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बारिश के इंतजार में किसान: यूरिया खाद की मांग घटी, फसलों को सिंचाई की जरूरत

Sat, 18 Jul 2026 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 18 Jul 2026 11:47 PM IST
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Farmers await rain: Demand for urea fertilizer drops; crops need irrigation
खेतों में लगी धान की फसल। 
चरखी दादरी। गत कई दिनों से बारिश न होने की वजह से यूरिया खाद की मांग एवं खपत भी कम बनी हुई है। बारिश होने के बाद खेतों में नमी होने पर ही यूरिया खाद का छिड़काव किया जाता है। किसान बारिश के इंतजार में हैं। इस समय बाजरा, कपास व धान की फसलों में सिंचाई की जरूरत बनी हुई है। जिले में बाजरा का बीजित रकबा करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र है। जुलाई माह में आठ हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की जरूरत है। जिले में पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी लगातार कम होती जा रही है। इसका असर अब यूरिया खाद की मांग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। किसान फिलहाल बारिश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि पर्याप्त नमी के बिना यूरिया का छिड़काव करना लाभदायक नहीं माना जाता। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सूखी मिट्टी में यूरिया डालने से पौधों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता और खाद का बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है।
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फसलों को सिंचाई की जरूरत
जिले में इस समय बाजरा, कपास और धान की फसलें खेतों में खड़ी हैं। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान के कारण इन फसलों को सिंचाई की आवश्यकता महसूस होने लगी है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे ट्यूबवेल के माध्यम से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, जबकि अधिकांश किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद यूरिया का छिड़काव किया जा सके।
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इस माह 8 हजार मीट्रिक टन की जरूरत
जिले में बाजरा की फसल करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में है। इसके अलावा कपास और धान का भी अच्छा रकबा है। फसलों की बढ़वार के इस महत्वपूर्ण चरण में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, जिसे पूरा करने के लिए यूरिया का प्रयोग किया जाता है। हालांकि बारिश नहीं होने से किसानों ने फिलहाल खाद की खरीद सीमित कर दी है। जुलाई माह के दौरान जिले में किसानों की जरूरत को देखते हुए करीब आठ हजार मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है।
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बॉक्स: बारिश के बाद खाद का हो उपयोग

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया का छिड़काव तभी करना चाहिए जब खेत में पर्याप्त नमी हो या हल्की बारिश के बाद खाद डाली जाए। इससे पौधों को पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं और खाद की उपयोगिता भी बढ़ जाती है। सूखी जमीन में यूरिया डालने से नाइट्रोजन का नुकसान होने की संभावना अधिक रहती है।

यूं बोले किसान
किसान नरेश कुमार, सुरेंद्र सिह, राजबीर, कलेराम का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो फसलों को नया जीवन मिलेगा और वे यूरिया का छिड़काव भी शुरू कर देंगे। बारिश से न केवल बाजरा, कपास और धान की फसलों की बढ़वार बेहतर होगी बल्कि सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। फिलहाल किसान मानसून की अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खरीफ फसलों की वृद्धि सामान्य बनी रहे और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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