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Charkhi Dadri News: 115 करोड़ के पेयजल प्रोजेक्ट को मुख्यालय से स्वीकृति का इंतजार
Wed, 11 Oct 2023 10:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 11 Oct 2023 10:46 PM IST
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चरखी दादरी।
शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने और भंडारण क्षमता बढ़ाने की परियोजना को अब तक मुख्यालय से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इसकी डीएनआईटी स्वीकृत होने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया सिरे चढ़ सकेगी। इसके तहत घिकाड़ा जलघर अपग्रेड होना है जबकि नए बूस्टिंग स्टेशन व टैंक भी बनने हैं। इसके अलावा सभी बूस्टिंग स्टेशन की स्वतंत्र पाइप लाइन भी डाली जानी है।
जनस्वास्थ्य विभाग की ये परियोजना पूरे शहर से जुड़ी है और करीब एक लाख की आबादी इससे लाभांवित होगी। लंबे इंतजार के बाद ये परियोजना तैयार हुई थी और अब इस काम के शुरू होने का इंतजार भी लंबा खींचता चला जा रहा है। परियोजना पर काम पूरा होने में समय लगेगा और ऐसे में जल्द ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर काम शुरू नहीं करवाया गया तो आगामी गर्मी के सीजन में शहरवासियों को फिर से पेयजल संकट झेलना पड़ेगा। डीएनआईटी स्वीकृत होने के बाद टेंडर लगेंगे और उसके बाद वर्क अलॉट हो सकेगा।
दो साल से कागजी प्रक्रिया में फंसी योजना
शहर में पानी भंडारण की क्षमता बढ़ाने और पेयजल आपूर्ति में सुधार की परियोजना करीब दो साल से कागजी प्रक्रिया में फंसी हुई है। दूसरी ओर शहरवासी धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। पौने दो साल में परियोजना की प्रक्रिया डीएनआईटी तक पहुंच पाई है और अब अगले कदम में देरी हो रही है।
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ये होने हैं काम
विभाग पानी की भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने जा रहा है। इसके तहत छोटे-बड़े अलग-अलग बिंदुओं पर काम करने की योजना है। इसके तहत कई मेन लाइनों को बदला जाना है। मेन लाइनों की लीकेज बंद करना, बूस्टिंग से जलघरों तक अलग से पाइप लाइनें बिछाने का काम भी इसके तहत होना है। शहर के
दोनों जलघरों में वाटर स्टोरेज की क्षमता दोगुना करना और शहर से सटे गांव घिकाड़ा के जलघर को अपग्रेड कर नगर में पेयजल आपूर्ति करने की योजना पर भी काम हो रहा है। इन सभी कार्यों पर करीब 115 करोड़ का बजट खर्च होना है।
85 लाख लीटर है प्रतिदिन पानी की खपत
इस समय शहर में पानी की खपत 85 लाख लीटर प्रतिदिन है। गर्मी में यह खपत 1.40 करोड़ लीटर प्रतिदिन पहुंच जाती है। शहर में पेयजल की किल्लत तो सर्दी के मौसम में भी बनी रहती है। अब इस प्रोजेक्ट को जल्दी सिरे चढ़ाने की जरूरत है ताकि शहरवासियों से पेयजल की समस्या से छुटकारा मिल सके।
14 हजार हैं पेयजल कनेक्शन
शहर में वैध पेयजल कनेक्शन 14 हजार हैं जबकि करीब छह हजार अवैध कनेक्शन भी लगे हुए हैं। इन अवैध कनेक्शन धारकों के जरिए भी एक प्रकार से पानी की चोरी हो रही है। कई जगह तो मेन लाइनों में कनेक्शन कर रखे हैं जो नियम के अनुरूप नहीं है। इससे अप्रोच गलियों में पानी का प्रेशर कम हो रहा है। इन अवैध कनेक्शन धारकों से सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है।
जल्द ही पेयजल परियोजना की डीएनआईटी को स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इसके तुरंत बाद आगामी प्रक्रिया पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। प्रयास है कि जल्द से जल्द पेयजल परियोजना को धरातल पर सिरे चढ़ा दें।
सोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
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शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने और भंडारण क्षमता बढ़ाने की परियोजना को अब तक मुख्यालय से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इसकी डीएनआईटी स्वीकृत होने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया सिरे चढ़ सकेगी। इसके तहत घिकाड़ा जलघर अपग्रेड होना है जबकि नए बूस्टिंग स्टेशन व टैंक भी बनने हैं। इसके अलावा सभी बूस्टिंग स्टेशन की स्वतंत्र पाइप लाइन भी डाली जानी है।
जनस्वास्थ्य विभाग की ये परियोजना पूरे शहर से जुड़ी है और करीब एक लाख की आबादी इससे लाभांवित होगी। लंबे इंतजार के बाद ये परियोजना तैयार हुई थी और अब इस काम के शुरू होने का इंतजार भी लंबा खींचता चला जा रहा है। परियोजना पर काम पूरा होने में समय लगेगा और ऐसे में जल्द ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर काम शुरू नहीं करवाया गया तो आगामी गर्मी के सीजन में शहरवासियों को फिर से पेयजल संकट झेलना पड़ेगा। डीएनआईटी स्वीकृत होने के बाद टेंडर लगेंगे और उसके बाद वर्क अलॉट हो सकेगा।
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दो साल से कागजी प्रक्रिया में फंसी योजना
शहर में पानी भंडारण की क्षमता बढ़ाने और पेयजल आपूर्ति में सुधार की परियोजना करीब दो साल से कागजी प्रक्रिया में फंसी हुई है। दूसरी ओर शहरवासी धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। पौने दो साल में परियोजना की प्रक्रिया डीएनआईटी तक पहुंच पाई है और अब अगले कदम में देरी हो रही है।
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ये होने हैं काम
विभाग पानी की भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने जा रहा है। इसके तहत छोटे-बड़े अलग-अलग बिंदुओं पर काम करने की योजना है। इसके तहत कई मेन लाइनों को बदला जाना है। मेन लाइनों की लीकेज बंद करना, बूस्टिंग से जलघरों तक अलग से पाइप लाइनें बिछाने का काम भी इसके तहत होना है। शहर के
दोनों जलघरों में वाटर स्टोरेज की क्षमता दोगुना करना और शहर से सटे गांव घिकाड़ा के जलघर को अपग्रेड कर नगर में पेयजल आपूर्ति करने की योजना पर भी काम हो रहा है। इन सभी कार्यों पर करीब 115 करोड़ का बजट खर्च होना है।
85 लाख लीटर है प्रतिदिन पानी की खपत
इस समय शहर में पानी की खपत 85 लाख लीटर प्रतिदिन है। गर्मी में यह खपत 1.40 करोड़ लीटर प्रतिदिन पहुंच जाती है। शहर में पेयजल की किल्लत तो सर्दी के मौसम में भी बनी रहती है। अब इस प्रोजेक्ट को जल्दी सिरे चढ़ाने की जरूरत है ताकि शहरवासियों से पेयजल की समस्या से छुटकारा मिल सके।
14 हजार हैं पेयजल कनेक्शन
शहर में वैध पेयजल कनेक्शन 14 हजार हैं जबकि करीब छह हजार अवैध कनेक्शन भी लगे हुए हैं। इन अवैध कनेक्शन धारकों के जरिए भी एक प्रकार से पानी की चोरी हो रही है। कई जगह तो मेन लाइनों में कनेक्शन कर रखे हैं जो नियम के अनुरूप नहीं है। इससे अप्रोच गलियों में पानी का प्रेशर कम हो रहा है। इन अवैध कनेक्शन धारकों से सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है।
जल्द ही पेयजल परियोजना की डीएनआईटी को स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इसके तुरंत बाद आगामी प्रक्रिया पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। प्रयास है कि जल्द से जल्द पेयजल परियोजना को धरातल पर सिरे चढ़ा दें।
सोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग