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सीसीआई में पुलिस लाइन बनाने के प्रयास नहीं चढ़े सिरे, बेहतर साइट का चयन कर जल्द एक्वायर करेंगे जमीन: डीजीपी
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चरखी दादरी। दादरी में जिला जेल और पुलिस लाइन की कमी जल्द दूर होने की उम्मीद है। प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार अग्रवाल ने रविवार को इस पर विभाग की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पहले सीसीआई की जमीन पर पुलिस लाइन बनाने के प्रयास किए गए, जो सिरे नहीं चढ़ पाए। अब दादरी एसपी ने इसके लिए कुछ नई साइट देखी हैं और जल्द ही इनमें से उपयुक्त जगह का चयन कर जमीन एक्वायर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह मामला पुलिस विभाग और सरकार दोनों के संज्ञान में हैं।
चरखी दादरी को जिला बने साढ़े पांच साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब तक यहां जिला जेल और पुलिस लाइन नहीं बनी है। जिला बनने के पुलिस कर्मचारियों की संख्या करीब चार गुना बढ़ी है जबकि थानों में दर्ज होने वाले मामलों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में जिले में पुलिस लाइन और जिला जेल की कमी बेहद खल रही है। इस कमी को दूर करने के लिए जिला पुलिस ने चार साल पहले प्रयास शुरू किए थे और अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
रविवार को दादरी पहुंचे पुलिस महानिदेशक से संवाददाता ने इस संबंध में सवाल किया। इस पर डीजीपी ने कहा कि यकीनन पुलिस लाइन व जिला जेल की कमी से परेशानी आ रही है और इसे जल्द दूर किया जाएगा। इस संबंध में अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी भी उन्होंने दी। डीजीपी ने कहा कि पहले सीसीआई की जमीन पर जिला जेल और पुलिस लाइन बनाने की योजना थी और इस संबंध में प्रयास भी किए गए, लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाए। उन्होंने बताया कि गत दिनों ही दादरी एसपी ने एडीजीपी ममता सिंह के साथ कुछ साइट का निरीक्षण किया है और रिपोर्ट हमारे पास पहुंच चुकी है। इनमें से जो साइट उपयुक्त होगी, वहां जेल और पुलिस लाइन बनाने के लिए जगह एक्वायर करने की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
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प्रतिमाह दर्ज होती हैं 125 एफआईआर
जिले में सात पुलिस थाने व सात चौकी भी हैं जिनमें प्रतिमाह 100 से 125 मामले दर्ज होते हैं। जेल की सुविधा नहीं होने से आरोपियों के परिजनों को अदालत का वकालतनामा लेकर दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। इतना ही नहीं झज्जर, नारनौल, भिवानी और रोहतक जेल में बंद बंदियों के परिजनों को मुलाकात के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे शारीरिक परेशानी के साथ आर्थिक खर्च भी बढ़ता है।
जिले में दो एडीजे और सेशन कोर्ट वर्किंग में
शहर में विभिन्न मामलों से संबंधित आठ कोर्ट वर्किंग में हैं, जिनमें दो एडीजे कोर्ट भी शामिल है। जिला सेशन कोर्ट भी शुरू हो चुकी है। जिला स्तर की कोर्ट दादरी में शुरू हुई उस समय करीब तीन हजार केस भिवानी कोर्ट से दादरी स्थानांतरित हुए थे ऐसे में दादरी कोर्ट में अब कामकाज काफी बढ़ा है। प्रतिमाह करीब 450 सजायाफ्ता या बंदी कोर्ट में पेश किए जाते हैं।
अब तक एक ही जगह आवास सुविधा
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस थाने और चौकियां हैं। अब तक दादरी मुख्यालय पर ही सदर थाने के समीप पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय सुविधा है। यहां भी करीब चालीस अधिकारी व कर्मचारियों को क्वार्टर अलॉट हैं। जिले में करीब 1200 पुलिसकर्मी हैं और ज्यादातर किराये के मकान लेकर रहने को मजबूर हैं।
