी पड़ती है। इससे किसानों को काफी फायदा हुआ है। सरसों की फसल पांच माह में पककर तैयार होती है। अब सरसों की बिजाई का सीजन शुरू हो चुका है।
विज्ञापन
- ज्यादा तापमान में धोलिया रोग का रहता है खतरा
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि 30 डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर धोलिया नामक रोग लग जाता है। इसके चलते कई बार किसान को दोबारा बिजाई करनी पड़ जाती है जिससे उसका लागत खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में अनुकूल तापमान में ही सरसों की बिजाई की जाए ताकि पौधे का ठीक प्रकार से विकास हो सके।
सरसों की बिजाई के लिए अधिकतम तापमान 30 डिग्री होना चाहिए। इससे ज्यादा तापमान में बिजाई करने पर पौधे के नष्ट के आसार ज्यादा बन जाते हैं। रोग भी लग जाते हैं।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी, चरखी दादरी
विज्ञापन
बता दें कि पिछले पांच साल से किसानों का सरसों की बिजाई के प्रति रुझान ज्यादा बढ़ा है। सरसों किसानों की नकदी फसल मानी जाती है। सरसों में ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं होती है। तराई वाले क्षेत्रों में तो एक सिंचाई में ही फसल पक जाती है। रेतीला क्षेत्र में सिंचाई ज्यादा करनी पड़ती है क्योंकि बालू रेत में नमी जल्दी सूखती है।
विज्ञापन
इस बार मानसून की पछेती बारिश होने की वजह से किसानों को सरसों की बिजाई करने में दिक्कत नहीं आ रही है। किसानों को सिंचाई यानी प्लाव करके बिजाई नहीं करनी पड़ती है। इससे किसानों को काफी फायदा हुआ है। सरसों की फसल पांच माह में पककर तैयार होती है। अब सरसों की बिजाई का सीजन शुरू हो चुका है।
विज्ञापन
- ज्यादा तापमान में धोलिया रोग का रहता है खतरा
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि 30 डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर धोलिया नामक रोग लग जाता है। इसके चलते कई बार किसान को दोबारा बिजाई करनी पड़ जाती है जिससे उसका लागत खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में अनुकूल तापमान में ही सरसों की बिजाई की जाए ताकि पौधे का ठीक प्रकार से विकास हो सके।
सरसों की बिजाई के लिए अधिकतम तापमान 30 डिग्री होना चाहिए। इससे ज्यादा तापमान में बिजाई करने पर पौधे के नष्ट के आसार ज्यादा बन जाते हैं। रोग भी लग जाते हैं।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी, चरखी दादरी