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पेयजल आपूर्ति सुधार : 115 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के बावजूद संपर्क गलियों में नई पाइप लाइनों की दरकार
Sat, 29 Aug 2026 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:54 PM IST
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चंपापुरी स्थित जलघर का टैंक।
चरखी दादरी। शहर में पेयजल आपूर्ति में सुधार के लिए संपर्क गलियों में नई पाइप लाइनें बिछाने की आवश्यकता है। विशेषकर नई वैध हुई कॉलोनियां अभी भी मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में हैं। जनस्वास्थ्य विभाग ने 115 करोड़ रुपये के पेयजल प्रोजेक्ट के तहत बूस्टिंग स्टेशनों से जलघरों तक मुख्य लाइनें बिछाई हैं। इसके बावजूद, कई अंदरुनी क्षेत्रों में पुरानी व छोटी क्षमता की पाइप लाइनें पेयजल आपूर्ति में बाधा बन रही हैं।
जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 115 करोड़ रुपये के पेयजल प्रोजेक्ट पर काम किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत बूस्टिंग स्टेशनों से विभिन्न जलघरों तक मुख्य पाइप लाइनें बिछाई गई हैं। इन मेन लाइनों के मजबूत होने से जलघरों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था में पहले की अपेक्षा काफी सुधार हुआ है।
विभाग अब बूस्टिंग स्टेशनों में समय रहते पर्याप्त मात्रा में पानी भर रहा है। इससे आगे की आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। शहर के लिए अब दो से बढ़कर तीन जलघर हो गए हैं। इन जलघरों की स्टोरेज क्षमता भी बढ़ाई गई है। तीसरा जलघर शहर से सटते गांव घिकाड़ा में बनाया गया है। इसे अपग्रेड कर शहर के 35 फीसदी भागों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
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विभाग ने शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी की मांग और बढ़ती आबादी को देखते हुए पेयजल आपूर्ति के जोन की संख्या भी बढ़ाई है। पहले एक ही जोन में अधिक क्षेत्र होने के कारण अंतिम छोर के उपभोक्ताओं तक पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच पाता था। जोन बढ़ने के बाद पानी की आपूर्ति को अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाना आसान हुआ है, जिससे कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति में सुधार देखने को मिला है।
पुरानी पाइप लाइनों से उत्पन्न समस्या
हालांकि, शहर की अनेक संपर्क गलियों में अभी भी पुरानी पाइप लाइनें समस्या पैदा कर रही हैं। कई स्थानों पर बिछाई गई पाइप लाइनें छोटी क्षमता की हैं। आबादी बढ़ने के साथ ही पानी की मांग भी लगातार बढ़ी है, जिससे ये लाइनें अपर्याप्त साबित हो रही हैं। पुरानी पाइप लाइनों में लीकेज और दबाव की समस्या बनी हुई है। इन समस्याओं के कारण कई घरों तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पाता है। लोगों को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है। यदि संपर्क गलियों में नई और बड़ी क्षमता की पाइप लाइनें बिछाई जाती हैं, तो मुख्य प्रोजेक्ट का लाभ लोगों को और अधिक मिल सकेगा।
पेयजल कनेक्शनों को वैध करने की पहल
विभाग ने शहर में अवैध पेयजल कनेक्शनों को वैध करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रखी है। इस पहल से पेयजल वितरण व्यवस्था का सही रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। विभाग को यह भी पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में कितने उपभोक्ता हैं। इस जानकारी के आधार पर पानी की आपूर्ति की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। यह कदम वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाएगा। इससे भविष्य की जरूरतों के लिए भी योजना बनाना आसान होगा।
नहरी पानी आपूर्ति व्यवस्था में सुधार
जलघरों को नहरी पानी से भरने की व्यवस्था में भी जनस्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। लोहारू नहर पर बड़ी क्षमता की करीब चार मोटरें लगाई गई हैं। इसके साथ ही पानी संग्रहण के लिए एक बड़ा होद भी बनाया गया है। इन नई व्यवस्थाओं के कारण अब जलघरों को कम समय में भरा जा रहा है। पहले जलघरों को भरने में अधिक समय लगता था, जिससे आपूर्ति प्रभावित होती थी। अब नई व्यवस्था के बाद जलघर करीब 10 से 12 दिन में नहरी पानी से भर जाते हैं। यह सुधार शहर की पेयजल आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