दादरी जिला में पुलिस लाइन और जिला जेल की कमी जल्द दूर कर दी जाएगी। जल्द ही हम उपयुक्त जगह का चयन कर जमीन एक्वायर की प्रक्रिया पूरी करवा देंगे। इस मसले पर दादरी एसपी से लगातार हम अपडेट ले रहे हैं।
प्रशांत कुमार अग्रवाल, पुलिस महानिदेशक, हरियाणा
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चरखी दादरी को जिला बने साढ़े पांच साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब तक यहां जिला जेल और पुलिस लाइन नहीं बनी है। जिला बनने के पुलिस कर्मचारियों की संख्या करीब चार गुना बढ़ी है जबकि थानों में दर्ज होने वाले मामलों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में जिले में पुलिस लाइन और जिला जेल की कमी बेहद खल रही है। इस कमी को दूर करने के लिए जिला पुलिस ने चार साल पहले प्रयास शुरू किए थे और अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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रविवार को दादरी पहुंचे पुलिस महानिदेशक से संवाददाता ने इस संबंध में सवाल किया। इस पर डीजीपी ने कहा कि यकीनन पुलिस लाइन व जिला जेल की कमी से परेशानी आ रही है और इसे जल्द दूर किया जाएगा। इस संबंध में अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी भी उन्होंने दी। डीजीपी ने कहा कि पहले सीसीआई की जमीन पर जिला जेल और पुलिस लाइन बनाने की योजना थी और इस संबंध में प्रयास भी किए गए, लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाए। उन्होंने बताया कि गत दिनों ही दादरी एसपी ने एडीजीपी ममता सिंह के साथ कुछ साइट का निरीक्षण किया है और रिपोर्ट हमारे पास पहुंच चुकी है। इनमें से जो साइट उपयुक्त होगी, वहां जेल और पुलिस लाइन बनाने के लिए जगह एक्वायर करने की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
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प्रतिमाह दर्ज होती हैं 125 एफआईआर
जिले में सात पुलिस थाने व सात चौकी भी हैं जिनमें प्रतिमाह 100 से 125 मामले दर्ज होते हैं। जेल की सुविधा नहीं होने से आरोपियों के परिजनों को अदालत का वकालतनामा लेकर दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। इतना ही नहीं झज्जर, नारनौल, भिवानी और रोहतक जेल में बंद बंदियों के परिजनों को मुलाकात के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे शारीरिक परेशानी के साथ आर्थिक खर्च भी बढ़ता है।
जिले में दो एडीजे और सेशन कोर्ट वर्किंग में
शहर में विभिन्न मामलों से संबंधित आठ कोर्ट वर्किंग में हैं, जिनमें दो एडीजे कोर्ट भी शामिल है। जिला सेशन कोर्ट भी शुरू हो चुकी है। जिला स्तर की कोर्ट दादरी में शुरू हुई उस समय करीब तीन हजार केस भिवानी कोर्ट से दादरी स्थानांतरित हुए थे ऐसे में दादरी कोर्ट में अब कामकाज काफी बढ़ा है। प्रतिमाह करीब 450 सजायाफ्ता या बंदी कोर्ट में पेश किए जाते हैं।
अब तक एक ही जगह आवास सुविधा
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस थाने और चौकियां हैं। अब तक दादरी मुख्यालय पर ही सदर थाने के समीप पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय सुविधा है। यहां भी करीब चालीस अधिकारी व कर्मचारियों को क्वार्टर अलॉट हैं। जिले में करीब 1200 पुलिसकर्मी हैं और ज्यादातर किराये के मकान लेकर रहने को मजबूर हैं।
दादरी जिला में पुलिस लाइन और जिला जेल की कमी जल्द दूर कर दी जाएगी। जल्द ही हम उपयुक्त जगह का चयन कर जमीन एक्वायर की प्रक्रिया पूरी करवा देंगे। इस मसले पर दादरी एसपी से लगातार हम अपडेट ले रहे हैं।
प्रशांत कुमार अग्रवाल, पुलिस महानिदेशक, हरियाणा