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Charkhi Dadri News: मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर बढ़े चरखी दादरी के किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 24 Mar 2024 04:25 AM IST
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Farmers increased on Meri Fasal-Mera Byora portal
चरखी दादरी। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल के प्रति किसानों में रुझान बढ़ रहा है। इस साल पोर्टल पर दर्ज किसानों की संख्या और फसलों का ब्योरा इसकी बानगी है। पिछले साल की तुलना में इस बार पोर्टल पर 8,000 अधिक किसानों ने पंजीकरण करवाया है जो करीब 12 प्रतिशत है।
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पोर्टल पर इस बार 2,46,167 एकड़ फसल पंजीकृत हुई है। यह रकबा 53,345 किसानों का है जबकि पिछले साल करीब 45,000 किसानों ने पोर्टल पर पंजीकरण करवाया था। पोर्टल पर जिले का कुल कृषि रकबा 2,73,081 एकड़ अपलोड है। ऐसे में 90 प्रतिशत किसानों ने फसल बिक्री के लिए इस बार अपना पंजीकरण करवाया है।
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सरकार हर साल एक अप्रैल से सरकारी खरीद शुरू करती है। जो किसान पोर्टल पर पंजीकरण करवाते हैं उनकी ही फसल खरीदी जाती है। इस बार भी सरकारी खरीद की जानी है। जिले में मौजूदा रबी फसल सीजन में किसानों ने सरसों, गेहूं, जौ, मेथी, बरसम, गन्ना, चना और सब्जियों की बिजाई की गई है। कई बार सरसों का सरकारी रेट से ज्यादा भाव खुले बाजार में मिल जाता है। किसान ऑयल मिल और अन्य प्रतिष्ठानों में खुले बाजार मेें भी सरसों की बिक्री करते हैं। इस समय भी सरसों का भाव 5,200 रुपये प्रति क्विंटल है। इस बार भी सरसों की पैदावार अधिक होने का अनुमान है।
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- ये है फसलों का बिजाई रकबा
सरसों की बिजाई का रकबा करीब 1,60,000 एकड़ है। जौ का रकबा भी करीब 1,500 एकड़ है। करीब 1,000 एकड़ में गन्ना की बिजाई हुई है। सब्जी, फूलों की खेती और बागवानी का रकबा भी बढ़ा है।

- तीन साल से बढ़ा सरसों के प्रति रुझान
सरसों का बिजित रकबा पिछले तीन साल से बढ़ा है क्योंकि सरसों का भाव वाजिब मिल रहा है। सरसों में प्रति एकड़ लागत खर्च भी कम आता है। रात्रि को लावारिस पशुओं की रखवाली की भी जरूरत नहीं है। सरसों की एक ही सिंचाई से काम चल जाता है जबकि गेहूं में चार से पांच सिंचाई करनी पड़ती है और किसान को 24 घंटे खेत की लावारिस पशुओं से सुरक्षा करनी पड़ती है।



- शेड्यूल बनाकर किसानों को जारी किए जाएंगे टोकन
हर साल पंजीकरण के बाद ही सरकार टोकन सिस्टम से सरकारी खरीद करती है। खरीद के बाद भुगतान राशि किसान के बैंक में पहुंचती है। जमीन का डाटा ऑनलाइन होने के बाद से बीजित फसल पटवारी आदि से सत्यापित करवाने की भी जरूरत नहीं है। पूरा डाटा पोर्टल पर फैमिली आईडी से जोड़ा गया है। जमीन का डाटा ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध है। जिन किसानों ने पोर्टल पर पंजीकरण करवाया है उनकी उपज ही खरीदी जाएगी।



मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल की अंतिम तिथि 15 मार्च के बाद जिला में 2,46,167 एकड़ फसल पोर्टल पर पंजीकृत हुई है। यह रकबा 53,345 किसानों का है। पिछले साल की तुलना मेंं आठ हजार किसान ज्यादा हैं। ऐसे में 90 प्रतिशत किसानों ने फसल बिक्री के लिए अपना पंजीकरण करवाया है। - विनय कुमार, आंकड़ा विशेषज्ञ, कृषि विभाग, चरखी दादरी।
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