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छुई मुई नहीं, धाकड़ बनकर रहें बेटियां: बबीता फौगाट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:36 AM IST
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Don't touch my daughters, stay strong: Babita Phogat
वा राजा की राजदुलारी मैं सिर्फ लंगोटे आला गीत पर नृत्य करते कलाकार । - फोटो : CharkhiDadri
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दूसरे दिन भी मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम, लुभावनी प्रदर्शनी और ज्ञानगंगा रूपी वचनों की धूम रही। समारोह में अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान एवं महिला एवं बाल विकास निगम की चेयरपर्सन बबीता फौगाट ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। उन्होंने कहा कि लड़कियों को छुई मुई बनकर नहीं बल्कि धाकड़ बनकर रहना चाहिए। धाकड़ का अर्थ है अंदर से पावरफुल बनना। उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी खेलों में रुचि लेनी चाहिए।
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दूसरे दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ मां शारदे व श्रीमद्भागवत गीता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर बबीता फौगाट ने किया। इसके बाद उन्होंने महोत्सव के प्रांगण में लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि गीता का रोजाना एक श्लोक सिखाकर हमें अपने बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहिए। बच्चों में संस्कार नहीं होंगे तो हमारी युवा पीढ़ी पथभ्रष्ट होती चली जाएगी। बच्चों को हमारे गौरवशाली इतिहास, धार्मिक संस्कार, पूजा-पाठ आदि का ज्ञान होना चाहिए। समारोह में उपायुक्त प्रदीप गोदारा की पत्नी वंदना गोदारा ने भी लोक कलाकारों व स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. मुनीष नागपाल व नगराधीश अमित मान ने अतिथिगण का स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए।
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विद्यार्थियों ने श्री गणेश वंदना से की कार्यक्रम की शुरुआत
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत अरावली स्कूल कादमा के विद्यार्थियों ने श्री गणेश वंदना से की। इसके बाद चंडीगढ़ से आए कलाकार कामिल व उनकी टीम ने हरियाणवी फाग नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी। जेबीएस स्कूल मकड़ाना के बच्चों ने श्री कृष्णलीला व लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों से दर्शकों का मन मोह लिया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कलाकार राजकपूर और पवन ने महाभारत पर आधारित लोकगीत सुनाए।
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ईसा से 3067 साल पहले माना जाता है महाभारत काल: प्रोफेसर यशवीर
महोत्सव के तहत आयोजित सेमिनार में जनता कालेज के प्राचार्य प्रो. यशवीर सिंह ने कहा कि गीता भगवान का स्वयं गाया हुआ गीत है। ईसा से 3067 साल पहले महाभारत काल माना जाता है। गीता के ज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर उन्होंने प्रकाश डाला। इसी कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. एमके जैन ने कहा कि प्राचीन काल में भी बाजारों का शुद्ध व्यवहार रखने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी। जिसका सटीक उदाहरण उन्होंने कौटिल्य शास्त्र से दिया।

 गीता महोत्सव के दौरान लगाई गई स्टाल का अवलोकन करते बबीता फौगाट ।

गीता महोत्सव के दौरान लगाई गई स्टाल का अवलोकन करते बबीता फौगाट ।- फोटो : CharkhiDadri

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