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Charkhi Dadri News: किसान सहायक की मदद से मिट्टी-पानी के 55 हजार नमूनों की होगी जांच
Thu, 15 May 2025 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 15 May 2025 01:38 AM IST
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फोटो- 37
फसल कटाई के बाद दादरी शहर के बाहरी क्षेत्र में खाली पड़ा खेत। संवाद
किसान सहायक गांवों से नमूने एकत्रित कर पहुंचाएंगे प्रयोगशाला में, रिपोर्ट आने पर किसानों को करेंगे सूचित
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले की भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में खरीफ एवं रबी सीजन 2025-26 में 55 हजार मिट्टी-पानी के नमूनों की जांच की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से प्रत्येक गांव में किसान सहायक की तैनाती की जाएगी, जो नमूने एकत्रित कर प्रयोगशाला में पहुंचाएगा।
इस समय खेत खाली हो गए हैं। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। जिले में रबी व खरीफ सीजन में गेहूं, सरसों, जौ, ज्वार, बाजरा, चना, जौ, मेथी आदि की फसलें होती हैं।
पिछले डेढ़ दशक से किसान सभी प्रकार की फसलों में रासायनिक खाद का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। देसी गोबर की खाद की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जैविक खाद का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
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किसान फसल चक्र को भी नहीं अपना रहे हैं। ताकि, जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण न होने पाए। इतना ही नहीं, धान व अन्य फसलों के अवशेष भी खेत में जला दिए जाते हैं। इससे जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं।
वैसे ही जलवायु परिवर्तन से जल व भूमि प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। जल का दोहन भी ज्यादा हो रहा है। मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से भूमिगत जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जो और भी चिंता का विषय है।
सरकार की ओर से अब किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग व सरकार ने मिट्टी की जांच की मुहिम तेज कर रखी है। किसान भी अब थोड़ा जागरूक हो गए हैं।
- प्रति नमूना मिलेगा पारिश्रमिक
कृषि वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में मिट्टी-पानी के 55 हजार नमूनों की जांच की जाएगी। इसके लिए विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके लिए किसान सहायक की मदद ली जाएगी। प्रत्येक गांव में किसान सहायक तैनात होगा जो नमूने एकत्रित करेगा। उसे प्रति नमूना पारिश्रमिक भी मिलेगा। मिट्टी की जांच करवाने के लिए नमूना खेत के चारों कोने व बीच से लेना होगा। नमूना जमीन की 15 सेंटीमीटर की गहराई तक लेना चाहिए।
- भूमि का पीएच मान 8 से 9 के बीच
जिले की भूमि में पीएच मान आठ से नौ के बीच है। इसकी सामान्य रेंज साढ़े छह से साढ़े आठ तक मानी जाती है। पीएच मान के पीछे जल प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भूमिगत जल लगातार क्षारीय होता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पानी का संकट पैदा हो जाएगा।
वर्सन
नमूना जांच का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। इस समय खेत खाली हैं। किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाएं। ताकि, उसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिल सके। इन तत्वों के आधार पर खाद का इस्तेमाल करना सही होता है।
-प्रवीन कुमार, लेखाकार, भूमि परीक्षण प्रयोगशाला
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फसल कटाई के बाद दादरी शहर के बाहरी क्षेत्र में खाली पड़ा खेत। संवाद
किसान सहायक गांवों से नमूने एकत्रित कर पहुंचाएंगे प्रयोगशाला में, रिपोर्ट आने पर किसानों को करेंगे सूचित
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले की भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में खरीफ एवं रबी सीजन 2025-26 में 55 हजार मिट्टी-पानी के नमूनों की जांच की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से प्रत्येक गांव में किसान सहायक की तैनाती की जाएगी, जो नमूने एकत्रित कर प्रयोगशाला में पहुंचाएगा।
इस समय खेत खाली हो गए हैं। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। जिले में रबी व खरीफ सीजन में गेहूं, सरसों, जौ, ज्वार, बाजरा, चना, जौ, मेथी आदि की फसलें होती हैं।
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पिछले डेढ़ दशक से किसान सभी प्रकार की फसलों में रासायनिक खाद का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। देसी गोबर की खाद की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जैविक खाद का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
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किसान फसल चक्र को भी नहीं अपना रहे हैं। ताकि, जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण न होने पाए। इतना ही नहीं, धान व अन्य फसलों के अवशेष भी खेत में जला दिए जाते हैं। इससे जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं।
वैसे ही जलवायु परिवर्तन से जल व भूमि प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। जल का दोहन भी ज्यादा हो रहा है। मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से भूमिगत जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जो और भी चिंता का विषय है।
सरकार की ओर से अब किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग व सरकार ने मिट्टी की जांच की मुहिम तेज कर रखी है। किसान भी अब थोड़ा जागरूक हो गए हैं।
- प्रति नमूना मिलेगा पारिश्रमिक
कृषि वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में मिट्टी-पानी के 55 हजार नमूनों की जांच की जाएगी। इसके लिए विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके लिए किसान सहायक की मदद ली जाएगी। प्रत्येक गांव में किसान सहायक तैनात होगा जो नमूने एकत्रित करेगा। उसे प्रति नमूना पारिश्रमिक भी मिलेगा। मिट्टी की जांच करवाने के लिए नमूना खेत के चारों कोने व बीच से लेना होगा। नमूना जमीन की 15 सेंटीमीटर की गहराई तक लेना चाहिए।
- भूमि का पीएच मान 8 से 9 के बीच
जिले की भूमि में पीएच मान आठ से नौ के बीच है। इसकी सामान्य रेंज साढ़े छह से साढ़े आठ तक मानी जाती है। पीएच मान के पीछे जल प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भूमिगत जल लगातार क्षारीय होता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पानी का संकट पैदा हो जाएगा।
वर्सन
नमूना जांच का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। इस समय खेत खाली हैं। किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाएं। ताकि, उसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिल सके। इन तत्वों के आधार पर खाद का इस्तेमाल करना सही होता है।
-प्रवीन कुमार, लेखाकार, भूमि परीक्षण प्रयोगशाला