विभाग ने शहर में पेयजल की क्षमता में डेढ़ गुना तक सुधार किया है। जल्द ही संपर्क गलियों में पाइप लाइनें बिछाई जाएंगी। शहरवासियों को अगले 15 साल तक पेयजल की दिक्कत नहीं हो सकेगी। अब जलघरों में 10 दिन में ही नहरी पानी भर दिया जाता है।
- सोहनलाल, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
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जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 115 करोड़ रुपये के पेयजल प्रोजेक्ट पर काम किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत बूस्टिंग स्टेशनों से विभिन्न जलघरों तक मुख्य पाइप लाइनें बिछाई गई हैं। इन मेन लाइनों के मजबूत होने से जलघरों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था में पहले की अपेक्षा काफी सुधार हुआ है।
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विभाग अब बूस्टिंग स्टेशनों में समय रहते पर्याप्त मात्रा में पानी भर रहा है। इससे आगे की आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। शहर के लिए अब दो से बढ़कर तीन जलघर हो गए हैं। इन जलघरों की स्टोरेज क्षमता भी बढ़ाई गई है। तीसरा जलघर शहर से सटते गांव घिकाड़ा में बनाया गया है। इसे अपग्रेड कर शहर के 35 फीसदी भागों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
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विभाग ने शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी की मांग और बढ़ती आबादी को देखते हुए पेयजल आपूर्ति के जोन की संख्या भी बढ़ाई है। पहले एक ही जोन में अधिक क्षेत्र होने के कारण अंतिम छोर के उपभोक्ताओं तक पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच पाता था। जोन बढ़ने के बाद पानी की आपूर्ति को अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाना आसान हुआ है, जिससे कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति में सुधार देखने को मिला है।
पुरानी पाइप लाइनों से उत्पन्न समस्या
हालांकि, शहर की अनेक संपर्क गलियों में अभी भी पुरानी पाइप लाइनें समस्या पैदा कर रही हैं। कई स्थानों पर बिछाई गई पाइप लाइनें छोटी क्षमता की हैं। आबादी बढ़ने के साथ ही पानी की मांग भी लगातार बढ़ी है, जिससे ये लाइनें अपर्याप्त साबित हो रही हैं। पुरानी पाइप लाइनों में लीकेज और दबाव की समस्या बनी हुई है। इन समस्याओं के कारण कई घरों तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पाता है। लोगों को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है। यदि संपर्क गलियों में नई और बड़ी क्षमता की पाइप लाइनें बिछाई जाती हैं, तो मुख्य प्रोजेक्ट का लाभ लोगों को और अधिक मिल सकेगा।
पेयजल कनेक्शनों को वैध करने की पहल
विभाग ने शहर में अवैध पेयजल कनेक्शनों को वैध करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रखी है। इस पहल से पेयजल वितरण व्यवस्था का सही रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। विभाग को यह भी पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में कितने उपभोक्ता हैं। इस जानकारी के आधार पर पानी की आपूर्ति की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। यह कदम वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाएगा। इससे भविष्य की जरूरतों के लिए भी योजना बनाना आसान होगा।
नहरी पानी आपूर्ति व्यवस्था में सुधार
जलघरों को नहरी पानी से भरने की व्यवस्था में भी जनस्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। लोहारू नहर पर बड़ी क्षमता की करीब चार मोटरें लगाई गई हैं। इसके साथ ही पानी संग्रहण के लिए एक बड़ा होद भी बनाया गया है। इन नई व्यवस्थाओं के कारण अब जलघरों को कम समय में भरा जा रहा है। पहले जलघरों को भरने में अधिक समय लगता था, जिससे आपूर्ति प्रभावित होती थी। अब नई व्यवस्था के बाद जलघर करीब 10 से 12 दिन में नहरी पानी से भर जाते हैं। यह सुधार शहर की पेयजल आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
विभाग ने शहर में पेयजल की क्षमता में डेढ़ गुना तक सुधार किया है। जल्द ही संपर्क गलियों में पाइप लाइनें बिछाई जाएंगी। शहरवासियों को अगले 15 साल तक पेयजल की दिक्कत नहीं हो सकेगी। अब जलघरों में 10 दिन में ही नहरी पानी भर दिया जाता है।
- सोहनलाल, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।