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चरखी दादरी: गेहूं में ब्लैक समट रोग के प्रति सचेत रहे किसान

Sun, 19 Feb 2023 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sun, 19 Feb 2023 11:43 PM IST
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Farmers aware of black spot disease in wheat
चरखी दादरी के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल। संवाद
चरखी दादरी। रबी की प्रमुख गेहूं की फसल में बालियां काले रंग की होने पर इनको प्लास्टिक की थैली लेकर तोड़े और खेत से बाहर गड्ढे में दबा दें। कृषि वैज्ञानिक इसे ब्लैक समट रोग मानते हैं। इस रोग के प्रति किसानों को अभी से सचेत रहने की सख्त जरूरत है। यह रोग धीरे-धीरे पूरे फसल में फैल जाता है। काले रंग की बाली में बना चूर्ण जब दूसरे पौधे पर गिर जाता है तो उस पौधे की बाली भी काले रंग की हो जाती है और पूरी तरह से खत्म हो जाती है।
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इस समय गेहूं के पौधों को बाली आने लगी हैं। गेहूं को प्रदेश की प्रमुख फसल माना जाता है। किसानों ने मौजूदा रबी सीजन के दौरान गत नवंबर माह में समय पर ही गेहूं की बिजाई कर दी थी। राज्य के सभी जिलों में गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। रेतीले भागों में गेहूं की औसत पैदावार कम होती है। रेतीले भागों में सिंचाई भी ज्यादा मात्रा में करनी पड़ती है। रेतीले क्षेत्र में सात से आठ सिंचाई करनी पड़ती हैं जबकि सामान्य रूप से पांच से छह सिंचाई ही पर्याप्त होती हैं। हालांकि इस बार बारिश होने पर किसानों को कम ही सिंचाई करनी पड़ी है। गत 15 से 17 जनवरी को पाला गिरने से गेहूं की फसल में इतना नुकसान नहीं हुआ था क्योंकि उस समय इसका पौधा युवा अवस्था में था। जनवरी माह में कड़ाके की ठंड पड़ी और गेहूं की फसल में फुटाव ठीक से हुआ। अब गेहूं में बाली आनी शुरू हो गए हैं।
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रोग से रहे सतर्क
जब गेहूं के पौधे पर बाली आने लगते हैं तो उममें ब्लैक समट रोग लगने के ज्यादा आशंका हो जाती है। इस रोग में बाली काले रंग की पड़ जाती है, इसमें दाना कतई नहीं बन पाता। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस रोग से बचाव के लिए यही तरीका है कि इस बाली को प्लास्टिक की थैली लेकर तोड़ दिया जाए। तोड़ते समय इसका चूर्ण खेत में बिखरने नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि इससे ऐसा होने पर दूसरे पौधे इस रोग की चपेट में आ जाएंगे। इस रोग से बचाव के लिए रैक्सिल दवा का इस्तेमाल होता है लेकिन यह बिजाई के समय बीज में ही मिलानी होती है।
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ब्लैक समट रोग की शुरूआत में ही इसे खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। थैली लेकर इस बाली को खेत से तोड़ लें और बाहर फेंक दें। इसका चूर्ण बिखरने न दें ताकि इससे दूसरे पौधों में नुकसान न होने पाए। किसान खेत की नियमित निगरानी रखें। ओस खत्म होने के बाद दोपहर बाद फसल का अवलोकन करें।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी
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